मध्य प्रदेश ओबीसी आरक्षण विवाद: उमंग सिंघार ने मोहन यादव से विशेष विधानसभा सत्र बुलाने की माँग की
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आरक्षण को लेकर राजनीतिक तनाव बढ़ गया है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने मुख्यमंत्री मोहन यादव से विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर कानून पारित करने की माँग की है, जबकि भारतीय जनता पार्टी (BJP) का कहना है कि राज्य सरकार इस मसले पर गंभीरता से काम कर रही है। यह विवाद तब गहराया जब जबलपुर उच्च न्यायालय ने ओबीसी को 14% के स्थान पर 27% आरक्षण देने के फैसले को रद्द कर दिया।
मुख्य घटनाक्रम
13 अक्टूबर 2026 को नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने स्पष्ट रुख अपनाते हुए कहा कि यदि राज्य सरकार वास्तव में ओबीसी को आरक्षण दिलाना चाहती है, तो उसे उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में स्थगन प्राप्त करने में समय नष्ट करने के बजाय विधानसभा का विशेष सत्र बुलाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि ओबीसी आरक्षण मसले पर सर्वदलीय बैठक पहले ही हो चुकी है, इसलिए विशेष सत्र बुलाकर कानून पारित करना संभव है।
सिंघार ने आरोप लगाया, 'सरकार को ओबीसी को झूठे सपने दिखाना बंद कर देना चाहिए।' उन्होंने कहा कि यदि सरकार की नीयत साफ है तो विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने में कोई बाधा नहीं होनी चाहिए।
मुख्यमंत्री की कानूनी रणनीति
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मंगलवार को नई दिल्ली में भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और प्रदेश के महाधिवक्ता प्रशांत सिंह के साथ बैठक की। इस बैठक में जबलपुर उच्च न्यायालय के निर्णय से जुड़े विधिक पहलुओं और आगामी कानूनी कार्यवाही की रणनीति पर विस्तृत चर्चा हुई। यह संकेत देता है कि राज्य सरकार फिलहाल न्यायिक मार्ग को प्राथमिकता दे रही है।
गौरतलब है कि जबलपुर उच्च न्यायालय का यह निर्णय उस फैसले को रद्द करने का है जिसमें ओबीसी को 27% आरक्षण दिए जाने का प्रावधान था — जो पहले 14% था। यह वर्गों की राजनीतिक-सामाजिक महत्ता को देखते हुए एक संवेदनशील मसला है।
भाजपा का पक्ष
भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता अजय सिंह यादव ने कहा कि मोहन यादव सरकार ओबीसी आरक्षण को लेकर पूरी गंभीरता के साथ काम कर रही है और सभी वैधानिक विकल्पों पर विचार किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संवैधानिक और कानूनी प्रावधानों के अनुरूप पिछड़े वर्ग को उनका हक दिलाने के लिए प्रभावी कार्रवाई की जाएगी।
अजय सिंह यादव ने आगे कहा, 'भाजपा सरकार का दृढ़ संकल्प है कि पिछड़े वर्ग के हितों की रक्षा के लिए हर संभव वैधानिक प्रयास किया जाए।' उन्होंने पिछड़ा वर्ग को आश्वस्त किया कि सरकार उनके न्याय के लिए प्रतिबद्ध है।
आम जनता और ओबीसी समुदाय पर असर
यह विवाद मध्य प्रदेश के उन लाखों ओबीसी परिवारों को सीधे प्रभावित करता है जो सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में अधिक आरक्षण की उम्मीद रखते हैं। उच्च न्यायालय के निर्णय के बाद 27% की बजाय 14% आरक्षण लागू रहेगा, जब तक कोई वैधानिक या न्यायिक राहत नहीं मिलती।
यह ऐसे समय में आया है जब देश भर में आरक्षण की राजनीति चुनावी परिदृश्य को प्रभावित कर रही है। आलोचकों का कहना है कि इस मसले पर विलंब ओबीसी समुदाय के विश्वास को कमज़ोर करता है।
क्या होगा आगे
अब सबकी निगाहें इस पर हैं कि मुख्यमंत्री मोहन यादव विशेष सत्र की माँग को स्वीकार करते हैं या सर्वोच्च न्यायालय में कानूनी लड़ाई को आगे बढ़ाते हैं। विपक्ष के दबाव और ओबीसी समुदाय की अपेक्षाओं के बीच राज्य सरकार का अगला कदम इस राजनीतिक विवाद की दिशा तय करेगा।