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क्या मध्य प्रदेश के सांची में विश्व बाल दिवस पर 100 इमारतें ब्लू लाइट से रोशन हुईं?

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क्या मध्य प्रदेश के सांची में विश्व बाल दिवस पर 100 इमारतें ब्लू लाइट से रोशन हुईं?

सारांश

20 नवंबर को विश्व बाल दिवस पर सांची सहित 100 इमारतें ब्लू लाइट से रोशन हुईं, जिससे बच्चों के अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया गया। यह आयोजन भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा आयोजित 'बाल अधिकार सप्ताह' का हिस्सा है। जानें इस पहल का महत्व और इसके पीछे का उद्देश्य।

मुख्य बातें

सांची सहित 100 इमारतें ब्लू लाइट से रोशन हुईं।
इस वर्ष की थीम 'गो ब्लू' है।
पहल का उद्देश्य बच्चों के अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।
यह आयोजन 'बाल अधिकार सप्ताह' का हिस्सा है।
यूनिसेफ का योगदान बच्चों के मुद्दों को प्रमुखता देने में है।

भोपाल, 20 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। पूरे विश्व में गुरुवार, 20 नवंबर को विश्व बाल दिवस मनाया जा रहा है। इस विशेष अवसर पर मध्य प्रदेश के ऐतिहासिक स्थल सांची के साथ-साथ 100 इमारतों को ब्लू लाइट से रोशन किया गया। इसका उद्देश्य लोगों को बच्चों के अधिकारों और उनकी आवश्यकताओं के प्रति जागरूक करना है। साथ ही, आमजन का ध्यान इस दिशा में आकर्षित करना भी है।

विश्व बाल दिवस के तहत यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल सांची के ऐतिहासिक स्तूप समेत 100 इमारतों को ब्लू लाइट में रोशन करना बच्चों के अधिकारों के प्रति एकजुटता का प्रतीक बन गया। विश्व बाल दिवस की पूर्व संध्या 19 नवंबर और बाल दिवस की रात 20 नवंबर को ये इमारतें ब्लू लाइट की चमक से रोशन होंगी।

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) इन दो दिनों को 'बाल अधिकार सप्ताह' के रूप में मनाने जा रहा है। इस वर्ष के विश्व बाल दिवस की थीम में से एक महत्वपूर्ण थीम है 'गो ब्लू', जिसका अर्थ है बच्चों के अधिकारों के लिए खड़ा होना और उनके प्रति जागरूकता बढ़ाना।

इस वैश्विक आह्वान के तहत एएसआई ने सांची के इस प्राचीन और भव्य स्मारक को ब्लू लाइट से जगमगाकर दिखाया। 'गो ब्लू' पहल का उद्देश्य बाल अधिकारों के महत्व को जनता के सामने लाना और समाज का ध्यान इस ओर आकर्षित करना है। सांची के स्तूप का ब्लू लाइट से जगमगाना न केवल एक अद्भुत दृश्य प्रस्तुत कर रहा था, बल्कि यह संदेश भी दे रहा था कि बच्चों की सुरक्षा, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे मौलिक अधिकार सर्वोपरि हैं।

यह पहल विश्व धरोहरों को सामाजिक जागरूकता के मंच के रूप में उपयोग करने का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। यह आयोजन बच्चों के अधिकारों के प्रति भारतीय पुरातत्व विभाग की प्रतिबद्धता को दर्शाता है और यह याद दिलाता है कि प्रत्येक बच्चे के लिए एक सुरक्षित और बेहतर भविष्य सुनिश्चित करना सामूहिक जिम्मेदारी है।

दुनिया में 20 नवंबर को विश्व बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस अवसर पर बच्चों के अधिकारों के लिए काम करने वाली संस्था यूनिसेफ ने बच्चों के मुद्दों को सार्वजनिक एजेंडे में उनके अधिकारों को सामने लाने की जिम्मेदारी ली है। गो ब्लू फॉर चिल्ड्रन के आह्वान का मकसद बच्चों का सम्मान करना, उनके अधिकारों का समर्थन करना और उनकी आवाज बुलंद करना है।

इस मौके पर दुनिया भर में 19 और 20 नवंबर को महत्वपूर्ण विरासत भवनों और स्मारकों को गो ब्लू के अंतर्गत ब्लू लाइट से रोशन किया जाता है। मध्य प्रदेश में बच्चों के प्रति समर्थन दिखाने के लिए 19 नवंबर की मध्य रात्रि से 20 नवंबर की मध्य रात्रि तक मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण और मध्य प्रदेश सरकार के पुरातत्व विभाग के सहयोग से 100 से ज्यादा इमारतों को ब्लू लाइट से रोशन किया गया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि समाज में जागरूकता बढ़ाने का भी कार्य करती है। हमें मिलकर बच्चों के भविष्य को सुरक्षित बनाना चाहिए।
RashtraPress
28 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विश्व बाल दिवस कब मनाया जाता है?
विश्व बाल दिवस हर वर्ष 20 नवंबर को मनाया जाता है।
इस वर्ष की विश्व बाल दिवस की थीम क्या है?
इस वर्ष की थीम 'गो ब्लू' है, जो बच्चों के अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने का सुझाव देती है।
कौन सी इमारतें ब्लू लाइट से रोशन की गईं?
मध्य प्रदेश में सांची सहित 100 इमारतें ब्लू लाइट से रोशन की गईं।
इस पहल का उद्देश्य क्या है?
इस पहल का उद्देश्य बच्चों के अधिकारों के प्रति जागरूकता फैलाना और समाज का ध्यान इस ओर आकर्षित करना है।
यूनिसेफ का इस आयोजन में क्या योगदान है?
यूनिसेफ बच्चों के मुद्दों को सार्वजनिक एजेंडे में लाने का कार्य कर रही है।
राष्ट्र प्रेस
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