क्या महाराष्ट्र महानगरपालिका चुनावों से पहले महायुति को बढ़त मिली है?
सारांश
Key Takeaways
- महायुति को 66 सीटों पर जीत की उम्मीद है।
- अजित पवार के नेतृत्व में एनसीपी के दो उम्मीदवार निर्विरोध विजयी हुए।
- महानगरपालिका चुनावों के लिए मतदान 15 जनवरी को होगा।
- राज ठाकरे ने चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।
- भाजपा के साथ सत्तारूढ़ शिवसेना ने भी जीत दर्ज की है।
मुंबई, 3 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। महाराष्ट्र में महानगरपालिका चुनावों से पूर्व भाजपा के नेतृत्व वाले महायुति गठबंधन को एक महत्वपूर्ण बढ़त मिली है। महायुति के 66 सीटों पर जीत की संभावना है, जबकि एनसीपी के दो उम्मीदवारों ने भी सफलता प्राप्त की है।
महानगरपालिका चुनावों की प्रक्रिया में शुक्रवार को नामांकन पत्रों की वापसी की अंतिम तिथि के बाद, विभिन्न विपक्षी दलों और गठबंधनों के उम्मीदवारों ने अपने नाम वापस ले लिए। इसके परिणामस्वरूप कुल 68 उम्मीदवारों का निर्विरोध चुनाव होना तय है। इनमें से 66 उम्मीदवार भाजपा–शिवसेना गठबंधन से हैं, जबकि उपमुख्यमंत्री अजित पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के दो उम्मीदवार भी निर्विरोध विजयी हुए हैं।
मुंबई महानगर क्षेत्र (एमएमआर) की कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका में सर्वाधिक 21 महायुति उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए हैं, जिनमें भाजपा के 15 और शिवसेना के 6 उम्मीदवार शामिल हैं। उत्तर महाराष्ट्र के जलगांव जिले में, जो पारंपरिक रूप से भाजपा और शिवसेना दोनों के लिए एक मजबूत राजनीतिक क्षेत्र माना जाता है, दोनों दलों ने समान सफलता प्राप्त की है। यहाँ भाजपा और शिवसेना के छह-छह उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं।
पनवेल में भी भाजपा ने अपनी स्थिति को मजबूत करते हुए सात उम्मीदवारों को निर्विरोध जीत दिलाई है। भिवंडी में, जिसे लंबे समय से शरद पवार गुट की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी का प्रभावशाली क्षेत्र माना जाता रहा है, वहां भाजपा के छह उम्मीदवारों को निर्विरोध जीत मिली है।
धुले जिले में भाजपा के तीन उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं। अहिल्यानगर में हुए निर्विरोध चुनावों में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी को दो सीटें मिली हैं, जबकि भाजपा ने एक सीट पर निर्विरोध जीत दर्ज की है। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के गृह क्षेत्र ठाणे में भाजपा के साथ मतभेद और राजनीतिक खींचतान के बावजूद शिवसेना ने छह सीटों पर निर्विरोध जीत प्राप्त की है।
हालांकि, ठाणे जिले में हुए इन निर्विरोध चुनावों के खिलाफ राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने आपत्ति जताते हुए चुनावी प्रक्रिया और सत्तारूढ़ गठबंधन के रवैये पर सवाल उठाए हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि हाल ही में संपन्न नगर परिषद चुनावों में लगभग क्लीन स्वीप के बाद ये निर्विरोध जीतें राज्य में सत्तारूढ़ महायुति के लिए मनोवैज्ञानिक बढ़त और नई ऊर्जा लेकर आई हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, निर्विरोध जीत के कारण सत्तारूढ़ दलों को न केवल संगठनात्मक मजबूती मिलेगी, बल्कि वे उन क्षेत्रों में भी पूरी ताकत से प्रचार कर सकेंगे जहां सीधा चुनावी मुकाबला बाकी है।
ज्ञात रहे कि महाराष्ट्र में बीएमसी समेत अन्य महानगरपालिका चुनावों के लिए 15 जनवरी को मतदान होगा, जबकि 16 जनवरी को नतीजे घोषित किए जाएंगे।