10 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

महारानी दुर्गावती बलिदान दिवस: अमित शाह बोले- 'नारी शक्ति की अमर प्रतीक', कई केंद्रीय मंत्रियों ने किया नमन

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
महारानी दुर्गावती बलिदान दिवस: अमित शाह बोले- 'नारी शक्ति की अमर प्रतीक', कई केंद्रीय मंत्रियों ने किया नमन

सारांश

महारानी दुर्गावती के बलिदान दिवस पर 24 जून को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह समेत कई वरिष्ठ नेताओं ने एक्स पर श्रद्धांजलि दी। शाह ने उन्हें नारी शक्ति की अमर प्रतीक बताया — गोंडवाना की इस वीरांगना ने 1564 में मुगल आक्रांताओं के विरुद्ध लड़ते हुए वीरगति पाई थी।

मुख्य बातें

24 जून को महारानी दुर्गावती के बलिदान दिवस पर राष्ट्रीय स्तर पर श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
गृह मंत्री अमित शाह ने उन्हें 'न्यायप्रिय शासिका और नारी शक्ति की प्रतीक' बताया।
केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान , शिवराज सिंह चौहान और अनुप्रिया पटेल ने भी एक्स पर श्रद्धांजलि दी।
BJP अध्यक्ष नितिन नवीन ने कहा कि रानी दुर्गावती ने विदेशी आक्रांताओं के समक्ष झुकने के बजाय वीरगति को वरण किया।
महारानी दुर्गावती ने 24 जून 1564 को मुगल सेनापति के विरुद्ध युद्ध करते हुए बलिदान दिया था।

गोंडवाना साम्राज्य की वीरांगना महारानी दुर्गावती के बलिदान दिवस पर 24 जून को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के अध्यक्ष नितिन नवीन सहित अनेक नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। शाह ने उन्हें न्यायप्रिय शासिका और नारी शक्ति की अमर प्रतीक बताया।

अमित शाह का संदेश

गृह मंत्री अमित शाह ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, 'न्यायप्रिय शासिका और नारी शक्ति की प्रतीक, गोंडवाना साम्राज्य की महारानी दुर्गावती ने स्वराज्य और स्वसंस्कृति की रक्षा के लिए मुगल आक्रांताओं के विरुद्ध वीरतापूर्वक संघर्ष करते हुए अपने प्राणों का बलिदान दिया।' उन्होंने आगे जोड़ा कि रानी दुर्गावती ने शासन को जनकेंद्रित बनाकर अनेक मंदिरों, धर्मशालाओं और तालाबों का निर्माण कराया और वे सुशासन तथा सेवा की अमर प्रेरणा हैं।

धर्मेंद्र प्रधान और शिवराज सिंह चौहान की श्रद्धांजलि

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा, 'मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान देने वाली रानी दुर्गावती का जीवन त्याग, शौर्य और स्वाभिमान की अमर प्रेरणा है। उनकी वीरगाथा भारतीय इतिहास में स्वर्णिम अध्याय के रूप में सदैव स्मरणीय रहेगी।' केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने काव्यात्मक शब्दों में लिखा, 'चंदेलों की बेटी थी, गौंडवाने की रानी थी, चंडी थी, रणचंडी थी, वह दुर्गावती भवानी थी।' चौहान ने यह भी कहा कि इस माटी का कण-कण महान वीरांगना की वीरता, साहस और शौर्यगाथा से धन्य है।

अनुप्रिया पटेल और नितिन नवीन का नमन

केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने एक्स पर लिखा कि मुगल आक्रांताओं के विरुद्ध रानी दुर्गावती का अद्वितीय पराक्रम और राष्ट्ररक्षा के लिए दिया गया सर्वोच्च बलिदान भारतीय इतिहास में सदैव स्वर्णाक्षरों में अंकित रहेगा। भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने एक्स पोस्ट में कहा कि रानी दुर्गावती ने कठिन परिस्थितियों में भी शौर्य, स्वाभिमान और नेतृत्व का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया तथा विदेशी आक्रांताओं के समक्ष झुकने के बजाय वीरगति को वरण कर इतिहास में अमिट छाप छोड़ी।

महारानी दुर्गावती: ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य

गौरतलब है कि महारानी दुर्गावती गोंडवाना साम्राज्य की शासिका थीं, जिन्होंने 24 जून 1564 को मुगल सेनापति आसफ खान के विरुद्ध नर्रई नाले के युद्ध में वीरगति प्राप्त की थी। वे चंदेल राजवंश की पुत्री और गोंड राजा दलपतशाह की पत्नी थीं। उनके शासनकाल में जनकल्याण के अनेक कार्य हुए, जो आज भी मध्य भारत के इतिहास में स्मरणीय हैं। प्रत्येक वर्ष उनके बलिदान दिवस पर राष्ट्रीय स्तर पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित होते हैं।

आगे क्या

राष्ट्रीय नेताओं की इस श्रद्धांजलि से स्पष्ट है कि महारानी दुर्गावती की विरासत आने वाली पीढ़ियों के लिए राष्ट्रभक्ति और नारी सशक्तिकरण की प्रेरणा बनी रहेगी। मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों में उनके नाम पर आयोजित कार्यक्रम और संस्थाएँ उनकी स्मृति को जीवित रखे हुए हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

किंतु यह विचारणीय है कि उनकी विरासत केवल सोशल मीडिया पोस्ट तक सीमित न रहे। गोंडवाना क्षेत्र के आदिवासी समुदायों के लिए वे आज भी जीवंत प्रेरणा हैं, परंतु उनके नाम पर ठोस नीतिगत पहल की चर्चा प्रायः अनुपस्थित रहती है। नारी सशक्तिकरण के दावों को महारानी दुर्गावती जैसी ऐतिहासिक नायिकाओं से जोड़ना तभी सार्थक होगा जब इसके साथ जनजातीय महिलाओं के उत्थान की दिशा में मूर्त कदम भी उठाए जाएँ।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महारानी दुर्गावती कौन थीं और उनका बलिदान दिवस कब है?
महारानी दुर्गावती गोंडवाना साम्राज्य की शासिका थीं, जिन्होंने 24 जून 1564 को मुगल सेनापति आसफ खान के विरुद्ध युद्ध करते हुए वीरगति प्राप्त की। वे चंदेल राजवंश की पुत्री और गोंड राजा दलपतशाह की पत्नी थीं। प्रत्येक वर्ष 24 जून को उनका बलिदान दिवस मनाया जाता है।
अमित शाह ने महारानी दुर्गावती के बारे में क्या कहा?
गृह मंत्री अमित शाह ने एक्स पर लिखा कि महारानी दुर्गावती न्यायप्रिय शासिका और नारी शक्ति की प्रतीक थीं, जिन्होंने स्वराज्य और स्वसंस्कृति की रक्षा के लिए मुगल आक्रांताओं के विरुद्ध संघर्ष करते हुए अपने प्राणों का बलिदान दिया। उन्होंने रानी दुर्गावती को सुशासन और सेवा की अमर प्रेरणा बताया।
बलिदान दिवस पर किन-किन नेताओं ने श्रद्धांजलि दी?
24 जून को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल और BJP अध्यक्ष नितिन नवीन ने एक्स पर श्रद्धांजलि अर्पित की।
महारानी दुर्गावती का ऐतिहासिक महत्व क्या है?
महारानी दुर्गावती ने गोंडवाना साम्राज्य में जनकल्याण के लिए मंदिरों, धर्मशालाओं और तालाबों का निर्माण कराया और शासन को जनकेंद्रित बनाया। मुगल आक्रमण के विरुद्ध उनके अदम्य साहस और बलिदान ने उन्हें भारतीय इतिहास में नारी शक्ति के प्रतीक के रूप में स्थापित किया।
शिवराज सिंह चौहान ने रानी दुर्गावती को किन शब्दों में याद किया?
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने काव्यात्मक शब्दों में लिखा, 'चंदेलों की बेटी थी, गौंडवाने की रानी थी, चंडी थी, रणचंडी थी, वह दुर्गावती भवानी थी।' उन्होंने कहा कि इस माटी का कण-कण महान वीरांगना की वीरता और शौर्यगाथा से गौरवान्वित है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 4 महीने पहले
  5. 10 महीने पहले
  6. 10 महीने पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले