महारानी दुर्गावती बलिदान दिवस: अमित शाह बोले- 'नारी शक्ति की अमर प्रतीक', कई केंद्रीय मंत्रियों ने किया नमन
सारांश
मुख्य बातें
गोंडवाना साम्राज्य की वीरांगना महारानी दुर्गावती के बलिदान दिवस पर 24 जून को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के अध्यक्ष नितिन नवीन सहित अनेक नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। शाह ने उन्हें न्यायप्रिय शासिका और नारी शक्ति की अमर प्रतीक बताया।
अमित शाह का संदेश
गृह मंत्री अमित शाह ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, 'न्यायप्रिय शासिका और नारी शक्ति की प्रतीक, गोंडवाना साम्राज्य की महारानी दुर्गावती ने स्वराज्य और स्वसंस्कृति की रक्षा के लिए मुगल आक्रांताओं के विरुद्ध वीरतापूर्वक संघर्ष करते हुए अपने प्राणों का बलिदान दिया।' उन्होंने आगे जोड़ा कि रानी दुर्गावती ने शासन को जनकेंद्रित बनाकर अनेक मंदिरों, धर्मशालाओं और तालाबों का निर्माण कराया और वे सुशासन तथा सेवा की अमर प्रेरणा हैं।
धर्मेंद्र प्रधान और शिवराज सिंह चौहान की श्रद्धांजलि
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा, 'मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान देने वाली रानी दुर्गावती का जीवन त्याग, शौर्य और स्वाभिमान की अमर प्रेरणा है। उनकी वीरगाथा भारतीय इतिहास में स्वर्णिम अध्याय के रूप में सदैव स्मरणीय रहेगी।' केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने काव्यात्मक शब्दों में लिखा, 'चंदेलों की बेटी थी, गौंडवाने की रानी थी, चंडी थी, रणचंडी थी, वह दुर्गावती भवानी थी।' चौहान ने यह भी कहा कि इस माटी का कण-कण महान वीरांगना की वीरता, साहस और शौर्यगाथा से धन्य है।
अनुप्रिया पटेल और नितिन नवीन का नमन
केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने एक्स पर लिखा कि मुगल आक्रांताओं के विरुद्ध रानी दुर्गावती का अद्वितीय पराक्रम और राष्ट्ररक्षा के लिए दिया गया सर्वोच्च बलिदान भारतीय इतिहास में सदैव स्वर्णाक्षरों में अंकित रहेगा। भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने एक्स पोस्ट में कहा कि रानी दुर्गावती ने कठिन परिस्थितियों में भी शौर्य, स्वाभिमान और नेतृत्व का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया तथा विदेशी आक्रांताओं के समक्ष झुकने के बजाय वीरगति को वरण कर इतिहास में अमिट छाप छोड़ी।
महारानी दुर्गावती: ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य
गौरतलब है कि महारानी दुर्गावती गोंडवाना साम्राज्य की शासिका थीं, जिन्होंने 24 जून 1564 को मुगल सेनापति आसफ खान के विरुद्ध नर्रई नाले के युद्ध में वीरगति प्राप्त की थी। वे चंदेल राजवंश की पुत्री और गोंड राजा दलपतशाह की पत्नी थीं। उनके शासनकाल में जनकल्याण के अनेक कार्य हुए, जो आज भी मध्य भारत के इतिहास में स्मरणीय हैं। प्रत्येक वर्ष उनके बलिदान दिवस पर राष्ट्रीय स्तर पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित होते हैं।
आगे क्या
राष्ट्रीय नेताओं की इस श्रद्धांजलि से स्पष्ट है कि महारानी दुर्गावती की विरासत आने वाली पीढ़ियों के लिए राष्ट्रभक्ति और नारी सशक्तिकरण की प्रेरणा बनी रहेगी। मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों में उनके नाम पर आयोजित कार्यक्रम और संस्थाएँ उनकी स्मृति को जीवित रखे हुए हैं।