महाराष्ट्र में खाद लिंकिंग पर बैन: कृषि मंत्री दत्तात्रेय भरने का यूपी मॉडल अपनाने का ऐलान

Click to start listening
महाराष्ट्र में खाद लिंकिंग पर बैन: कृषि मंत्री दत्तात्रेय भरने का यूपी मॉडल अपनाने का ऐलान

सारांश

महाराष्ट्र के कृषि मंत्री दत्तात्रेय भरने ने उर्वरक लिंकिंग पर बैन का ऐलान किया — यूपी मॉडल अपनाते हुए। खुदरा विक्रेताओं पर जबरन गैर-सब्सिडी सामग्री थोपने की प्रथा बंद होगी, हरियाणा मॉडल से आपराधिक जिम्मेदारी निर्माताओं पर जाएगी, और 27 अप्रैल से चली डीलर हड़ताल खत्म होने की उम्मीद है।

Key Takeaways

  • कृषि मंत्री दत्तात्रेय भरने ने 28 अप्रैल 2026 को मुंबई में उर्वरक लिंकिंग पर प्रतिबंध का ऐलान किया।
  • यूपी मॉडल के आधार पर सब्सिडी वाले उर्वरक कंपनियाँ अब खुदरा विक्रेताओं पर गैर-सब्सिडी सामग्री खरीदने की शर्त नहीं थोप सकेंगी।
  • हरियाणा मॉडल के अध्ययन से घटिया उत्पाद मामलों में निर्माताओं पर कार्रवाई होगी, खुदरा विक्रेताओं को राहत मिलेगी।
  • अप्रमाणित एचटीबीटी कपास बीजों के खिलाफ सख्त कार्रवाई; केंद्र को औपचारिक प्रस्ताव भेजा जाएगा।
  • 27 अप्रैल से जारी राज्यव्यापी डीलर हड़ताल वापसी की चर्चाएँ अनुकूल दिशा में।
  • मंत्री भरने केंद्रीय मंत्री जे. पी. नड्डा से मुलाकात की योजना बना रहे हैं।

महाराष्ट्र के कृषि मंत्री दत्तात्रेय भरने ने 28 अप्रैल 2026 को मुंबई में आयोजित एक उच्च-स्तरीय बैठक में घोषणा की कि राज्य सरकार 'उर्वरक लिंकिंग' की अनुचित प्रथा पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के लिए एक ठोस नीति लागू करेगी। यह नीति उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा हाल ही में लिए गए निर्णय पर आधारित होगी। इस बैठक का उद्देश्य महाराष्ट्र उर्वरक, कीटनाशक और बीज डीलर एसोसिएशन की प्रमुख शिकायतों का समाधान करना था।

उर्वरक लिंकिंग पर प्रतिबंध की रूपरेखा

मंत्री भरने ने स्पष्ट किया कि जिन कंपनियों को सब्सिडी वाले उर्वरक बेचने का अधिकार प्राप्त है, उन्हें अब खुदरा विक्रेताओं पर यह शर्त थोपने से रोका जाएगा कि वे आपूर्ति प्राप्त करने के लिए गैर-सब्सिडी वाले उर्वरक या अन्य कृषि-सामग्री भी अनिवार्य रूप से खरीदें। उत्तर प्रदेश मॉडल की तर्ज पर यह 'जबरन लिंकिंग' प्रथा बंद की जाएगी, जो लंबे समय से छोटे खुदरा विक्रेताओं के लिए आर्थिक बोझ बनी हुई थी।

खुदरा विक्रेताओं की सुरक्षा और हरियाणा मॉडल

मंत्री ने घोषणा की कि यदि मूल, सीलबंद पैकेजिंग में बेचे गए बीज, उर्वरक या कीटनाशक परीक्षण के दौरान घटिया पाए जाते हैं, तो राज्य सरकार 'हरियाणा मॉडल' का अध्ययन करेगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि खुदरा विक्रेताओं को आपराधिक रूप से उत्तरदायी न ठहराया जाए, बल्कि निर्माताओं पर कार्रवाई पर ध्यान केंद्रित किया जाए। इसके अतिरिक्त, समाप्त हो चुकी कीटनाशक दवाएं खुदरा विक्रेताओं के पास पड़ी रहने के बजाय आपूर्तिकर्ताओं को वापस भेजे जाने की व्यवस्था बनाई जाएगी।

अवैध बीजों पर सख्ती और तकनीकी पारदर्शिता

भरने ने पड़ोसी राज्यों से आने वाले अप्रमाणित एचटीबीटी कपास के बीजों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया। इस संबंध में केंद्र सरकार को एक औपचारिक प्रस्ताव भेजा जाएगा और राज्य का गृह विभाग पुलिस बलों के साथ समन्वय स्थापित करेगा। मंत्री ने केंद्र सरकार के 'साथी' पोर्टल को बीजों के उत्पादन से लेकर बिक्री तक की निगरानी के लिए एक प्रभावी प्रणाली बताते हुए सभी उत्पादकों और आपूर्तिकर्ताओं से इसका उपयोग करने का आह्वान किया।

ईपीओएस और प्रशिक्षण कार्यक्रम में राहत

'इलेक्ट्रॉनिक पॉइंट ऑफ सेल' (ईपीओएस) प्रणाली के संबंध में मंत्री ने स्पष्ट किया कि यदि किसी उपयोगकर्ता को तकनीकी समस्याओं का सामना करना पड़ता है, तो उसके खिलाफ तत्काल कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। खुदरा विक्रेताओं के लिए अनिवार्य 15-दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम की अवधि को आवश्यकता के अनुसार बढ़ाया जा सकता है, ताकि व्यावसायिक मालिकों की ज़रूरतें पूरी हो सकें।

हड़ताल वापसी की उम्मीद और आगे की योजना

मंत्री भरने ने बताया कि वे केंद्रीय मंत्री जे. पी. नड्डा से मिलने की योजना बना रहे हैं, ताकि केंद्रीय स्तर पर कृषि सामग्री से संबंधित लंबित मुद्दों का समाधान किया जा सके। उनके सकारात्मक आश्वासनों के बाद, 27 अप्रैल से शुरू हुई राज्यव्यापी हड़ताल को वापस लेने संबंधी चर्चाओं का रुख अनुकूल हो गया है। सरकार को उम्मीद है कि यह गतिरोध जल्द समाप्त होगा और आगामी कृषि मौसम के लिए कृषि-सामग्री की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित हो सकेगी।

Point of View

लेकिन असली सवाल क्रियान्वयन का है — राज्य में पहले भी कृषि सुधारों की घोषणाएँ हुई हैं जो ज़मीन पर उतरने से पहले ही ठंडी पड़ गईं। यूपी और हरियाणा मॉडल का अध्ययन करना एक बात है, उन्हें महाराष्ट्र की जटिल आपूर्ति श्रृंखला में लागू करना बिल्कुल अलग चुनौती है। गौरतलब है कि खुदरा विक्रेताओं की हड़ताल किसानों तक कृषि-सामग्री पहुँचाने की कड़ी को प्रभावित करती है — और यदि आगामी खरीफ मौसम से पहले गतिरोध नहीं सुलझा, तो इसकी सीधी मार किसानों पर पड़ेगी। केंद्रीय मंत्री नड्डा से प्रस्तावित मुलाकात यह भी दर्शाती है कि राज्य स्तर पर अकेले यह समस्या हल होने वाली नहीं है।
NationPress
30/04/2026

Frequently Asked Questions

महाराष्ट्र में उर्वरक लिंकिंग क्या है और इस पर बैन क्यों लगाया जा रहा है?
उर्वरक लिंकिंग वह प्रथा है जिसमें सब्सिडी वाले उर्वरक आपूर्तिकर्ता खुदरा विक्रेताओं को माल देने के लिए उन पर गैर-सब्सिडी वाली कृषि-सामग्री भी खरीदने की शर्त थोपते हैं। यह खुदरा विक्रेताओं पर अनुचित आर्थिक बोझ डालती है, इसलिए कृषि मंत्री दत्तात्रेय भरने ने इसे यूपी मॉडल पर प्रतिबंधित करने का ऐलान किया है।
महाराष्ट्र डीलर हड़ताल कब शुरू हुई और क्या माँगें थीं?
महाराष्ट्र उर्वरक, कीटनाशक और बीज डीलर एसोसिएशन की राज्यव्यापी हड़ताल 27 अप्रैल 2026 को शुरू हुई। डीलरों की मुख्य माँगें उर्वरक लिंकिंग पर रोक, घटिया उत्पादों में खुदरा विक्रेताओं की आपराधिक जिम्मेदारी समाप्त करना और समाप्त कीटनाशकों की वापसी व्यवस्था थीं।
हरियाणा मॉडल क्या है जिसका महाराष्ट्र अध्ययन करेगा?
हरियाणा मॉडल के तहत यदि मूल, सीलबंद पैकेजिंग में बेचा गया उत्पाद घटिया पाया जाता है, तो आपराधिक जिम्मेदारी खुदरा विक्रेता पर नहीं बल्कि निर्माता पर डाली जाती है। महाराष्ट्र इसी व्यवस्था को अपनाने पर विचार कर रहा है ताकि छोटे डीलरों को राहत मिल सके।
एचटीबीटी कपास बीजों पर महाराष्ट्र क्या कार्रवाई करेगा?
कृषि मंत्री भरने ने पड़ोसी राज्यों से आने वाले अप्रमाणित एचटीबीटी कपास बीजों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है। इस संबंध में केंद्र सरकार को औपचारिक प्रस्ताव भेजा जाएगा और गृह विभाग पुलिस के साथ मिलकर नियमों का पालन सुनिश्चित करेगा।
'साथी' पोर्टल का कृषि क्षेत्र में क्या उपयोग है?
केंद्र सरकार का 'साथी' पोर्टल बीजों के उत्पादन से लेकर बिक्री तक की पूरी आपूर्ति श्रृंखला की निगरानी करता है। कृषि मंत्री भरने ने सभी उत्पादकों और आपूर्तिकर्ताओं से इसका प्रभावी उपयोग करने का आह्वान किया है ताकि कृषि क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़े।
Nation Press