क्या महाराष्ट्र में शिवसेना पार्षदों के मुद्दे पर प्रमोद तिवारी की प्रतिक्रिया से सरकार को खतरा है?

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क्या महाराष्ट्र में शिवसेना पार्षदों के मुद्दे पर प्रमोद तिवारी की प्रतिक्रिया से सरकार को खतरा है?

सारांश

महाराष्ट्र में शिवसेना पार्षदों को होटल में ठहराने के मुद्दे पर प्रमोद तिवारी की प्रतिक्रिया से राजनीति में हलचल मच गई है। क्या यह स्थिति राज्य सरकार के लिए संकट का कारण बन सकती है? जानिए इस मामले में तिवारी की बारीकी से की गई विश्लेषण।

Key Takeaways

  • शिवसेना पार्षदों को होटल में ठहराना अविश्वास का संकेत है।
  • मौजूदा सरकार के लिए संकट के संकेत मिल रहे हैं।
  • भाजपा और शिंदे गुट के बीच अंदरूनी अविश्वास बढ़ रहा है।
  • बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर ध्यान देने की आवश्यकता है।
  • राजनीतिक स्थिरता बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो रहा है।

नई दिल्ली, 21 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना के पार्षदों को होटल में ठहराए जाने के विवाद पर कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की।

उन्होंने इसे भाजपा और शिवसेना (शिंदे गुट) के बीच बढ़ते अविश्वास का संकेत बताया और कहा कि यदि यह स्थिति बनी रही, तो यह राज्य सरकार के लिए गंभीर संकट उत्पन्न कर सकती है।

प्रमोद तिवारी ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा कि महाराष्ट्र में भाजपा और शिंदे गुट, दोनों के पास बहुमत है और चार सीटों की अतिरिक्त बढ़त भी है। फिर भी, दोनों दलों के बीच आंतरिक अविश्वास तेजी से बढ़ रहा है।

उन्होंने बताया कि ऐसी स्थिति में, उपमुख्यमंत्री को अपने दल के पार्षदों को सुरक्षित रखने के लिए होटल में रहने पर मजबूर होना पड़ रहा है।

तिवारी ने सवाल उठाया कि जब गठबंधन के भीतर इतना अविश्वास है, तो आगे सरकार कैसे चल सकेगी?

उन्होंने कहा कि जिस प्रकार से शिवसेना को विभाजित किया गया और एक गुट को अलग किया गया, उसका वर्तमान प्रभाव स्पष्ट है। उनके अनुसार, यह आंतरिक संघर्ष महाराष्ट्र सरकार की स्थिरता को प्रभावित कर सकता है।

कांग्रेस सांसद ने आगे कहा कि यदि भविष्य में अजित पवार और एकनाथ शिंदे कोई बड़ा निर्णय लेते हैं, तो मौजूदा सरकार के लिए संकट खड़ा हो सकता है। उन्होंने इशारों में कहा कि ऐसी स्थिति में महाराष्ट्र की सरकार गिर भी सकती है।

वहीं, प्रमोद तिवारी ने अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों का उल्लेख करते हुए इसे केंद्र सरकार की विदेश नीति की विफलता बताया।

उनके अनुसार, पड़ोसी देश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर भारत सरकार को और मजबूत कूटनीतिक कदम उठाने चाहिए थे।

Point of View

NationPress
21/01/2026

Frequently Asked Questions

क्या प्रमोद तिवारी की प्रतिक्रिया सरकार को प्रभावित कर सकती है?
हां, प्रमोद तिवारी की प्रतिक्रिया से स्पष्ट होता है कि महाराष्ट्र में अविश्वास की स्थिति सरकार के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।
क्या शिवसेना में विभाजन का प्रभाव सरकार पर पड़ेगा?
बिल्कुल, शिवसेना के विभाजन का प्रभाव राज्य सरकार की स्थिरता पर पड़ सकता है।
बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों पर तिवारी का क्या कहना है?
तिवारी ने इसे केंद्र सरकार की विदेश नीति की विफलता बताया है और कूटनीतिक कदम उठाने की आवश्यकता पर जोर दिया है।
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