क्या आवारा कुत्तों को खाना खिलाने पर महिला से बुरा व्यवहार हो तो एफआईआर दर्ज कराई जा सकती है?

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क्या आवारा कुत्तों को खाना खिलाने पर महिला से बुरा व्यवहार हो तो एफआईआर दर्ज कराई जा सकती है?

सारांश

सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों को खाना खिलाने वाली महिलाओं के खिलाफ अपमानजनक व्यवहार पर सख्त दिशा-निर्देश दिए हैं। अगर किसी महिला को ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ता है, तो वह एफआईआर दर्ज करा सकती है। जानें और क्या कहा गया कोर्ट में।

Key Takeaways

  • महिलाओं के अधिकारों की रक्षा जरूरी है।
  • आवारा कुत्तों का प्रबंधन एक महत्वपूर्ण मुद्दा है।
  • अपमानजनक टिप्पणियाँ अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता में नहीं आतीं।
  • सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस में शिकायत का विकल्प दिया है।
  • कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों से सुझाव मांगे हैं।

नई दिल्ली, 9 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों के प्रबंधन से संबंधित मामले की सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि यदि किसी महिला को कुत्तों को खाना देने के कारण मारपीट, छेड़छाड़ या अपमानजनक टिप्पणियों का सामना करना पड़ता है, तो वह थाने में एफआईआर दर्ज करा सकती है या आवश्यकता पड़ने पर हाई कोर्ट में राहत की मांग कर सकती है। कोर्ट ने यह भी बताया कि ऐसे अपमानजनक बयान और टिप्पणियां अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अंतर्गत नहीं आतीं।

सुनवाई के दौरान एनिमल राइट्स संगठन की वकील महालक्ष्मी पावनी ने बताया कि कुत्तों को खाना देने वाली अनेक महिलाओं के साथ मारपीट और छेड़छाड़ की घटनाएँ हुई हैं। सोशल मीडिया पर उन्हें “कुत्तों के साथ सोने वाली” जैसी अशोभनीय और अपमानजनक टिप्पणियाँ भी की गईं। कोर्ट ने इन आरोपों को गंभीरता से लिया और कहा कि यदि किसी महिला की गरिमा को ठेस पहुँचती है, तो वह पुलिस में शिकायत दर्ज करा सकती है।

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि वह हर व्यक्तिगत शिकायत पर सुनवाई नहीं कर सकता। कोर्ट का मुख्य मुद्दा आवारा कुत्तों के प्रबंधन, उनकी सुरक्षा और जनता की सुरक्षा से संबंधित है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह सुनवाई कुत्तों के साथ क्रूरता या हमलों के वीडियो के मुकाबले में नहीं बदली जा सकती।

डॉग राइट्स एक्टिविस्टों की ओर से वरिष्ठ वकील राज शेखर राव ने कोर्ट से अनुरोध किया कि वे कुछ वीडियो देखें, जिनमें कुत्तों के साथ दुर्व्यवहार दिख रहा है। लेकिन, कोर्ट ने इन वीडियो को देखने से मना कर दिया। कोर्ट ने कहा कि इंटरनेट पर ऐसे अनगिनत वीडियो मौजूद हैं, जिनमें कुत्ते बच्चों और बुजुर्गों पर हमला करते दिखते हैं। कोर्ट नहीं चाहता कि मामला वीडियो के मुकाबले में बदल जाए।

वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि कोर्ट को इस मामले में विशेषज्ञों की राय लेनी चाहिए। उन्होंने अरावली केस का उल्लेख करते हुए कहा कि उस मामले में समिति में अधिकांश नौकरशाह थे, इसलिए पुनर्विचार करना पड़ा। उन्होंने चेतावनी दी कि इस केस में भी ऐसी स्थिति नहीं बननी चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई मंगलवार को तय की है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने आवारा कुत्तों के प्रबंधन पर केंद्र और राज्य सरकारों से ठोस सुझाव मांगे हैं।

Point of View

बल्कि यह उन महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा से भी संबंधित है जो इन जीवों की देखभाल करती हैं। सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय हमें यह याद दिलाता है कि पशु अधिकारों के साथ-साथ मानव अधिकारों की भी रक्षा करनी आवश्यक है।
NationPress
10/01/2026

Frequently Asked Questions

क्या महिला एफआईआर दर्ज करा सकती है?
हाँ, यदि किसी महिला को कुत्तों को खाना खिलाने के कारण बुरा व्यवहार का सामना करना पड़ता है, तो वह एफआईआर दर्ज करा सकती है।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अपमानजनक टिप्पणियाँ अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के दायरे में नहीं आतीं।
क्या कोर्ट हर शिकायत को सुनेगा?
नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह हर व्यक्तिगत शिकायत पर सुनवाई नहीं कर सकता।
क्या वीडियो देखना जरूरी है?
कोर्ट ने वीडियो देखने से इनकार किया क्योंकि मामला वीडियो के मुकाबले में नहीं बदला जा सकता।
आवारा कुत्तों का प्रबंधन किसका उत्तरदायित्व है?
आवारा कुत्तों का प्रबंधन केंद्र और राज्य सरकारों का उत्तरदायित्व है।
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