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महिलाओं का सशक्तीकरण: तहसीन पूनावाला की महत्वपूर्ण टिप्पणी

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महिलाओं का सशक्तीकरण: तहसीन पूनावाला की महत्वपूर्ण टिप्पणी

सारांश

तहसीन पूनावाला ने महिला आरक्षण विधेयक पर टिप्पणी करते हुए कहा कि ज़मीनी स्तर से आने वाली महिलाओं को आरक्षण मिलना चाहिए। यह विधेयक महिलाओं की समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करने के लिए महत्वपूर्ण है।

मुख्य बातें

महिला आरक्षण विधेयक में ज़मीनी महिलाओं को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
राजनीतिक परिवारों से आने वाली महिलाओं को आरक्षण नहीं मिलेगा।
संसद के भविष्य के लिए सशक्तीकरण की योजना बनानी होगी।

मुंबई, 15 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। राजनीतिक विश्लेषक तहसीन पूनावाला ने महिला आरक्षण संशोधन विधेयक पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की। बुधवार को राष्ट्र प्रेस से बातचीत में उन्होंने कहा कि देशवासियों को यह जानना आवश्यक है कि इसमें कौन-कौन से संशोधन प्रस्तावित किए जा रहे हैं। विपक्षी दलों को भी इसके बदलावों के बारे में जानकारी होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि यदि आप यह दावा कर रहे हैं कि इस विधेयक द्वारा महिलाओं की समृद्धि का मार्ग प्रशस्त किया जाएगा, तो आपको इस पर खुलकर चर्चा करनी चाहिए। लोगों को इसकी विस्तृत जानकारी मिलनी चाहिए। लेकिन, आप इस बारे में ठीक से जानकारी नहीं दे रहे हैं। इस विधेयक में यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि उन महिलाओं को आरक्षण मिले, जो जमीन से उठकर आती हैं। हमें ध्यान रखना होगा कि इस बिल में उन महिलाओं को आरक्षण नहीं मिलना चाहिए, जो किसी राजनीतिक परिवार से हैं। ऐसे पृष्ठभूमि से आने वाली महिलाएं पहले से ही समृद्ध होती हैं। इसलिए, यह आवश्यक है कि हम जमीन से उठकर आने वाली महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए एक ठोस योजना बनाएं।

उन्होंने आगे कहा कि यदि हम इन मुद्दों पर ध्यान नहीं देंगे, तो आने वाले दिनों में संसद एक परिवार क्लब में तब्दील हो जाएगी, जहां पिता अपनी बेटी को सांसद बना रहा है और पति अपनी पत्नी को। पंचायत और नगरीय स्तर पर आपको यह देखना होगा कि कैसे पति-पत्नी एक-दूसरे को बड़े पदों पर स्थापित कर रहे हैं। हमें उन महिलाओं को आरक्षण दिलाने की दिशा में कदम बढ़ाना होगा, जो अपने दम पर आगे बढ़ने की इच्छा रखती हैं।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी महिला को इसलिए सांसद नहीं बनाया जाना चाहिए क्योंकि उसके परिवार का कोई सदस्य राजनीति में है। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि महिला सशक्तीकरण की अवधारणा को सही तरीके से लागू किया जाए। यदि हम ऐसा कर पाते हैं, तभी महिला आरक्षण संबंधी विधेयक लाने का प्रयास सफल होगा।

पूनावाला ने यह कहते हुए इस तर्क पर भी प्रतिक्रिया दी कि इस कदम से संसद की सीटों में बढ़ोतरी होगी। उन्होंने कहा कि यदि आप ऐसा दावा कर रहे हैं, तो यह जानना महत्वपूर्ण है कि क्या आप कोटे के भीतर कोटा देने के प्रावधानों को लागू करेंगे। यदि हां, तो आपको अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। आपको एससी-एसटी आरक्षण के संबंध में भी जानकारी देनी होगी।

उन्होंने यह भी कहा कि हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि महिलाओं को 33 प्रतिशत नहीं, बल्कि 50 प्रतिशत आरक्षण दिया जाए। हम इस कदम का स्वागत करते हैं, लेकिन यह भी सुनिश्चित होना चाहिए कि जमीन से उठकर आने वाली महिलाओं को ही आरक्षण मिले।

संपादकीय दृष्टिकोण

और यह आवश्यक बताया है कि विधेयक में विभिन्न आवश्यकताओं को शामिल किया जाए।
RashtraPress
20 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महिला आरक्षण विधेयक में क्या बदलाव किए जा रहे हैं?
विधेयक में ज़मीनी स्तर से आने वाली महिलाओं को आरक्षण दिए जाने का प्रावधान किया गया है।
क्या राजनीतिक परिवारों से आने वाली महिलाओं को आरक्षण मिलेगा?
नहीं, इस विधेयक में राजनीतिक परिवारों से आने वाली महिलाओं को आरक्षण नहीं देने का प्रावधान है।
राष्ट्र प्रेस
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