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क्या 'चिंता मत करो पिताजी...' मेजर विवेक गुप्ता की अमर गाथा आपको प्रेरित करेगी?

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क्या 'चिंता मत करो पिताजी...' मेजर विवेक गुप्ता की अमर गाथा आपको प्रेरित करेगी?

सारांश

मेजर विवेक गुप्ता की कहानी हमें सिखाती है कि साहस और बलिदान के क्या मायने होते हैं। 1999 के कारगिल युद्ध में उनका अद्वितीय साहस, प्रेरणा और संघर्ष की गाथा हमें गर्वित करती है। इस लेख में उनके जीवन की प्रेरणादायक घटनाएं और उनके अदम्य साहस को उजागर किया गया है।

मुख्य बातें

मेजर विवेक गुप्ता का साहस और बलिदान हमें प्रेरित करता है।
उनकी कहानी हमें यह सिखाती है कि देश की रक्षा सबसे महत्वपूर्ण है।
सैनिकों का बलिदान हमेशा याद रखा जाना चाहिए।
कारगिल युद्ध ने हमें साहस का एक नया उदाहरण दिया।
मरणोपरांत सम्मान से यह साबित होता है कि उनकी बहादुरी अमर है।

नई दिल्ली, 1 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। सेना की जिंदगी और सेना में होने के सम्मान की कहानियां देहरादून के गुप्ता परिवार में एक छोटे लड़के को नई लड़ाई के लिए तैयार कर रही थीं। समय के साथ शौर्य और पराक्रम की गाथाओं ने एक असली योद्धा को जन्म दिया, जिसने 1999 के कारगिल युद्ध में नया इतिहास लिखा।

यह कहानी है मेजर विवेक गुप्ता की। उनका जन्म 2 जनवरी 1970 को एक सेवारत सेना अधिकारी, कर्नल बीआरएस गुप्ता, के घर हुआ। बचपन से ही मेजर गुप्ता सेना अधिकारी बनने का सपना देखते थे। जब उन्होंने भारतीय सेना में शामिल होने की इच्छा व्यक्त की, तो उनका परिवार अपने बहादुर बेटे पर गर्व महसूस कर रहा था।

उनके पिता बताते हैं कि उन्होंने उनसे पूछा कि वह किस रेजिमेंट में शामिल होना चाहेंगे, जिस पर मेजर विवेक गुप्ता ने दृढ़ता से कहा कि अगर उन्हें इन्फैंट्री में कमीशन मिलता है तो यह उनके लिए सम्मान की बात होगी। यही वह पल था जब उनका सपना 13 जून 1992 को सच हुआ, जब उन्हें राजपूताना राइफल्स में कमीशन मिला। एक सख्त सैनिक होने के साथ-साथ, उन्हें बॉडीबिल्डिंग और गाने का भी शौक था, इसलिए उनकी बटालियन उन्हें एक महान गायक और उत्साही बॉडीबिल्डर के रूप में याद करती है।

मेजर विवेक गुप्ता की पहचान यह थी कि जब तक उन्हें सौंपा गया कार्य पूरा नहीं हो जाता, तब तक वह आराम नहीं करते थे। कारगिल युद्ध के दौरान वह 2 राजपूताना राइफल्स का हिस्सा थे, जिन्हें 13 जून 1999 को सुबह 6 बजे तक तोलोलिंग टॉप पर कब्जा करने का कार्य सौंपा गया था।

जैसे ही बटालियन ने हमला शुरू किया, मेजर विवेक गुप्ता लीडिंग चार्ली कंपनी की कमान संभाल रहे थे। भारी तोपखाने और ऑटोमैटिक फायरिंग के बावजूद, मेजर विवेक गुप्ता के प्रेरणादायक नेतृत्व में कंपनी दुश्मन के करीब पहुंचने में सफल रही। जैसे ही कंपनी खुली जगह में आई, उस पर चारों ओर से भारी गोलीबारी होने लगी। कंपनी के लीडिंग सेक्शन के तीन सैनिक घायल हुए, जिससे हमला कुछ समय के लिए रुक गया।

यह जानकर कि खुले में दुश्मन की भारी गोलीबारी के बीच रहना और भी नुकसान करेगा, मेजर विवेक गुप्ता ने तुरंत प्रतिक्रिया दी और दुश्मन की स्थिति पर रॉकेट लॉन्चर से फायर किया। इससे पहले कि दुश्मन फिर से नियंत्रण हासिल कर पाता, उन्होंने दुश्मन की स्थिति पर हमला कर दिया। हमले के दौरान उन्हें दो गोलियां लगीं, फिर भी उन्होंने हमला जारी रखा। घायल होने के बावजूद उन्होंने दुश्मन से भीषण हाथापाई की। उस इलाके में पहुंचकर उन्होंने तीन दुश्मन सैनिकों को मार गिराया।

अपने ऑफिसर के साहसिक कार्य से प्रेरित होकर कंपनी के बाकी सैनिक दुश्मन की पोजीशन पर टूट पड़े और उस पर कब्जा कर लिया। मेजर विवेक गुप्ता को एक बार फिर दुश्मन की गोली लगी और वे गंभीर रूप से घायल हो गए। बाद में युद्ध के मैदान में ही चोटों के कारण शहादत मिली।

मेजर विवेक गुप्ता ने अपने पिता को आखिरी खत लिखा था, जिसमें उन्होंने कहा था, 'चिंता मत करो पिताजी, मैं जल्द ही वापस आऊंगा'। यह पत्र 17 जून 1999 को कर्नल बीआरएस गुप्ता के घर पहुंचा, जो मेजर गुप्ता के अंतिम संस्कार के दो दिन बाद था। बेटे के जाने का गम था, लेकिन कर्नल बीआरएस गुप्ता ने गर्वित पिता के रूप में अपने बेटे का शोक मनाया, जिन्हें विश्वास था कि उनके बेटे को वह जगह मिली जहां वह हमेशा रहना चाहता था, ठीक वहां जहां एक्शन हो रहा था।

दुश्मन का सामना करते हुए मेजर विवेक गुप्ता ने जबरदस्त हिम्मत और प्रेरणादायक लीडरशिप का प्रदर्शन किया, जिससे तोलोलिंग टॉप पर कब्जा करने में मदद मिली। उनके सर्वोच्च बलिदान के लिए उन्हें मरणोपरांत महावीर चक्र से सम्मानित किया गया।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह स्पष्ट है कि मेजर विवेक गुप्ता की कहानी हमारे देश के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उनका बलिदान और साहस हमें यह सिखाता है कि देश की रक्षा के लिए हर नागरिक को प्रेरित होना चाहिए। हमें अपने सैनिकों और उनके अदम्य साहस को हमेशा याद रखना चाहिए।
RashtraPress
12 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मेजर विवेक गुप्ता का जन्म कब हुआ?
मेजर विवेक गुप्ता का जन्म 2 जनवरी 1970 को हुआ।
उन्होंने किस रेजिमेंट में कमीशन प्राप्त किया?
उन्होंने 13 जून 1992 को राजपूताना राइफल्स में कमीशन प्राप्त किया।
मेजर विवेक गुप्ता को किस सम्मान से नवाजा गया?
उन्हें मरणोपरांत महावीर चक्र से सम्मानित किया गया।
कारगिल युद्ध में उनकी भूमिका क्या थी?
कारगिल युद्ध में वे 2 राजपूताना राइफल्स का हिस्सा थे और उन्होंने तोलोलिंग टॉप पर कब्जा करने का कार्य संभाला।
उनका आखिरी खत किसे लिखा गया था?
उन्होंने अपने पिता कर्नल बीआरएस गुप्ता को अपना आखिरी खत लिखा था।
राष्ट्र प्रेस
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