मालदा की घटना ने टीएमसी के 'महा-जंगलराज' की वास्तविकता को उजागर किया: शहजाद पूनावाला
सारांश
Key Takeaways
- मालदा की घटना ने कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए।
- महिलाओं की सुरक्षा एक गंभीर मुद्दा है।
- राजनीतिक बयानबाजी में राज्यों का अपमान उचित नहीं है।
नई दिल्ली, 5 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने पश्चिम बंगाल के मालदा में हुई घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) शासित सरकार पर रविवार को 'महा-जंगलराज' का आरोप लगाया है।
पूनावाला ने राष्ट्र प्रेस से चर्चा करते हुए कहा, "मालदा की घटना टीएमसी के ‘महा जंगलराज’ की अराजकता का एक स्पष्ट उदाहरण है। वहाँ न तो महिलाएँ सुरक्षित हैं, न ज़मीन और न ही आम लोग। केवल प्रभावशाली और भ्रष्ट अपराधी ही खुद को सुरक्षित समझते हैं। इस घटना में न्यायिक अधिकारियों को बंधक बना लिया गया था। एक महिला न्यायिक अधिकारी ने अपने बच्चों की सुरक्षा के लिए मदद मांगी, क्योंकि उन्हें डर था कि उनकी हत्या या बलात्कार हो सकता है।"
शहजाद पूनावाला ने यह भी कहा कि इस घटना से स्पष्ट होता है कि पश्चिम बंगाल में कानून-व्यवस्था पूरी तरह से टूट चुकी है। महिलाओं और न्यायिक व्यवस्था दोनों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे पर भी निशाना साधा। खड़गे द्वारा केरल की एक चुनावी रैली में गुजरातमोदी जी का भी विरोध कर सकते हैं। लेकिन भाजपा और पीएम मोदी का विरोध करने की इस प्रक्रिया में गुजरात और उत्तरी भारत का अपमान करना पूरी तरह से अस्वीकार्य है।"
पूनावाला ने कहा कि कांग्रेस के अन्य नेताओं ने भी यह तक कह दिया कि भारत को उत्तर और दक्षिण में बांट देना चाहिए। उन्होंने इसे देश की एकता के खिलाफ खतरनाक सोच बताया।
इसके अलावा, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के खिलाफ दिए गए बयान पर भी शहजाद पूनावाला ने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा, "राहुल गांधी खुद भ्रष्टाचार के एक मामले में जमानत पर बाहर हैं। जिस तरह की भाषा उन्होंने हिमंत बिस्वा सरमा के खिलाफ इस्तेमाल की है, वह असम का अपमान करने के समान है।"
भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि राहुल गांधी का यह व्यवहार असम की जनता और पूरे पूर्वोत्तर भारत के प्रति अनादर दर्शाता है। उन्होंने विपक्ष से अपील की कि राजनीतिक मतभेदों में भी राज्यों और उनकी संस्कृति का अपमान न किया जाए।