ममता बनर्जी की मेडिकल रिपोर्ट लीक: तीन वरिष्ठ डॉक्टरों को कानूनी नोटिस, गोपनीयता उल्लंघन का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की निजी मेडिकल रिपोर्ट कथित तौर पर सार्वजनिक किए जाने के मामले में उनके वकील अर्का कुमार नाग ने सोमवार, 6 अक्टूबर 2026 को तीन वरिष्ठ डॉक्टरों को कानूनी नोटिस भेजा है। यह नोटिस दक्षिण कोलकाता स्थित सरकारी एसएसकेएम मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल तथा बांगुर इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरोसाइंसेज से जुड़े अधिकारियों को भेजा गया है। नोटिस में आरोप लगाया गया है कि मरीज और चिकित्सक के बीच गोपनीयता के मूलभूत सिद्धांत का उल्लंघन हुआ है।
किन डॉक्टरों को भेजा गया नोटिस
ईमेल के ज़रिए भेजे गए इस दो-पृष्ठीय नोटिस में तीन अधिकारियों को पक्षकार बनाया गया है — एसएसकेएम के निदेशक डॉ. मणिमय बंद्योपाध्याय, बांगुर इंस्टीट्यूट के मेडिकल सुपरिटेंडेंट एवं वाइस-प्रिंसिपल डॉ. पीयूष कुमार रॉय, और बांगुर इंस्टीट्यूट के न्यूरोलॉजी विभाग प्रमुख डॉ. अतानु बिस्वास। नोटिस में इन तीनों से पूछा गया है कि क्या मुख्यमंत्री के कोई मेडिकल दस्तावेज किसी अन्य व्यक्ति को सौंपे गए और यदि हाँ, तो क्या इसके लिए संबंधित कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया गया।
वकील नाग ने नोटिस में यह भी स्पष्ट किया कि सार्वजनिक की गई रिपोर्ट के आधार पर मीडिया में 'अधूरी और पक्षपाती जानकारी' फैलाई गई, जो उनकी मुवक्किल की छवि को नुकसान पहुँचा सकती है।
विवाद की जड़: 2021 की रेडियोडायग्नोसिस रिपोर्ट
यह पूरा विवाद शनिवार को तब भड़का जब पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने मीडिया के सामने बांगुर इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरोसाइंसेज की 11 मार्च 2021 की एक रेडियोडायग्नोसिस रिपोर्ट का हवाला दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि उक्त रिपोर्ट में ममता बनर्जी के पैर में किसी फ्रैक्चर का कोई निशान नहीं था, जबकि 2021 के विधानसभा चुनावों के दौरान नंदीग्राम में प्रचार के समय पैर में फ्रैक्चर का दावा किया गया था।
अधिकारी ने यह भी कहा कि इस मामले की अलग से जाँच शुरू की जाएगी, जो नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों के उपचुनाव के नतीजे 9 अक्टूबर को घोषित होने के बाद प्रारंभ होगी। गौरतलब है कि 2021 के चुनाव में ममता बनर्जी ने नंदीग्राम से तृणमूल कांग्रेस (TMC) की उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था और अधिकारी से 2,000 से कुछ कम मतों के अंतर से हार गई थीं।
तृणमूल कांग्रेस का पलटवार
उत्तरी कोलकाता की बेलेघाटा विधानसभा सीट से तृणमूल कांग्रेस (TMC) के विधायक कुणाल घोष ने इस रिपोर्ट की प्रामाणिकता पर सवाल उठाए। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दावा किया कि रेडियोडायग्नोसिस रिपोर्ट के साथ छेड़छाड़ की गई हो सकती है। घोष ने कहा कि किसी की निजी मेडिकल जानकारी को सार्वजनिक करना डॉक्टरों या संस्थानों का स्वीकृत चलन नहीं है।
घोष के इस पोस्ट के ठीक दो दिन बाद ही ममता बनर्जी के वकील ने सोमवार को तीनों डॉक्टरों को विधिवत कानूनी नोटिस भेजा। नोटिस में यह भी अपेक्षा जताई गई है कि भविष्य में मुख्यमंत्री की 'मेडिकल गोपनीयता' का उल्लंघन न हो और 'भ्रामक जानकारी' न फैलाई जाए।
राजनीतिक पृष्ठभूमि और व्यापक संदर्भ
यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर उपचुनाव के नतीजे आने वाले हैं। 2021 में ममता बनर्जी नंदीग्राम में हारने के बाद दक्षिण कोलकाता की भवानीपुर विधानसभा सीट से उपचुनाव जीतकर लगातार तीसरी बार पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री बनी थीं। उस दौरान उन्होंने व्हीलचेयर पर बैठकर, पैर पर प्लास्टर लगवाकर चुनाव प्रचार किया था, जो व्यापक रूप से चर्चित रहा था।
आलोचकों का कहना है कि सरकारी अस्पतालों के मेडिकल रिकॉर्ड की इस प्रकार सार्वजनिक प्रस्तुति चिकित्सकीय नैतिकता और रोगी के मौलिक अधिकारों के लिहाज़ से गंभीर सवाल खड़े करती है। वहीं, भारतीय जनता पार्टी (BJP) का पक्ष यह है कि रिपोर्ट जनहित में उजागर की गई।
आगे क्या होगा
तीनों डॉक्टरों की ओर से अभी तक कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। वकील नाग ने स्पष्ट किया है कि यदि कानूनी प्रक्रियाओं का उल्लंघन साबित हुआ तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध उचित विधिक कार्रवाई की जाएगी। इस मामले की दिशा काफी हद तक 9 अक्टूबर के उपचुनाव परिणामों के बाद घोषित होने वाली जाँच पर निर्भर करेगी।