ममता बनर्जी समेत TMC के 5 नेताओं को मानहानि नोटिस, डॉ. काकोली घोष के बेटे ने भेजा
सारांश
मुख्य बातें
कोलकाता में 13 जून 2026 को तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद डॉ. काकोली घोष दस्तिदार के पुत्र और मनोचिकित्सक डॉ. बैद्यनाथ घोष दस्तिदार ने पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, सांसद सौगत रॉय, कल्याण बनर्जी, महुआ मोइत्रा और पूर्व विधायक सोनाली गुहा को कानूनी नोटिस भेजा है। डॉ. बैद्यनाथ का आरोप है कि इन पाँचों नेताओं ने उनके विरुद्ध कथित तौर पर झूठे और मानहानिकारक बयान दिए हैं, जिससे उनकी व्यक्तिगत और पेशेवर प्रतिष्ठा को गंभीर नुकसान पहुँचा है।
मुख्य आरोप और विवाद की पृष्ठभूमि
डॉ. बैद्यनाथ घोष दस्तिदार की ओर से जारी प्रेस बयान के अनुसार, उन पर यह आरोप लगाया गया था कि उन्होंने बरासात विधानसभा सीट से TMC का चुनावी टिकट माँगा था। उन्होंने इस दावे को पूरी तरह असत्य और भ्रामक बताते हुए खारिज किया है। उनका कहना है कि उन्होंने कभी भी किसी राजनीतिक पद या टिकट की इच्छा नहीं जताई।
इसके अतिरिक्त, पूर्व विधायक सोनाली गुहा पर आरोप है कि उन्होंने कथित तौर पर यह बयान दिया कि डॉ. बैद्यनाथ, उनके भाई और उनकी माँ डॉ. काकोली घोष दस्तिदार नियमित रूप से शराब का सेवन करते हैं। डॉ. बैद्यनाथ ने इस आरोप को पूरी तरह निराधार और असत्य करार दिया है।
कानूनी नोटिस की विषय-वस्तु
डॉ. बैद्यनाथ की अधिवक्ता पूजा शुक्ला द्वारा तैयार किए गए इस कानूनी नोटिस पर उन्होंने हस्ताक्षर कर दिए हैं। नोटिस में संबंधित नेताओं से तीन प्रमुख माँगें रखी गई हैं — कथित मानहानिकारक बयानों को वापस लेना, सार्वजनिक रूप से खंडन करना और माफी माँगना।
नोटिस में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि 15 दिनों के भीतर संतोषजनक उत्तर नहीं मिला, तो डॉ. बैद्यनाथ मानहानि सहित सभी उपलब्ध कानूनी उपाय अपनाने के लिए स्वतंत्र होंगे।
टीएमसी के भीतर आंतरिक तनाव का संकेत
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब TMC के भीतर आंतरिक मतभेदों की खबरें समय-समय पर सुर्खियाँ बनती रही हैं। गौरतलब है कि डॉ. काकोली घोष दस्तिदार स्वयं TMC की वरिष्ठ सांसद हैं, और उनके ही पुत्र द्वारा पार्टी के शीर्ष नेताओं को कानूनी नोटिस भेजा जाना पार्टी के भीतर तनाव को उजागर करता है।
आगे क्या होगा
नोटिस सोमवार को औपचारिक रूप से भेजा जाना था। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि ममता बनर्जी और अन्य नेता इस नोटिस का जवाब देते हैं या नहीं। यदि 15 दिनों के भीतर कोई संतोषजनक प्रतिक्रिया नहीं आती, तो मामला अदालत तक पहुँच सकता है, जो TMC के लिए राजनीतिक रूप से असहज स्थिति पैदा कर सकता है।