कालीघाट बिल्डिंग उल्लंघन मामला: केएमसी ने अभिषेक बनर्जी के पिता अमित बनर्जी को तलब किया
सारांश
मुख्य बातें
कोलकाता नगर निगम (केएमसी) ने शुक्रवार, 24 जुलाई को तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव और लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी के पिता अमित बनर्जी को नोटिस जारी किया है। दक्षिण कोलकाता के कालीघाट इलाके में स्थित दो रिहायशी संपत्तियों पर कथित तौर पर बिल्डिंग नियमों के उल्लंघन के संबंध में उनसे स्पष्टीकरण माँगा गया है।
नोटिस में क्या कहा गया
केएमसी के इस नोटिस में अमित बनर्जी को बोरो 11 ऑफिस के बिल्डिंग डिपार्टमेंट के समक्ष दोनों संपत्तियों से जुड़े आवश्यक दस्तावेज़ों के साथ उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है। अधिकारियों के अनुसार, जाँच इस बात पर केंद्रित है कि क्या निर्माण कार्य स्वीकृत बिल्डिंग प्लान और विनिर्देशों से अधिक या भिन्न था। उल्लेखनीय है कि अमित बनर्जी पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भाई हैं।
हाई कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया
नोटिस जारी होने के बाद अमित बनर्जी और उनकी पत्नी लता बनर्जी ने कलकत्ता उच्च न्यायालय में याचिका दायर की। याचिका में उन्होंने दावा किया कि दोनों संपत्तियों का निर्माण केएमसी के बिल्डिंग नियमों के पूर्ण अनुपालन में किया गया था और किसी भी नियम का उल्लंघन नहीं हुआ। उन्होंने नोटिस को रद्द करने की माँग की है। अभी तक उनकी ओर से केएमसी को कोई औपचारिक जवाब नहीं दिया गया है और यह अस्पष्ट है कि वे निर्धारित तिथि पर सिविक बॉडी के सामने पेश होंगे या नहीं।
जाँच का दायरा
केएमसी कालीघाट में बनर्जी परिवार से जुड़ी विभिन्न संपत्तियों के निर्माण में कथित अनियमितताओं की जाँच पहले से कर रहा है। यह घटनाक्रम केएमसी अधिकारियों द्वारा कालीघाट स्थित अभिषेक बनर्जी के आवास के हालिया निरीक्षण के बाद सामने आया है, जिसके बाद परिवार के अन्य सदस्यों को भी नोटिस भेजे गए थे।
सूत्रों के अनुसार, 'लीप्स एंड बाउंड्स प्राइवेट लिमिटेड' से जुड़ी संपत्तियाँ भी केएमसी की जाँच के दायरे में हैं। अमित बनर्जी इस कंपनी के निदेशकों में से एक हैं।
कानूनी आधार
ये नोटिस कोलकाता म्युनिसिपल कॉरपोरेशन अधिनियम, 1980 की धारा 401 के तहत जारी किए गए हैं। यह धारा केएमसी को सत्यापन के उद्देश्य से स्वीकृत बिल्डिंग प्लान, निर्माण दस्तावेज़ और संबंधित अनुमतियाँ माँगने का अधिकार देती है।
आगे क्या
कलकत्ता उच्च न्यायालय में दायर याचिका पर सुनवाई का इंतज़ार है, जो इस मामले की अगली दिशा तय करेगी। यह देखना अहम होगा कि अदालत नोटिस की वैधता पर क्या रुख अपनाती है और केएमसी की जाँच किस निष्कर्ष तक पहुँचती है।