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मंगलुरु कुकर ब्लास्ट: एनआईए ने मोहम्मद शारिक की 10 साल की सजा को चुनौती दी, उम्रकैद की मांग

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मंगलुरु कुकर ब्लास्ट: एनआईए ने मोहम्मद शारिक की 10 साल की सजा को चुनौती दी, उम्रकैद की मांग

सारांश

मंगलुरु कुकर धमाका मामले में एनआईए संतुष्ट नहीं है — दोषी शारिक को मिली 10 साल की सजा को एजेंसी अपर्याप्त मान रही है और उम्रकैद की मांग के साथ अदालत जाने की तैयारी में है। मामले में स्थानीय पुलिस की कथित लापरवाही भी सवालों के घेरे में है।

मुख्य बातें

एनआईए ने मोहम्मद शारिक को मिली 10 साल की कठोर कारावास की सजा को चुनौती देते हुए आजीवन कारावास की मांग के लिए अपील दायर करने की तैयारी की है।
विशेष एनआईए अदालत ने 27 अप्रैल को शारिक को सजा सुनाई थी; उसने अपना अपराध स्वीकार किया था।
एनआईए के अनुसार, शारिक आतंकवादी संगठनों के संपर्क में था और रिहाई के बाद 33 वर्ष की आयु में समाज के लिए खतरा बन सकता है।
2020 में स्थानीय पुलिस की कथित लापरवाही और जल्दबाजी में दाखिल चार्जशीट के कारण शारिक को जमानत मिली थी, जिसके बाद उसने मंगलुरु धमाके की योजना बनाई।
दूसरे आरोपी सैयद यासीन ने खुद को निर्दोष बताया है और उनके खिलाफ मुकदमा जारी है।

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने मंगलुरु कुकर धमाका मामले में दोषी ठहराए गए मोहम्मद शारिक को मिली 10 साल की कठोर कारावास की सजा को अपर्याप्त बताते हुए उच्च न्यायालय में अपील दायर करने की तैयारी शुरू कर दी है। एजेंसी का तर्क है कि मामले की गंभीरता और शारिक की आतंकी संगठनों से संलिप्तता को देखते हुए उसे आजीवन कारावास की सजा दी जानी चाहिए। 27 अप्रैल को एक विशेष एनआईए अदालत ने शारिक को यह सजा सुनाई थी, जिसके दौरान उसने अपना अपराध स्वीकार किया था।

मुख्य घटनाक्रम

एनआईए अधिकारियों के अनुसार, शारिक अब तक जेल में लगभग चार साल बिता चुका है और उसकी शेष सजा करीब छह साल है। अधिकारियों ने बताया कि रिहाई के समय शारिक की उम्र लगभग 33 वर्ष होगी। एजेंसी का मानना है कि इस उम्र में यदि वह मुख्यधारा के समाज में लौटता है, तो राष्ट्रविरोधी ताकतें उसका दुरुपयोग कर सकती हैं।

जांच में यह भी सामने आया है कि शारिक ने शिवमोग्गा में तुंगा नदी के जलग्रहण क्षेत्र में बम धमाकों का 'ट्रायल' किया था और उसके बाद मंगलुरु धमाके की योजना बनाई। एनआईए के अनुसार, अपील में यह तर्क प्रमुखता से रखा जाएगा कि शारिक आतंकवादी संगठनों के सक्रिय संपर्क में था और समाज के लिए एक संभावित खतरा बना हुआ है।

पुलिस की कथित लापरवाही

इस मामले में एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी उजागर हुआ है कि 2020 में दो स्थानों पर देश-विरोधी भित्तिचित्र बनाने के आरोप में शारिक और एक अन्य संदिग्ध माज़ मुनीर को गिरफ्तार करने के बाद स्थानीय पुलिस ने कथित तौर पर लापरवाही बरती। आरोप है कि पुलिस ने गवाहों का सही तरीके से उपयोग नहीं किया और जल्दबाजी में चार्जशीट दाखिल कर दी।

इस लापरवाही का नतीजा यह हुआ कि शारिक ने अदालत से जमानत हासिल कर ली और कथित तौर पर देश-विरोधी गतिविधियों में शामिल हो गया। सूत्रों के अनुसार, यदि पुलिस ने उस समय गहन जांच की होती या यह मामला एनआईए अथवा केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दिया गया होता, तो इस आतंकी मॉड्यूल का पहले ही भंडाफोड़ हो सकता था और मंगलुरु कुकर धमाके को रोका जा सकता था।

अदालत में शारिक की दलीलें

सुनवाई के दौरान शारिक ने सजा कम करने की अपील करते हुए कहा कि उसकी एक बेटी है और वह अपने परिवार का एकमात्र कमाने वाला सदस्य है। अदालत ने उसकी जेल में बिताई गई अवधि को कुल सजा में से घटाने का आदेश दिया है। वहीं, इस मामले के दूसरे आरोपी सैयद यासीन ने खुद को निर्दोष बताया है और उनके खिलाफ मुकदमा अभी जारी रहेगा।

आगे क्या होगा

एनआईए अधिकारियों ने पुष्टि की है कि अपील के लिए तर्क तैयार किए जा रहे हैं और जल्द ही संबंधित अदालत में अपील दायर की जाएगी। यह मामला इस दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है कि यह न केवल एक दोषी की सजा का प्रश्न है, बल्कि जांच एजेंसियों के बीच समन्वय और स्थानीय पुलिस की जवाबदेही का भी सवाल उठाता है। आने वाले दिनों में अदालत का फैसला इस मामले की दिशा तय करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

खुफिया तंत्र और केंद्रीय एजेंसियों के बीच तालमेल नहीं होता। 2020 में शारिक और माज़ मुनीर की गिरफ्तारी के बाद यदि जांच गंभीरता से होती, तो धमाका रोका जा सकता था — यह स्वीकारोक्ति खुद सूत्रों की है। एनआईए का उम्रकैद की मांग करना न्यायोचित हो सकता है, लेकिन असली जवाबदेही उन अधिकारियों की भी तय होनी चाहिए जिनकी लापरवाही ने इस आतंकी मॉड्यूल को पनपने का मौका दिया।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मंगलुरु कुकर धमाका मामला क्या है?
मंगलुरु कुकर धमाका एक आतंकी घटना है जिसमें दोषी मोहम्मद शारिक ने प्रेशर कुकर बम का उपयोग किया था। शारिक को विशेष एनआईए अदालत ने 27 अप्रैल को 10 साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई, जिसे एनआईए अब चुनौती दे रही है।
एनआईए शारिक की सजा को क्यों चुनौती दे रही है?
एनआईए का तर्क है कि शारिक आतंकवादी संगठनों के संपर्क में था और रिहाई के बाद समाज के लिए खतरा बन सकता है। एजेंसी के अनुसार, 10 साल की सजा इस मामले की गंभीरता के अनुरूप नहीं है और उम्रकैद दी जानी चाहिए।
स्थानीय पुलिस की लापरवाही का इस मामले से क्या संबंध है?
2020 में देश-विरोधी भित्तिचित्र मामले में शारिक की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने कथित तौर पर सही तरीके से गवाह तैयार नहीं किए और जल्दबाजी में चार्जशीट दाखिल की। इससे शारिक को जमानत मिल गई और उसने बाद में मंगलुरु धमाके की योजना बनाई।
दूसरे आरोपी सैयद यासीन का मामला क्या है?
सैयद यासीन ने अदालत में खुद को निर्दोष बताया है और उनके खिलाफ मुकदमा अभी जारी है। शारिक के विपरीत, यासीन ने अपना अपराध स्वीकार नहीं किया।
एनआईए की अपील कब दायर होगी?
एनआईए अधिकारियों के अनुसार अपील के लिए तर्क तैयार किए जा रहे हैं और जल्द ही संबंधित अदालत में अपील दायर की जाएगी। अभी तक कोई निश्चित तारीख घोषित नहीं की गई है।
राष्ट्र प्रेस
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