तेजस्वी के जातिगत एनकाउंटर आरोपों पर मांझी का पलटवार: 'अपराधी को अपराधी की तरह देखें'
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने 29 सितंबर 2026 को पटना में बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के उस आरोप को सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि राज्य में एनकाउंटर जातिगत आधार पर हो रहे हैं। मांझी ने स्पष्ट कहा कि अपराध और जाति को एक ही तराजू पर नहीं तौला जाना चाहिए। उन्होंने इस अवसर पर आरक्षण में उप वर्गीकरण की भी पुरजोर वकालत की और इसे सामाजिक न्याय की नई दिशा बताया।
मांझी का सीधा जवाब
तेजस्वी यादव के जातिगत एनकाउंटर के आरोपों पर मांझी ने कहा, 'हम मुसहर समुदाय से हैं। अगर मुसहर समुदाय का कोई व्यक्ति गलत काम करता है और पकड़ा जाता है, तो क्या हमें यह कहना चाहिए कि मुसहरों को खास तौर पर टारगेट किया जा रहा है? एक अपराधी को अपराधी की तरह टारगेट किया जाता है, यह जाति का मामला नहीं है।' उनका यह बयान सीधे तौर पर विपक्ष की उस रणनीति को चुनौती देता है जो कानून-व्यवस्था के मुद्दों को जातीय रंग देने की कोशिश करती है।
मांझी ने आगे कहा कि डेटा के अनुसार बिहार की जेलों में बंद लगभग 70 प्रतिशत कैदी राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के कार्यकर्ता हैं। उन्होंने कहा कि यह तथ्य बताना गलत नहीं है, लेकिन तेजस्वी यादव, राहुल गांधी और अन्य लोग इस मुद्दे को भटकाने की कोशिश करते हैं।
आरक्षण में उप वर्गीकरण की वकालत
मांझी ने सर्वोच्च न्यायालय के 2024 के उस फैसले का हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि आरक्षण के भीतर उप वर्गीकरण होना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश के कई राज्यों ने यह व्यवस्था लागू भी की है। उनका तर्क था कि इसका मतलब आरक्षण की मात्रा या ढाँचे को बदलना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि सबसे वंचित तबकों को उनका उचित हिस्सा मिले।
उन्होंने 'रोटी' के अपने चर्चित उदाहरण से इसे समझाया — 'मान लीजिए हम सब मिलकर 15 रोटियाँ खा रहे हैं, लेकिन आप उनमें से 14 खाते हैं और हमारे हिस्से में सिर्फ एक रोटी आती है। अगर हमारा हिस्सा आबादी के हिसाब से है, तो मुझे आठ दो और तुम सात ले लो।' मांझी ने घोषणा की कि वे इस माँग को पूरे देश में एक अभियान के रूप में ले जाएँगे।
डबल इंजन सरकार और नेतृत्व पर भरोसा
मांझी ने केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बिहार में डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी के नेतृत्व पर पूरा भरोसा जताया। उन्होंने कहा कि डबल इंजन सरकार कानून-व्यवस्था और विकास दोनों मोर्चों पर प्रभावी ढंग से काम कर रही है। उन्होंने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में मोदी की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत का झंडा अंतरराष्ट्रीय मंच पर बुलंद हुआ है।
यह ऐसे समय में आया है जब बिहार में एनकाउंटर के मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक जारी है। गौरतलब है कि सम्राट चौधरी के कार्यकाल में कानून-व्यवस्था को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठाता रहा है।
सीईसी विवाद और कांग्रेस के प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़े विवाद पर मांझी ने कहा कि मीटिंग बुलाना सीईसी का अधिकार है और किसी भी कैबिनेट में मुख्यमंत्री की सहमति के बाद ही फैसले लिए जाते हैं। उन्होंने कहा कि अलग-अलग नज़रिए और बहस लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन अंतिम फैसले एकमत से होते हैं।
वहीं, मंत्री भगवान सिंह कुशवाहा ने सीईसी के इस्तीफे की माँग को लेकर कांग्रेस के देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों पर कहा कि कांग्रेस के पास कोई वास्तविक मुद्दा नहीं बचा है और यह बेबुनियाद बयानबाजी है। केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान के पुराने वायरल बयान पर कुशवाहा ने कहा कि गठबंधन में होने के कारण यह कोई बड़ा मुद्दा नहीं है, हालाँकि उन्हें ऐसा नहीं बोलना चाहिए था।
आगे क्या
मांझी ने स्पष्ट संकेत दिया है कि आरक्षण में उप वर्गीकरण का मुद्दा आने वाले समय में राष्ट्रीय राजनीति में केंद्र में रहेगा। सर्वोच्च न्यायालय के 2024 के आदेश के आधार पर वे इसे एक व्यापक अभियान के रूप में आगे बढ़ाने की तैयारी में हैं। बिहार में एनकाउंटर और जाति की राजनीति पर यह बहस आगामी चुनावी माहौल में और तेज होने की संभावना है।