25 अक्टूबर 2026
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'मन की बात' के 139वें एपिसोड में PM मोदी बोले — यह कार्यक्रम मेरे लिए देश की लोकशक्ति की तीर्थ यात्रा है

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'मन की बात' के 139वें एपिसोड में PM मोदी बोले — यह कार्यक्रम मेरे लिए देश की लोकशक्ति की तीर्थ यात्रा है

सारांश

'मन की बात' के 12 साल पूरे होने पर PM मोदी ने इसे महज एक रेडियो शो नहीं, बल्कि देश की लोकशक्ति की आराधना का मंच बताया। 139वें एपिसोड में उन्होंने इसे एक तीर्थ यात्रा की संज्ञा दी — जहाँ सामान्य नागरिकों का समर्पण ही असली तीर्थ है।

मुख्य बातें

PM नरेंद्र मोदी ने 25 अक्टूबर 2026 को 'मन की बात' के 139वें एपिसोड का प्रसारण किया।
मोदी ने इस कार्यक्रम को देश के लोगों के प्रयासों को जानने और उनके योगदान को नमन करने की तीर्थ यात्रा बताया।
कार्यक्रम की शुरुआत विजयादशमी के अवसर पर 12 वर्ष पहले हुई थी।
मोदी ने श्रोताओं को इस यात्रा का 'सहयात्री' और 'मार्गदर्शक' दोनों कहा।
उन्होंने इसे देश की लोकशक्ति की आराधना का मंच बताया जो हर परिवार से जोड़ता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार, 25 अक्टूबर 2026 को 'मन की बात' के 139वें एपिसोड में राष्ट्र को संबोधित करते हुए इस कार्यक्रम को एक तीर्थ यात्रा की संज्ञा दी — एक ऐसी यात्रा जिसमें वे देश के सामान्य नागरिकों के परिश्रम, पराक्रम और समर्पण को करीब से जानते हैं और उन्हें नमन करते हैं। 12 वर्षों की इस अनवरत यात्रा में उन्होंने श्रोताओं को अपना 'सहयात्री' और 'मार्गदर्शक' दोनों बताया।

12 वर्षों की यात्रा का स्मरण

मोदी ने अपने संबोधन में याद दिलाया कि इस कार्यक्रम की शुरुआत विजयादशमी के पावन अवसर पर हुई थी। उन्होंने कहा, 'आज से 12 वर्ष पहले विजयादशमी के पावन अवसर पर हमने 'मन की बात' की शुरुआत की थी। तब से अब तक हमारी ये यात्रा निरंतर जारी है। इस यात्रा के सहयात्री भी आप हैं और मार्गदर्शक भी आप ही हैं।' गौरतलब है कि यह कार्यक्रम भारतीय रेडियो प्रसारण के इतिहास में किसी प्रधानमंत्री द्वारा सर्वाधिक एपिसोड वाले जन-संवाद कार्यक्रमों में से एक बन चुका है।

तीर्थ यात्रा की उपमा — क्यों है यह खास

प्रधानमंत्री ने भारत की सदियों पुरानी तीर्थ यात्रा की परंपरा से इस कार्यक्रम की तुलना करते हुए कहा, 'मेरे लिए 'मन की बात' भी देश के लोगों के प्रयासों को करीब से जानने की और उनके योगदान को नमन करने की एक तीर्थ यात्रा से कम नहीं है।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि जो लोग समाज और राष्ट्र के लिए जीते हैं, वे स्वयं एक तीर्थ के स्वरूप हैं। यह उपमा उस व्यापक दर्शन को रेखांकित करती है जिसमें सेवा और समर्पण को आध्यात्मिक मूल्यों से जोड़ा जाता है।

लोकशक्ति की आराधना — PM का नज़रिया

मोदी ने इस मंच को केवल एक रेडियो कार्यक्रम से परे बताया। उनके अनुसार, 'मैं इस कार्यक्रम के माध्यम से एक तरह से देश की लोकशक्ति की आराधना करता हूं। मुझे इसके माध्यम से देश के हर परिवार से जुड़ने का अवसर मिलता है।' उन्होंने देश के हर कोने से ऐसे असाधारण व्यक्तियों की कहानियों को सामने लाने की भूमिका का उल्लेख किया, जिनकी ओर सामान्यतः समाज का ध्यान नहीं जाता। यह ऐसे समय में आया है जब जन-संवाद और राजनीतिक संचार के बीच की रेखा को लेकर बहसें भी जारी रहती हैं।

श्रोताओं की आत्मीयता — अमूल्य पूंजी

प्रधानमंत्री ने श्रोताओं के भावनात्मक जुड़ाव का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि उन्हें सैकड़ों ऐसे संदेश मिलते हैं जिनमें लोग कहते हैं कि 'मन की बात' सुनकर उन्हें ऐसा लगता है जैसे मोदी उनके परिवार के बीच बैठकर संवाद कर रहे हों। उन्होंने कहा, 'मेरे लिए आप सभी श्रोताओं की ये आत्मीयता, आपका ये स्नेह बहुत अमूल्य पूंजी है।' यह भावनात्मक निकटता इस कार्यक्रम की दीर्घायु का एक प्रमुख कारण मानी जाती है।

आगे क्या

'मन की बात' का 140वाँ एपिसोड अगले माह प्रसारित होगा और यह क्रम देश के नागरिकों की प्रेरक गाथाएँ राष्ट्रीय मंच पर लाता रहेगा। मोदी सरकार इस कार्यक्रम को जन-भागीदारी और नागरिक-सशक्तिकरण के व्यापक एजेंडे से जोड़कर देखती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसके साथ एक स्वाभाविक प्रश्न भी जुड़ता है — क्या यह मंच एकतरफा प्रेरणा-प्रसारण बना रहा है या इसमें नागरिकों की समस्याओं और आलोचनाओं की भी सुनवाई होती है? आलोचकों का कहना रहा है कि यह कार्यक्रम सरकारी उपलब्धियों को रेखांकित करने का माध्यम अधिक बन गया है, जबकि मोदी इसे जन-भागीदारी का प्रतीक मानते हैं। तीर्थ यात्रा की उपमा सांस्कृतिक दृष्टि से शक्तिशाली है, परंतु लोकतांत्रिक जवाबदेही के लिए संवाद की यह धारा द्विमुखी होनी चाहिए।
RashtraPress
25 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'मन की बात' का 139वाँ एपिसोड कब प्रसारित हुआ और इसमें क्या कहा गया?
'मन की बात' का 139वाँ एपिसोड 25 अक्टूबर 2026, रविवार को प्रसारित हुआ। इसमें PM मोदी ने कार्यक्रम को देश की लोकशक्ति की तीर्थ यात्रा बताया और 12 वर्षों की यात्रा का स्मरण किया।
PM मोदी ने 'मन की बात' को तीर्थ यात्रा क्यों कहा?
मोदी ने भारत की सदियों पुरानी तीर्थ परंपरा से इसकी तुलना करते हुए कहा कि जैसे तीर्थ में श्रद्धा और समर्पण होता है, वैसे ही यह कार्यक्रम उन्हें देश के सामान्य नागरिकों के योगदान को जानने और नमन करने का अवसर देता है। उनके अनुसार, समाज और राष्ट्र के लिए जीने वाले लोग स्वयं एक तीर्थ के स्वरूप हैं।
'मन की बात' कार्यक्रम की शुरुआत कब हुई थी?
इस कार्यक्रम की शुरुआत विजयादशमी के अवसर पर 12 वर्ष पहले हुई थी। तब से यह हर माह प्रसारित होता आ रहा है और अब तक 139 एपिसोड पूरे हो चुके हैं।
PM मोदी ने श्रोताओं के बारे में क्या कहा?
मोदी ने श्रोताओं को इस यात्रा का 'सहयात्री' और 'मार्गदर्शक' दोनों बताया। उन्होंने कहा कि उन्हें सैकड़ों ऐसे संदेश मिलते हैं जिनमें लोग बताते हैं कि यह कार्यक्रम सुनकर उन्हें ऐसा लगता है जैसे प्रधानमंत्री उनके परिवार के बीच बैठकर संवाद कर रहे हों।
मन की बात का अगला एपिसोड कब होगा?
'मन की बात' का 140वाँ एपिसोड अगले माह प्रसारित होने की उम्मीद है। यह कार्यक्रम प्रत्येक माह के अंतिम रविवार को आकाशवाणी और दूरदर्शन सहित विभिन्न माध्यमों पर प्रसारित किया जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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