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राहुल गांधी चीन के एजेंट हैं — मनोज तिवारी का बड़ा हमला, नरवणे के संस्मरण विवाद पर BJP का पलटवार

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राहुल गांधी चीन के एजेंट हैं — मनोज तिवारी का बड़ा हमला, नरवणे के संस्मरण विवाद पर BJP का पलटवार

सारांश

भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने राहुल गांधी को 'चीन का एजेंट' और 'देश का दुश्मन' बताया। यह बयान जनरल नरवणे के अप्रकाशित संस्मरण में भारत-चीन सीमा तनाव से जुड़े विवादास्पद प्रसंग के सामने आने के बाद आया। तिवारी ने ममता बनर्जी और बंगाल में 'गुंडा राज' पर भी निशाना साधा।

मुख्य बातें

भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने 24 अप्रैल 2025 को राहुल गांधी को 'चीन का एजेंट' और 'देश का दुश्मन' बताया।
पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे के अप्रकाशित संस्मरण में भारत-चीन सीमा तनाव से जुड़े प्रसंग ने नया राजनीतिक विवाद खड़ा किया।
जनरल नरवणे ने स्वयं स्पष्ट किया कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का बयान सेना में सरकार के 'पूर्ण विश्वास' का प्रतीक था।
तिवारी ने ममता बनर्जी के 'अंतिम सांस' वाले बयान को भावनात्मक राजनीति बताया और बंगाल में 'गुंडा राज' का आरोप लगाया।
आरजी कर मेडिकल कॉलेज मामले में उच्च न्यायालय के हस्तक्षेप को भाजपा ने ममता सरकार की विफलता का प्रमाण बताया।
भाजपा ने बेहतर मतदान भागीदारी का श्रेय पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व को दिया।

अहमदाबाद, 24 अप्रैल। भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने शुक्रवार को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर तीखा प्रहार करते हुए उन्हें 'चीन का एजेंट' करार दिया। यह बयान पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे के अप्रकाशित संस्मरण में भारत-चीन सीमा तनाव से जुड़े एक संवेदनशील प्रसंग के सार्वजनिक होने के बाद आया, जिसने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है।

मनोज तिवारी का सीधा आरोप — 'राहुल गांधी देश के दुश्मन'

मनोज तिवारी ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में बिना किसी लाग-लपेट के कहा, "राहुल गांधी चीन के एजेंट हैं — इस पर पूरी तरह भरोसा किया जा सकता है।" उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस जिस नेतृत्व में चल रही है, वह भारत के हित में नहीं है और इसीलिए देश के खिलाफ कई तरह के कांड सामने आते रहते हैं।

तिवारी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बार-बार अपमान का आरोप लगाते हुए कहा, "राहुल गांधी ने पीएम मोदी के खिलाफ कुछ भी कहना बाकी नहीं छोड़ा, यहां तक कि उन्हें आतंकवादी तक कहा। यह उस व्यक्ति के बारे में है जिनसे आतंकवादियों की कई पीढ़ियां डरती रही हैं।"

नरवणे के संस्मरण में क्या है विवाद?

जनरल मनोज मुकुंद नरवणे के अप्रकाशित संस्मरण में भारत-चीन सीमा तनाव के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा कथित रूप से कहे गए वाक्यांश 'जो उचित समझो, वो करो' का उल्लेख है। इस प्रसंग को लेकर विपक्ष ने सरकार को घेरने की कोशिश की थी।

हालांकि, जनरल नरवणे ने स्वयं स्पष्ट किया कि यह बयान सशस्त्र बलों पर सरकार के 'पूर्ण विश्वास' का प्रतीक था। उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसे संवेदनशील सैन्य मामलों का राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए।

गौरतलब है कि 2020 में गलवान घाटी संघर्ष के बाद से ही भारत-चीन सीमा पर तनाव का मुद्दा राजनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील बना हुआ है। विपक्ष लगातार इस मुद्दे पर सरकार से जवाब मांगता रहा है, जबकि सरकार का पक्ष रहा है कि सेना को पूरी स्वायत्तता और समर्थन दिया गया।

ममता बनर्जी के बयान पर तिवारी का तंज

मनोज तिवारी ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के उस बयान पर भी तीखी प्रतिक्रिया दी जिसमें उन्होंने कहा था, "मेरा जन्म बंगाल में हुआ था और अंतिम सांस भी इसी बंगाल में लूंगी।"

तिवारी ने व्यंग्यात्मक लहजे में पूछा, "वह मरने की बात क्यों कर रही हैं? चुनाव जीतने या हारने के बारे में होते हैं — मरने का इससे क्या लेना-देना है?" उन्होंने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए भावनात्मक बयानबाजी का सहारा ले रही हैं।

पश्चिम बंगाल में 'गुंडा राज' का आरोप

भाजपा नेता मनोज तिवारी ने पश्चिम बंगाल में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरजी कर मेडिकल कॉलेज मामले का हवाला देते हुए कहा कि उचित कानूनी कार्रवाई के लिए उच्च न्यायालय को हस्तक्षेप करना पड़ा, जो राज्य सरकार की विफलता को दर्शाता है।

उन्होंने दावा किया कि बंगाल में 'गुंडा राज' है और लोग बिना डर के मतदान करने या अन्य दलों को समर्थन देने के लिए स्वतंत्र नहीं हैं। तिवारी ने राज्य में बेहतर मतदान भागीदारी का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व को दिया।

यह उल्लेखनीय है कि 2021 के बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद से भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के बीच टकराव लगातार बढ़ा है। आरजी कर मामले में कलकत्ता उच्च न्यायालय और बाद में सर्वोच्च न्यायालय के हस्तक्षेप ने राज्य सरकार की आलोचना को और तेज किया है।

आने वाले दिनों में नरवणे के संस्मरण के प्रकाशन और उसमें उठाए गए मुद्दों पर संसद में बहस तेज होने की संभावना है। विपक्ष इस मुद्दे को 2026 के राज्य चुनावों तक जीवित रखने की कोशिश करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन दोनों पक्ष इसे चुनावी हथियार बना चुके हैं। बंगाल में 'गुंडा राज' के आरोप और 2026 के विधानसभा चुनावों की पृष्ठभूमि में यह बयानबाजी भाजपा की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है जो पूर्वी भारत में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मनोज तिवारी ने राहुल गांधी को चीन का एजेंट क्यों कहा?
भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने जनरल नरवणे के अप्रकाशित संस्मरण में भारत-चीन सीमा तनाव से जुड़े विवाद के बाद राहुल गांधी पर 'चीन के एजेंट' होने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि राहुल गांधी लगातार पीएम मोदी और देश की सेना को कमजोर दिखाने की कोशिश करते हैं।
जनरल नरवणे के संस्मरण में क्या विवादास्पद बात है?
जनरल नरवणे के अप्रकाशित संस्मरण में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के कथित वाक्यांश 'जो उचित समझो, वो करो' का उल्लेख है जो भारत-चीन सीमा तनाव के दौरान कहा गया था। जनरल नरवणे ने खुद इसे सेना में सरकार के पूर्ण विश्वास का प्रतीक बताया और राजनीतिकरण से बचने की अपील की।
मनोज तिवारी ने ममता बनर्जी पर क्या आरोप लगाए?
मनोज तिवारी ने ममता बनर्जी के 'अंतिम सांस बंगाल में लूंगी' वाले बयान को भावनात्मक राजनीति बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि बंगाल में गुंडा राज है और आरजी कर जैसे मामलों में न्याय के लिए उच्च न्यायालय को हस्तक्षेप करना पड़ा।
भारत-चीन सीमा विवाद में राहुल गांधी की क्या भूमिका रही है?
राहुल गांधी ने गलवान घाटी संघर्ष (2020) के बाद से सरकार पर चीन के सामने कमजोरी दिखाने का आरोप लगाया है। भाजपा इन बयानों को देश-विरोधी बताती है, जबकि कांग्रेस का कहना है कि वे जवाबदेही मांग रहे हैं।
पश्चिम बंगाल में भाजपा और तृणमूल के बीच विवाद क्यों बढ़ रहा है?
2026 के विधानसभा चुनावों की पृष्ठभूमि में भाजपा बंगाल में कानून-व्यवस्था, आरजी कर मामला और मतदाताओं पर दबाव जैसे मुद्दों को उठा रही है। भाजपा का दावा है कि पीएम मोदी और अमित शाह के नेतृत्व में बंगाल में मतदान भागीदारी बढ़ी है।
राष्ट्र प्रेस
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