मावलिननोंग गांव: एशिया का सबसे स्वच्छ गाँव, जहाँ नदी के तल में पत्थर भी चमकते हैं
सारांश
मेघालय का मावलिननोंग गांव सिर्फ एक पर्यटन स्थल नहीं — यह स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण का जीवंत उदाहरण है। 600 की आबादी वाले इस गाँव ने 2003 में एशिया का सबसे स्वच्छ गाँव का खिताब जीता, और आज भी बाँस के कूड़ेदान, जैविक खाद और बच्चों की सक्रिय भागीदारी से यह परंपरा जीवित है।
मुख्य बातें
मावलिननोंग गांव को 2003 में 'एशिया का सबसे स्वच्छ गाँव' और 2005 में 'भारत का सबसे साफ-सुथरा गाँव' घोषित किया गया था।
गाँव की आबादी लगभग 600 लोग हैं और साक्षरता दर 100% है।
यहाँ प्लास्टिक के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध है; कूड़ेदान बाँस से बने होते हैं और जैविक कचरे से ऑर्गेनिक खाद तैयार की जाती है।
गाँव की एंट्री फीस ₹100 प्रति व्यक्ति है और शिलांग से इसकी दूरी 80 किलोमीटर है।
गाँव में होम स्टे की सुविधा उपलब्ध है; बाँस और घास से बने घर व शांत झरने पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।
मेघालय के पूर्वी खासी हिल्स जिले में बसा मावलिननोंग गांव न केवल अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए, बल्कि असाधारण स्वच्छता के लिए भी पूरे एशिया में प्रसिद्ध है। इस गांव को साल 2003 में 'एशिया का सबसे स्वच्छ गाँव' और 2005 में 'भारत का सबसे साफ-सुथरा गाँव' घोषित किया गया था। यहाँ की नदियाँ इतनी पारदर्शी हैं कि पर्यटक पानी के तल में रखे पत्थरों को भी स्पष्ट देख सकते हैं।
मावलिननोंग गांव की पहचान और इतिहास
मावलिननोंग गांव को स्थानीय लोग और पर्यटक प्यार से
संपादकीय दृष्टिकोण
बल्कि सामुदायिक इच्छाशक्ति की है — जो यह साबित करती है कि स्वच्छता किसी सरकारी अभियान की मोहताज नहीं, बल्कि सामूहिक जिम्मेदारी से संभव है। यह ऐसे समय में और भी प्रासंगिक है जब 'स्वच्छ भारत मिशन' के वर्षों बाद भी देश के अधिकांश गाँव बुनियादी स्वच्छता मानकों से जूझ रहे हैं। 600 लोगों के इस गाँव ने बिना किसी बड़े बजट के जो हासिल किया है, वह नीति-निर्माताओं के लिए एक व्यावहारिक मॉडल है। सवाल यह है कि इस मॉडल को बड़े पैमाने पर दोहराने की इच्छाशक्ति कहाँ है?
RashtraPress
26 जून 2026
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
मावलिननोंग गांव को एशिया का सबसे स्वच्छ गाँव कब घोषित किया गया था?
मावलिननोंग गांव को साल 2003 में 'एशिया का सबसे स्वच्छ गाँव' और 2005 में 'भारत का सबसे साफ-सुथरा गाँव' घोषित किया गया था। यह खिताब गाँव की सामुदायिक स्वच्छता परंपराओं और पर्यावरण संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता के कारण मिला।
मावलिननोंग गांव मेघालय में कहाँ स्थित है और शिलांग से कितनी दूर है?
मावलिननोंग गांव मेघालय के पूर्वी खासी हिल्स जिले में स्थित है। शिलांग से इसकी दूरी लगभग 80 किलोमीटर है और वहाँ से बस व टैक्सी सेवा आसानी से उपलब्ध है।
मावलिननोंग गांव में एंट्री फीस कितनी है?
मावलिननोंग गांव में प्रवेश के लिए ₹100 प्रति व्यक्ति की एंट्री फीस निर्धारित है। यहाँ होम स्टे की सुविधा भी उपलब्ध है, जिससे पर्यटक स्थानीय जीवनशैली का अनुभव कर सकते हैं।
मावलिननोंग गांव इतना साफ कैसे रहता है?
गाँव की स्वच्छता का श्रेय वहाँ के लगभग 600 निवासियों की सामूहिक जिम्मेदारी को जाता है। यहाँ प्लास्टिक पर पूर्ण प्रतिबंध है, बाँस के कूड़ेदान इस्तेमाल होते हैं, जैविक कचरे से ऑर्गेनिक खाद बनाई जाती है और बच्चों को बचपन से ही सफाई व पेड़-पौधों की देखभाल में शामिल किया जाता है।
मावलिननोंग गांव को 'भगवान का अपना बगीचा' क्यों कहा जाता है?
अपनी असाधारण प्राकृतिक सुंदरता और अनुकरणीय स्वच्छता के कारण मावलिननोंग गांव को 'भगवान का अपना बगीचा' कहा जाता है। यहाँ की नदियाँ इतनी पारदर्शी हैं कि पानी के तल में रखे पत्थर भी स्पष्ट दिखते हैं, और बाँस-घास से बने घर व शांत झरने इसे एक अद्वितीय पर्यटन स्थल बनाते हैं।