क्या मायावती ने संसद और राज्य विधानमंडलों के सत्रों के घटते समय और हंगामे पर चिंता जताई?

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क्या मायावती ने संसद और राज्य विधानमंडलों के सत्रों के घटते समय और हंगामे पर चिंता जताई?

सारांश

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में, मायावती ने संसद और विधानमंडलों के घटते सत्र समय और हंगामे पर चिंता व्यक्त की। यह चिंता लोकतंत्र के लिए एक गंभीर मुद्दा बन गई है। जानिए उन्होंने क्या कहा और इसकी राजनीति पर क्या प्रभाव पड़ सकता है।

Key Takeaways

  • मायावती ने घटते समय और हंगामे पर चिंता व्यक्त की।
  • 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारियों का सम्मेलन चल रहा है।
  • सरकार और विपक्ष को इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
  • संसद और विधानमंडल लोकतंत्र के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं।
  • कार्यवाही साल में कम-से-कम 100 दिन होनी चाहिए।

लखनऊ, 20 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने संसद और राज्य विधानमंडलों के सत्रों के लगातार घटते समय, बार-बार होने वाले हंगामे और स्थगन को लोकतंत्र के लिए गंभीर चिंता का विषय बताया।

उन्होंने कहा कि लखनऊ में आयोजित 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारियों के तीन दिवसीय सम्मेलन के दौरान विधानमंडलों की कार्यवाही के घटते समय पर व्यक्त की गई चिंता पूरी तरह उचित, सामयिक और सराहनीय है, जिस पर सरकार और विपक्ष दोनों को अति-गंभीर होकर ठोस अमल करना चाहिए।

बसपा मुखिया मायावती ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "देश में संसद और राज्य विधानमंडलों के सत्र के घटते समय के साथ-साथ हर बार इनके भारी हंगामेदार एवं स्थगन आदि से इनकी जन उपयोगिता का घटता प्रभाव अक्सर गंभीर चिंता का विषय रहा है और इसलिए उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में इन दिनों चल रहे 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारियों के तीन-दिवसीय सम्मेलन के दौरान विधानमंडलों की कार्यवाही के लगातार घटते समय पर चिंता व्यक्त किया जाना उचित, सामयिक व सराहनीय है, जिस पर सरकार और विपक्ष दोनों को अति-गंभीर होकर इस पर अमल भी जरूर करना चाहिए। भारतीय संसद व राज्यों के विधानमंडल यहां देश की संवैधानिक व लोकतांत्रिक व्यवस्था के अहम स्तंभ हैं तथा सरकार/कार्यपालिका को देश व जनहित के प्रति उत्तरदायित्व बनाए रखने का एक सशक्त माध्यम हैं। संसद व विधानमंडलों की कार्यवाही साल में कम-से-कम 100 दिन के कैलेंडर तथा सही नियमों के हिसाब से शान्ति-व्यवस्था के साथ चले, यह बहुत जरूरी है।"

उन्होंने आगे लिखा, "इसके अलावा, 'सरकारी मान्यता नहीं होना मदरसा को बंद करने का आधार नहीं' संबंधी माननीय इलाहाबाद हाईकोर्ट के लखनऊ बेंच द्वारा दिया गया फैसला अति-महत्वपूर्णसामयिक है तथा इस आधार पर श्रावस्ती में मदरसे पर लगी सील 24 घंटे में हटाने के निर्देश का भी स्वागत है। वैसे भी संभवतः यहां कोई भी सरकार नीतिगत तौर पर प्राइवेट मदरसों के विरुद्ध नहीं, बल्कि ज़िला स्तर पर अधिकारियों की मनमानी का ही शायद यह परिणाम है कि इस प्रकार की अप्रिय घटनाओं की खबरें आती रहती हैं, जिस पर सरकार को उचित संज्ञान लेकर ऐसी प्रवृत्ति को सख्ती से जरूर रोकना चाहिए।"

ज्ञात हो कि उत्तर प्रदेश में 86 वां अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन चल रहा है। इस दौरान विधानसभा में समयावधि को लेकर नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने चिंता जताई। राज्यपाल और लोकसभा अध्यक्ष ने इस पर मंथन और ध्यान देने की बात कही है।

Point of View

हम सभी को यह समझना होगा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए संसद और विधानमंडलों का सुचारू कार्य अत्यंत आवश्यक है। मायावती की चिंता इस ओर इशारा करती है कि हमें इस दिशा में ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है। यह केवल एक राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि हमारे संविधान और लोकतंत्र की सुरक्षा का सवाल है।
NationPress
20/01/2026

Frequently Asked Questions

मायावती ने किस मुद्दे पर चिंता जताई है?
मायावती ने संसद और राज्य विधानमंडलों के सत्रों के घटते समय और हंगामे पर चिंता जताई है।
86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारियों का सम्मेलन कब हो रहा है?
यह सम्मेलन उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में चल रहा है।
क्या मायावती ने सरकार और विपक्ष से कोई अपील की है?
हाँ, उन्होंने सरकार और विपक्ष दोनों से इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करने की अपील की है।
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