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कैसे श्रेया घोषाल को मिली बॉलीवुड में पहला मौका, संजय लीला भंसाली ने किया था चयन

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कैसे श्रेया घोषाल को मिली बॉलीवुड में पहला मौका, संजय लीला भंसाली ने किया था चयन

सारांश

जब एक छोटी लड़की ने बॉलीवुड में राज करने का सपना देखा, तब संजय लीला भंसाली ने उसकी आवाज से मंत्रमुग्ध होकर उसे अवसर दिया। जानें श्रेया घोषाल की प्रेरणादायक कहानी!

मुख्य बातें

श्रेयाने बॉलीवुड में अपने सपनों को साकार करने के लिए संघर्ष किया।
उनकी आवाज ने उन्हें पहचान दिलाई।
संगीत की शिक्षा ने उन्हें सफलता की ओर अग्रसर किया।
श्रेयाने 20 से अधिक भाषाओं में गाने गाए हैं।
उनका नाम गिनीज बुक में दर्ज है।

मुंबई, 11 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। जब बच्चे आठवीं कक्षा में होते हैं, तब उन्हें यह नहीं पता होता कि भविष्य में किस दिशा में बढ़ना है, लेकिन एक छोटी सी लड़की बॉलीवुड में नाम कमाने के सपने देख रही थी। उसका नाम श्रेया घोषाल है, और आज वह 12 मार्च41वां जन्मदिन मना रही हैं।

कहा जाता है कि माँ बच्चों की पहली गुरु होती हैं, और श्रेया के मामले में भी यही सच था। उनकी माँ बेहद अच्छी गाती थीं, जिसके चलते उन्होंने श्रेया को संगीत की शिक्षा देने का निर्णय लिया। श्रेया ने मात्र 6 साल की उम्र में संगीत की शिक्षा लेना शुरू किया और स्कूल के वार्षिक समारोह में अपनी आवाज से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके बाद उन्होंने पद्मश्री स्वर्गीय कल्याणजी भाई और स्वर्गीय मुक्ता भिडेजी से भी प्रशिक्षण लिया।

कम ही लोग जानते हैं कि श्रेया ने साइंस की पढ़ाई की, लेकिन संगीत के प्रति अपने जुनून को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने 12वींसंजय लीला भंसाली ने एक टीवी प्रोग्राम देखकर उन्हें देवदास के लिए चुना था।

श्रेयाने अपने बचपन में म्यूजिक रियलिटी शो 'सारेगामापा' में भाग लिया और फाइनल तक पहुंची। एक दिन, अपनी माँ के साथ टीवी देखते हुए, संजय लीला भंसाली ने पहली बार श्रेया को गाते सुना। उस समय भंसाली हम दिल दे चुके सनम बना रहे थे और देवदास का विचार उनके मन में था। श्रेया की आवाज सुनकर उन्होंने उन्हें पारो की आवाज के लिए चुना और 'सारेगामापा' के माध्यम से संपर्क किया, जिससे उन्होंने 'बैरी पिया' गाना दिया। उस समय श्रेया की उम्र मात्र 15 साल थी।

यह महत्वपूर्ण था कि पहले ही गाने ने श्रेया की जिंदगी बदल दी और उन्हें पहला नेशनल अवॉर्ड भी दिलवाया। 'बैरी पिया' गाना उनके लिए कठिन नहीं था क्योंकि उनका बैकग्राउंड शास्त्रीय संगीत से जुड़ा था। रिकॉर्डिंग के दिन उन्होंने पहली बार में ही गाना रिकॉर्ड कर लिया और भंसाली ने उन्हें गले लगा लिया।

इसके बाद श्रेया ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और हिंदी समेत 20 से अधिक भाषाओं में गाने गाए। उनका नाम गिनीज बुक ऑफ वल्ड रिकॉर्ड में सबसे ज्यादा गाने वाली फीमेल सिंगर के रूप में दर्ज है। उन्होंने हिंदी सिनेमा के लिए कई रोमांटिक गाने गाए हैं, जैसे 'मैं तेनू समझावां', 'मनवां लागे', 'सुन रहा है न तू', 'जादू है नशा है' और 'तुझमें रब दिखता है'।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उन्होंने भारतीय संगीत को भी नई ऊँचाइयों पर पहुँचाया है। उनकी कहानी दर्शाती है कि दृढ़ संकल्प और संघर्ष से किसी भी लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है।
RashtraPress
16 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

श्रेया घोषाल ने कब पहली बार गाना गाया?
श्रेया घोषाल ने पहली बार गाना 'बैरी पिया' गाया, जो कि संजय लीला भंसाली की फिल्म 'देवदास' के लिए था।
श्रेयाने कितनी भाषाओं में गाने गाए हैं?
श्रेयाने हिंदी समेत 20 से अधिक भाषाओं में गाने गाए हैं।
श्रेया घोषाल का पहला संगीत शो कौन सा था?
श्रेयाने अपने बचपन में म्यूजिक रियलिटी शो 'सारेगामापा' में भाग लिया था।
श्रेयाने किस उम्र में संगीत की शिक्षा लेना शुरू किया?
श्रेयाने 6 साल की उम्र में संगीत की शिक्षा लेना शुरू किया था।
श्रेयाने कौन-कौन से प्रसिद्ध गाने गाए हैं?
श्रेयाने 'मैं तेनू समझावां', 'मनवां लागे', 'सुन रहा है न तू' जैसे कई प्रसिद्ध गाने गाए हैं।
राष्ट्र प्रेस
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