12 जुलाई 2026
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दिल्ली के मयूर विहार में जुआ रैकेट का भंडाफोड़: 17 गिरफ्तार, QR कोड से होती थी वसूली

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दिल्ली के मयूर विहार में जुआ रैकेट का भंडाफोड़: 17 गिरफ्तार, QR कोड से होती थी वसूली

सारांश

पूर्वी दिल्ली के मयूर विहार में पुलिस ने गाजियाबाद से जुड़े 'नंबर सट्टा' नेटवर्क का भंडाफोड़ किया। 17 गिरफ्तार, QR कोड से डिजिटल वसूली का खुलासा — पारंपरिक सट्टे में तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल की एक नई मिसाल।

मुख्य बातें

पूर्वी जिला पुलिस ने मयूर विहार, इंदिरा कैंप में छापा मारकर 17 आरोपियों को गिरफ्तार किया।
रैकेट गाजियाबाद-आधारित 'नंबर सट्टा' नेटवर्क से जुड़ा था और झुग्गी क्षेत्र में संगठित रूप से चल रहा था।
बरामदगी में QR कोड, 2 जुआ रजिस्टर, 2 डायरी, सट्टा पर्चे और ₹8,891 नकद शामिल।
एफआईआर संख्या 206/2026 , थाना मयूर विहार में दिल्ली पब्लिक गैंबलिंग एक्ट धारा 3/4/5 के तहत दर्ज।
कार्रवाई एसीपी पवन कुमार और इंस्पेक्टर जितेंद्र मलिक के नेतृत्व में हुई।
पुलिस बड़े सट्टा गिरोह से संभावित संबंधों की जांच कर रही है।

पूर्वी दिल्ली के मयूर विहार स्थित इंदिरा कैंप इलाके में पूर्वी जिला पुलिस की स्पेशल स्टाफ टीम ने 23 मई 2026 को मिली गुप्त सूचना के आधार पर एक अवैध सार्वजनिक जुआ रैकेट का भंडाफोड़ किया और 17 आरोपियों को मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के अनुसार, यह रैकेट गाजियाबाद-आधारित 'नंबर सट्टा' नेटवर्क के ज़रिए झुग्गी क्षेत्र में संगठित रूप से संचालित हो रहा था।

छापेमारी का घटनाक्रम

एसीपी (ऑपरेशंस) पवन कुमार और इंस्पेक्टर जितेंद्र मलिक के नेतृत्व में पुलिस टीम ने इंदिरा कैंप क्षेत्र में दबिश दी। छापे के दौरान आरोपियों ने भागने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने सभी 17 लोगों को मौके पर ही काबू कर लिया। यह कार्रवाई अवैध जुआ और सट्टा गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए चलाए जा रहे व्यापक अभियान का हिस्सा बताई जा रही है।

बरामदगी और डिजिटल कनेक्शन

छापेमारी के दौरान पुलिस ने एक QR कोड, दो जुआ रजिस्टर, दो डायरी, हाथ से लिखे सट्टा पर्चे और ₹8,891 नकद बरामद किए। अधिकारियों ने बताया कि जुआ की रकम डिजिटल माध्यम से QR कोड के ज़रिए भी वसूली जा रही थी — जो इस तरह के पारंपरिक सट्टा नेटवर्क में डिजिटल भुगतान के बढ़ते चलन को दर्शाता है।

कानूनी कार्रवाई

इस मामले में थाना मयूर विहार में एफआईआर संख्या 206/2026 दर्ज की गई है, जो दिल्ली पब्लिक गैंबलिंग एक्ट की धारा 3/4/5 के तहत है। गिरफ्तार आरोपियों में त्रिलोकपुरी, मंगोलपुरी, चिल्ला गांव और आसपास के इलाकों के निवासी शामिल हैं, जो रिक्शा चालक, मजदूर, पेंटर, विक्रेता और अन्य छोटे व्यवसायों से जुड़े हैं।

जांच की दिशा

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, सभी आरोपियों से पूछताछ जारी है और यह पता लगाया जा रहा है कि इस रैकेट के पीछे कोई बड़ा सट्टा गिरोह सक्रिय है या नहीं। पूरे नेटवर्क, वित्तीय लेनदेन और अन्य संभावित संलिप्त व्यक्तियों की भी जांच की जा रही है। गौरतलब है कि इस तरह के झुग्गी-केंद्रित सट्टा नेटवर्क अक्सर बड़े अंतर-राज्यीय गिरोहों से जुड़े होते हैं, जिनकी तह तक पहुंचना पुलिस के लिए प्राथमिकता होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिससे इनकी ट्रेसिंग और मुश्किल होती जा रही है। गाजियाबाद कनेक्शन यह भी संकेत देता है कि ये रैकेट अब एकल-शहर तक सीमित नहीं रहे। असली परीक्षा यह है कि क्या पुलिस 17 छोटे खिलाड़ियों की गिरफ्तारी से आगे बढ़कर नेटवर्क के शीर्ष संचालकों तक पहुंच पाती है — जो अक्सर इन मामलों में अछूते रह जाते हैं।
RashtraPress
12 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मयूर विहार जुआ रैकेट में क्या हुआ?
पूर्वी जिला पुलिस की स्पेशल स्टाफ टीम ने मयूर विहार के इंदिरा कैंप इलाके में छापा मारकर 17 आरोपियों को गिरफ्तार किया। यह रैकेट गाजियाबाद-आधारित 'नंबर सट्टा' नेटवर्क के ज़रिए संचालित हो रहा था और QR कोड से डिजिटल वसूली भी की जाती थी।
गिरफ्तार आरोपी कौन हैं और उनके खिलाफ क्या मामला दर्ज हुआ है?
गिरफ्तार 17 आरोपी त्रिलोकपुरी, मंगोलपुरी, चिल्ला गांव और आसपास के इलाकों के निवासी हैं — रिक्शा चालक, मजदूर, पेंटर और छोटे विक्रेता। इनके खिलाफ थाना मयूर विहार में एफआईआर संख्या 206/2026, दिल्ली पब्लिक गैंबलिंग एक्ट की धारा 3/4/5 के तहत दर्ज की गई है।
छापे में क्या बरामद हुआ?
पुलिस ने एक QR कोड, दो जुआ रजिस्टर, दो डायरी, हाथ से लिखे सट्टा पर्चे और ₹8,891 नकद बरामद किए। QR कोड का इस्तेमाल जुआ की रकम डिजिटल माध्यम से वसूलने के लिए किया जा रहा था।
इस कार्रवाई का नेतृत्व किसने किया?
छापेमारी एसीपी (ऑपरेशंस) पवन कुमार और इंस्पेक्टर जितेंद्र मलिक के नेतृत्व में की गई। 23 मई 2026 को मिली गुप्त सूचना के आधार पर यह अभियान चलाया गया।
आगे जांच में क्या देखा जाएगा?
पुलिस अब पूरे नेटवर्क, वित्तीय लेनदेन और अन्य संभावित संलिप्त व्यक्तियों की जांच कर रही है। मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि इस रैकेट के पीछे कोई बड़ा सट्टा गिरोह सक्रिय है या नहीं।
राष्ट्र प्रेस
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