सीमापुरी इमारत हादसे के बाद MCD का बड़ा एक्शन, अवैध निर्माणों पर चला बुलडोजर
सारांश
मुख्य बातें
उत्तरी दिल्ली के सीमापुरी में चार मंजिला इमारत गिरने से पाँच लोगों की मौत — जिनमें दो बच्चे भी शामिल थे — के दो दिन बाद शुक्रवार, 9 अक्टूबर 2026 को दिल्ली नगर निगम (MCD) ने अवैध निर्माणों के विरुद्ध बुलडोजर अभियान चलाया। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के सीधे आदेश पर शुरू हुई यह कार्रवाई उन संरचनाओं को ध्वस्त करने के लिए की गई जो सरकारी निर्माण नियमों का उल्लंघन कर खड़ी की गई थीं।
हादसे का विवरण और मृतकों की पहचान
अधिकारियों के अनुसार, बुधवार की इस त्रासदी में जान गंवाने वालों की पहचान 12 साल की एक लड़की, 21 वर्षीया गुलाफशा (जो लगभग चार महीने की गर्भवती थीं), लगभग डेढ़ साल के एक बच्चे, तथा दो अन्य महिलाओं — नुसरत उर्फ गुड़िया और हाजरा बीबी — के रूप में की गई है। इमारत गिरने में आठ अन्य लोग घायल हुए, जिन्हें बचाकर ताहिरपुर स्थित राजीव गांधी सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में भर्ती कराया गया।
पुलिस और MCD की कार्रवाई
शाहदरा जिले के डीसीपी राजेंद्र प्रसाद मीणा ने बताया, 'पास की एक इमारत को पहले ही खतरनाक घोषित कर दिया गया था। जब वह इमारत गिरी तो उसका एक हिस्सा बगल की इमारत से टकराया और गिर गया, जिससे उसकी बालकनी और दीवारें क्षतिग्रस्त हो गईं। MCD ने शुक्रवार को मालिक को नोटिस जारी किया और उसे पूरी तरह से गिराने के लिए दो घंटे का समय दिया। हमने इस काम में मदद के लिए पुलिस सुरक्षा मुहैया कराई है।'
डीसीपी मीणा ने यह भी बताया कि बुधवार की घटना के संबंध में मामला दर्ज कर लिया गया है और गिरी हुई इमारत का मालिक अभी फरार है। बचाव अभियान गुरुवार दोपहर 2 बजे तक पूर्ण हो चुका था।
व्यापक अभियान: दिल्ली के अन्य हिस्सों में भी कार्रवाई
गौरतलब है कि सीमापुरी हादसे से पहले सत्य निकेतन इलाके में भी एक इमारत गिरी थी, जहाँ 'पेइंग गेस्ट' (PG) सुविधा थी और रहने वाले अधिकांश लोग दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र थे। उस त्रासदी के बाद MCD ने राष्ट्रीय राजधानी के विभिन्न हिस्सों में 'जर्जर' इमारतों की पहचान और ध्वस्तीकरण का व्यापक अभियान शुरू किया था, जिसका सीमापुरी में चली यह कार्रवाई एक हिस्सा है।
आम जनता पर असर और सवाल
यह ऐसे समय में आया है जब दिल्ली में अनधिकृत निर्माणों की समस्या वर्षों से बनी हुई है और नियमन तंत्र पर सवाल उठते रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि जब तक हादसा नहीं होता, प्रशासनिक कार्रवाई नहीं होती — यह प्रतिक्रियाशील नहीं, बल्कि निवारक दृष्टिकोण की माँग करता है। आने वाले दिनों में MCD के इस अभियान का दायरा और शहर के अन्य जर्जर इलाकों तक बढ़ाया जाएगा।