19 जुलाई 2026
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मेरठ का रहस्यमय बिल्वेश्वर महादेव मंदिर: मंदोदरी की तपस्या का स्थल

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मेरठ का रहस्यमय बिल्वेश्वर महादेव मंदिर: मंदोदरी की तपस्या का स्थल

सारांश

मेरठ में स्थित बिल्वेश्वर महादेव मंदिर, जहां मंदोदरी ने भगवान शिव की कठिन तपस्या की। यह मंदिर न केवल एक धार्मिक स्थल है बल्कि रामायण काल की जीवंत गवाह भी है। जानें इस मंदिर के रहस्यों और मान्यताओं के बारे में।

मुख्य बातें

बिल्वेश्वर महादेव मंदिर की अद्भुत वास्तुकला और इतिहास मंदोदरी की तपस्या और वरदान की कहानी विशेष अवसरों पर जलाभिषेक का आयोजन आस्था और भक्ति का प्रमुख केंद्र मंदिर का स्थान और पहुंच की जानकारी

मेरठ, 2 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भारत और विश्व के विभिन्न स्थानों पर देवाधिदेव महादेव के कई अद्वितीय मंदिर हैं, जो न केवल अपनी सुंदरता के लिए प्रसिद्ध हैं, बल्कि अपने अंदर कई रहस्यों और भक्ति के भाव को भी समेटे हुए हैं। उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में ऐसा ही एक भव्य शिवालय है, जहां लंकापति रावण की पत्नी मंदोदरी ने कठोर तपस्या करके महादेव से वरदान प्राप्त किया था।

उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग के अनुसार, बिल्वेश्वर महादेव मंदिर सिर्फ एक शिव मंदिर नहीं, बल्कि रामायण काल की जीवंत गवाह है। जनश्रुतियों के अनुसार, यह वही पवित्र स्थल है जहां मंदोदरी ने भगवान शिव की कठोर तपस्या की। मंदोदरी ने महादेव से एक ऐसे जीवनसाथी की कामना की थी जो विद्वान् और शक्तिशाली हो। महादेव उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर उनकी मनोकामना पूरी की और बाद में मंदोदरी का विवाह लंकापति रावण से हुआ। इसी कारण मेरठ को 'रावण का ससुराल' भी कहा जाता है।

मंदिर के पीछे एक पौराणिक कथा भी है, जिसके अनुसार मेरठ या प्राचीन नाम मयराष्ट्र में मय दानवों का राजा मय रहता था और मंदोदरी उनकी पुत्री थी। मंदोदरी नियमित रूप से बिल्वेश्वर महादेव मंदिर आकर शिव की पूजा करती थीं। यहां उन्होंने अखंड तपस्या की। भगवान शिव ने उनकी भक्ति स्वीकार की और उन्हें वरदान दिया। मंदिर परिसर में आज भी एक प्राचीन कुआं मौजूद है, जिसके जल से शिवलिंग का अभिषेक किया जाता था। हालांकि, वर्तमान में कुआं बंद रहता है और विशेष अवसरों पर खोला जाता है। मंदिर का वर्तमान स्वरूप मराठा काल में बना। मराठा शासन के दौरान इस मंदिर का जीर्णोद्धार कराया गया। उस समय यहां बिल्व के वृक्षों की भरमार थी, इसलिए इसका नाम बिल्वेश्वर महादेव पड़ा। मंदिर की वास्तुकला में मराठा शैली की झलक देखी जा सकती है।

बिल्वेश्वर महादेव मंदिर आस्था और भक्ति का एक प्रमुख केंद्र है। यहां स्वयंभू धातु का शिवलिंग स्थापित है। मान्यता है कि 40 दिनों तक लगातार दीपक जलाने से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। सावन के महीने में यहां विशेष जलाभिषेक का आयोजन होता है और दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं। मंदिर परिसर में मुख्य द्वार की बनावट बद्रीनाथ धाम से मिलती-जुलती है। खास बात है कि यहां लगा प्राचीन पीतल का घंटा सात अलग-अलग सुरों में बजता है।

मंदिर सुबह 6 बजे से रात 9 बजे तक खुला रहता है। बिल्वेश्वर महादेव मंदिर मेरठ शहर के कैंट क्षेत्र में सदर थाना के पास स्थित है। मेरठ कैंट रेलवे स्टेशन से मंदिर की दूरी मात्र 1-2 किलोमीटर है। मंदिर पहुंचने के लिए ऑटो, रिक्शा या पैदल भी आसानी से पहुंचा जा सकता है। सड़क मार्ग से मेरठ अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। दिल्ली, गाजियाबाद, मुरादाबाद आदि शहरों से बस या टैक्सी के माध्यम से आसानी से पहुंचा जा सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बिल्वेश्वर महादेव मंदिर कहाँ स्थित है?
बिल्वेश्वर महादेव मंदिर उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में स्थित है।
मंदोदरी ने किस deity की तपस्या की थी?
मंदोदरी ने भगवान शिव की तपस्या की थी।
यह मंदिर कब तक खुला रहता है?
यह मंदिर सुबह 6 बजे से रात 9 बजे तक खुला रहता है।
क्या यहाँ विशेष जलाभिषेक होता है?
हाँ, सावन के महीने में यहाँ विशेष जलाभिषेक का आयोजन होता है।
क्या इस मंदिर में कोई प्राचीन कुआं है?
हाँ, मंदिर परिसर में एक प्राचीन कुआं मौजूद है, जो विशेष अवसरों पर खोला जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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