15 अक्टूबर 2026
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सांप्रदायिक सद्भाव पर मेघालय CM कॉनराड संगमा: 'समुदाय से प्रेम करें, दूसरों से द्वेष नहीं'

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सांप्रदायिक सद्भाव पर मेघालय CM कॉनराड संगमा: 'समुदाय से प्रेम करें, दूसरों से द्वेष नहीं'

सारांश

मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा ने शिलांग में हिंदू मिशन के शताब्दी समारोह पर स्पष्ट संदेश दिया — समुदाय से प्रेम करना ज़रूरी है, लेकिन दूसरों से घृणा नहीं। 1926 में स्थापित मिशन के सौ साल पूरे होने पर यह संदेश मेघालय की बहुसांस्कृतिक विरासत की पुष्टि करता है।

मुख्य बातें

मेघालय CM कॉनराड संगमा ने 14 अक्टूबर 2026 को शिलांग में मेघालय हिंदू मिशन के शताब्दी समारोह को संबोधित किया।
संगमा ने कहा कि अपने समुदाय से प्रेम करना सही है, परंतु दूसरों से नफरत नहीं करनी चाहिए।
मेघालय हिंदू मिशन की स्थापना 1926 में हिंदू सम्मेलन अनाथ आश्रम के रूप में हुई थी।
मिशन ने सामुदायिक उद्देश्यों के लिए 27,425 वर्ग फुट से अधिक भूमि का योगदान दिया है।
कार्यक्रम में कला एवं संस्कृति मंत्री सनबोर शुल्लई और विधायक पॉल लिंगदोह भी उपस्थित रहे।
CM ने कहा कि राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाएँ पिछले आठ वर्षों से सभी समुदायों के लिए समान रूप से संचालित हैं।

मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा ने बुधवार, 14 अक्टूबर 2026 को सांप्रदायिक सद्भाव और आपसी सम्मान का स्पष्ट आह्वान किया। उन्होंने कहा कि अपने समुदाय से प्रेम करना एक सकारात्मक भावना है, परंतु इसे कभी भी दूसरे धर्मों या समुदायों के प्रति घृणा में नहीं बदलना चाहिए। मुख्यमंत्री शिलांग के मावप्रेम स्थित मेघालय हिंदू मिशन के शताब्दी समारोह को संबोधित कर रहे थे।

मुख्य संदेश और वक्तव्य

संगमा ने समारोह में कहा कि प्रत्येक समुदाय मेघालय के सामाजिक ताने-बाने में अपना विशिष्ट योगदान देता है और राज्य के समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि समाज की प्रगति और कल्याण के लिए विभिन्न धर्मों एवं संस्कृतियों के प्रति सम्मान और एकता अनिवार्य है। संगमा ने यह भी कहा कि हर धर्म सेवा और भाईचारे का एक समान मूल संदेश साझा करता है।

मुख्यमंत्री ने युवाओं से विशेष अपील करते हुए उनसे इस अवसर के संदेश को अपने दैनिक जीवन और कार्यों में उतारने का आग्रह किया। उन्होंने करुणा, ईमानदारी और ज़रूरतमंदों की सहायता को विभिन्न धर्मों के साझा मूल्य बताया।

कार्यक्रम में उपस्थिति और भागीदारी

इस शताब्दी समारोह में राज्य के कला एवं संस्कृति मंत्री सनबोर शुल्लई और विधायक पॉल लिंगदोह भी उपस्थित रहे। संगमा ने स्वदेशी समुदायों सहित विभिन्न सांस्कृतिक समूहों की इस समारोह में सक्रिय भागीदारी का स्वागत करते हुए इसे सामाजिक समरसता का प्रतीक बताया।

मिशन की शताब्दी और परोपकारी विरासत

मेघालय हिंदू मिशन की स्थापना 1926 में हिंदू सम्मेलन अनाथ आश्रम के रूप में हुई थी। इसका मूल उद्देश्य समाज के कमज़ोर वर्गों का समर्थन करना और सामाजिक कल्याण को बढ़ावा देना था। संस्था के संस्थापक लक्ष्यों में बेसहारा बच्चों के लिए अनाथालय, ज़रूरतमंद छात्रों के लिए पुस्तकालय एवं विद्यालय, अस्पृश्यता जैसी सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध संघर्ष, तथा महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए व्यावसायिक कौशल प्रदान करना शामिल था।

संगमा ने मिशन के सौ वर्षों के परोपकारी कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि जनसेवा को समर्पित संगठन समुदायों के बीच शांति, सद्भाव और परस्पर समझ को मज़बूत बनाने में सहायक होते हैं।

मिशन का भूमि एवं बाल कल्याण योगदान

गौरतलब है कि पिछले कई दशकों में मिशन ने सार्वजनिक और सामुदायिक उद्देश्यों के लिए लगभग 27,425 वर्ग फुट भूमि का योगदान दिया है। इसमें मावप्रेम प्रेस्बिटेरियन चर्च के लिए भूमि और मावप्रेम रोड के चौड़ीकरण हेतु भूमि भी शामिल है।

लोअर मावप्रेम में मिशन द्वारा संचालित लड़कों और लड़कियों के आवास-गृह किशोर न्याय अधिनियम के अंतर्गत पंजीकृत बाल देखभाल संस्थान हैं। ये संस्थान सरकारी बाल भरण-पोषण अनुदानों के सहयोग से देखभाल एवं सुरक्षा की आवश्यकता वाले बच्चों को आश्रय, भोजन, वस्त्र, शिक्षा, चिकित्सा देखभाल और मनोरंजन सुविधाएँ उपलब्ध कराते हैं।

सरकार की समावेशी नीति

मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार के पिछले आठ वर्षों के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार की कल्याणकारी पहल हमेशा सभी नागरिकों के लिए निर्देशित रही हैं — चाहे वे किसी भी समुदाय, धर्म या सामाजिक पृष्ठभूमि के हों। यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश के कई हिस्सों में सामुदायिक सौहार्द को लेकर विमर्श तेज़ हो रहा है। संगमा का यह संदेश मेघालय की बहुसांस्कृतिक पहचान को और सुदृढ़ करने की दिशा में एक सकारात्मक संकेत है।

संपादकीय दृष्टिकोण

इसलिए हिंदू संगठन के मंच पर सद्भाव का संदेश देना महज़ शिष्टाचार नहीं, बल्कि राज्य की जटिल सामाजिक बुनावट को संभालने की कोशिश है। हालाँकि ऐसे भाषण सुर्खियाँ बनाते हैं, असली कसौटी नीतिगत समावेश है — विशेषकर जब बजट, ज़मीन और शिक्षा जैसे संसाधनों के आवंटन की बात आती है। मिशन के सौ साल का जश्न और उसकी सामाजिक सेवाओं का रिकॉर्ड प्रभावशाली है, पर मुख्यधारा की कवरेज अक्सर यह नहीं बताती कि इन संस्थाओं को सरकारी अनुदान की निरंतरता किस हद तक सुनिश्चित है।
RashtraPress
15 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मेघालय CM कॉनराड संगमा ने हिंदू मिशन शताब्दी समारोह में क्या कहा?
संगमा ने कहा कि अपने समुदाय से प्रेम करना सही है, लेकिन इसका अर्थ दूसरों से घृणा करना नहीं होना चाहिए। उन्होंने सांप्रदायिक सद्भाव, धर्मनिरपेक्षता और आपसी सम्मान को मेघालय की प्रगति के लिए अनिवार्य बताया।
मेघालय हिंदू मिशन की स्थापना कब और क्यों हुई थी?
मेघालय हिंदू मिशन की स्थापना 1926 में हिंदू सम्मेलन अनाथ आश्रम के रूप में हुई थी। इसका उद्देश्य बेसहारा बच्चों की देखभाल, महिलाओं को व्यावसायिक कौशल देना और अस्पृश्यता जैसी सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध काम करना था।
मेघालय हिंदू मिशन बच्चों के लिए क्या सेवाएँ प्रदान करता है?
मिशन के लोअर मावप्रेम स्थित बाल गृह किशोर न्याय अधिनियम के तहत पंजीकृत हैं और ज़रूरतमंद बच्चों को आश्रय, भोजन, वस्त्र, शिक्षा, चिकित्सा देखभाल व मनोरंजन सुविधाएँ प्रदान करते हैं। इन्हें सरकारी बाल भरण-पोषण अनुदान का भी सहयोग मिलता है।
शताब्दी समारोह में और कौन-कौन से नेता उपस्थित थे?
कार्यक्रम में कला एवं संस्कृति मंत्री सनबोर शुल्लई और विधायक पॉल लिंगदोह भी उपस्थित रहे। विभिन्न सांस्कृतिक और स्वदेशी समुदायों के प्रतिनिधियों ने भी समारोह में भाग लिया।
संगमा ने राज्य सरकार की कल्याणकारी नीति के बारे में क्या कहा?
संगमा ने कहा कि पिछले आठ वर्षों में राज्य सरकार की कल्याणकारी पहल बिना किसी सामुदायिक भेदभाव के सभी नागरिकों के लिए समान रूप से संचालित रही हैं। उन्होंने इसे मेघालय की समावेशी शासन परंपरा का हिस्सा बताया।
राष्ट्र प्रेस
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