पीएम मोदी का न्यूजीलैंड दौरा: 2030 तक व्यापार ₹35,000 करोड़ दोगुना करने का लक्ष्य, रणनीतिक साझेदारी का ऐलान
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 10 जुलाई 2026 को न्यूजीलैंड के आधिकारिक दौरे पर पहुँचे — यह 40 वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली न्यूजीलैंड यात्रा है। ऑकलैंड में न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन के निमंत्रण पर आए मोदी ने द्विपक्षीय वार्ता में दोनों देशों के संबंधों को 'रणनीतिक साझेदारी' के स्तर तक उठाने का फैसला किया और 'भारत-न्यूजीलैंड रणनीतिक साझेदारी: रोडमैप टू 2030' को औपचारिक रूप से समर्थन दिया।
मुख्य घटनाक्रम
प्रधानमंत्री मोदी का गवर्नमेंट हाउस में औपचारिक स्वागत हुआ, जिसके बाद उन्होंने प्रधानमंत्री लक्सन के साथ विस्तृत द्विपक्षीय बातचीत की। इस दौरान उन्होंने न्यूजीलैंड के बिज़नेस लीडर्स और भारतीय समुदाय को संबोधित किया तथा देश के खेल इनोवेशन का प्रदर्शन देखा। गौरतलब है कि मार्च 2025 में प्रधानमंत्री लक्सन के भारत दौरे के दौरान मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर बातचीत शुरू हुई थी और रक्षा, शिक्षा, कस्टम्स, उद्यान विज्ञान, वन तथा खेल जैसे क्षेत्रों में एमओयू पर हस्ताक्षर हुए थे — यह दौरा उसी कड़ी को आगे बढ़ाता है।
व्यापार और आर्थिक सहयोग
दोनों देशों ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार — वस्तुओं और सेवाओं में मिलाकर — को दोगुना कर 7 बिलियन न्यूजीलैंड डॉलर यानी लगभग ₹35,000 करोड़ तक पहुँचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया। दोनों प्रधानमंत्रियों ने एक संतुलित, व्यापक और पारस्परिक लाभकारी भारत-न्यूजीलैंड FTA को जल्द से जल्द लागू करने पर सहमति जताई। इसके अलावा पर्यटन क्षेत्र में एमओयू पर हस्ताक्षर हुए और दोनों देशों के बीच सीधी नॉन-स्टॉप उड़ानें शुरू करने को प्रोत्साहन देने पर भी सहमति बनी। बागवानी, वानिकी, पशुपालन और डेयरी क्षेत्र में बढ़ती साझेदारी का स्वागत किया गया।
रक्षा और सुरक्षा सहयोग
दोनों पक्षों ने रक्षा मंत्रालयों और सैन्य स्तरों पर नियमित संस्थागत जुड़ाव बनाए रखने पर सहमति जताई। 2025 में कंबाइंड टास्क फोर्स 150 (CTF-150) के तहत आपसी सहयोग पर विशेष बल दिया गया। समुद्री सहयोग के तहत मैरीटाइम कोऑपरेशन अरेंजमेंट (MCA), हाइड्रोग्राफी और नॉटिकल कार्टोग्राफी पर एक क्रियान्वयन व्यवस्था, तथा एक म्यूचुअल लॉजिस्टिक्स सपोर्ट अरेंजमेंट को अंतिम रूप दिया गया। एक वार्षिक मैरीटाइम सिक्योरिटी डायलॉग शुरू करने पर भी सहमति बनी।
आतंकवाद के मोर्चे पर दोनों देशों ने सीमा पार आतंकवाद सहित इसके सभी रूपों की कड़ी निंदा दोहराई। विशेष रूप से 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले और 10 नवंबर 2025 को नई दिल्ली के लाल किले के निकट हुई आतंकवादी घटना की कड़े शब्दों में निंदा की गई। काउंटर-टेररिज्म ज्वाइंट वर्किंग ग्रुप (JWG) बनाने के लिए एमओए पर हस्ताक्षर हुए।
क्षेत्रीय और बहुपक्षीय सहयोग
दोनों प्रधानमंत्रियों ने एक स्वतंत्र, खुले, शांतिपूर्ण और समृद्ध हिंद-प्रशांत क्षेत्र के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने 1982 के समुद्र के कानून पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन (UNCLOS) के अनुसार नेविगेशन और ओवरफ्लाइट की स्वतंत्रता की पुष्टि की। यूक्रेन में जारी युद्ध पर चिंता जताई और मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की। न्यूजीलैंड ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता के लिए अपना समर्थन दोहराया।
शिक्षा, विज्ञान और आपदा प्रबंधन
दोनों देशों ने शिक्षा, शोध, विज्ञान, तकनीक और इनोवेशन को रणनीतिक साझेदारी का अहम हिस्सा माना। भारत की राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) और न्यूजीलैंड की नेशनल इमरजेंसी मैनेजमेंट एजेंसी (NEMA) के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर हुए। प्रधानमंत्री मोदी ने ग्लोबल बायोफ्यूल्स अलायंस में न्यूजीलैंड के शामिल होने का स्वागत किया। दोनों पक्ष अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) और कोएलिशन फॉर डिजास्टर रेसिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर (CDRI) के जरिए सहयोग गहरा करने पर सहमत हुए।
दोनों नेताओं ने मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे 2030 रोडमैप में उल्लिखित पहलों को समयबद्ध तरीके से लागू करना सुनिश्चित करें — यह भारत-न्यूजीलैंड संबंधों के एक नए और अधिक संरचित अध्याय की शुरुआत है।