मास्को में रामलीला की तैयारी: चांदनी चौक के वस्त्रों में 16 रूसी कलाकार देंगे रामायण को जीवंत रूप
सारांश
मुख्य बातें
मास्को में इस बार दीपोत्सव की आभा केवल अयोध्या की सरयू नदी के तट तक सीमित नहीं रहेगी — रूस की राजधानी में भी रामलीला के मंचन की तैयारियाँ ज़ोरों पर हैं। 16 रूसी कलाकार रामायण के विभिन्न पात्रों को मंच पर जीवंत करने में जुटे हैं और ख़ास बात यह है कि उनकी वेशभूषा दिल्ली के चांदनी चौक से ख़रीदकर रूस ले जाई गई है। यह आयोजन भारत-रूस के बीच सांस्कृतिक सेतु को एक नई मज़बूती देने का प्रयास है।
मंचन की विशेषताएँ
मास्को में होने वाली इस रामलीला के निर्माता एवं निर्देशक डॉ. रामेश्वर सिंह ने बताया कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में अयोध्या के दीपोत्सव और रामलीला से जुड़े आयोजनों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जो पहचान बनाई है, उसी का विस्तार अब रूस तक हो रहा है। उनके अनुसार, रूसी कलाकारों का रामलीला के मंचन में भाग लेना दोनों देशों के संबंधों को सांस्कृतिक धागे से और मज़बूत करता है।
रामायण के सभी प्रमुख पात्रों की भूमिकाएँ रूसी कलाकारों को सौंपी गई हैं — राम: अलेक्सी, सीता: दाशा, लक्ष्मण: ओलेग, हनुमान: दमित्री, रावण: सर्गेई, भरत: एवजेनी, दशरथ: आरतियों, कौशल्या: रति, सुमित्रा: नतातालया, कैकेई: इरीना, जनक: वसीली, सोने का हिरण: रीता तथा मिशा और नादेजदा के साथ राक्षस एवं वानर सेना की भूमिकाएँ भी रूसी कलाकारों द्वारा निभाई जाएंगी।
चांदनी चौक से मास्को तक: वेशभूषा की यात्रा
इस आयोजन की एक उल्लेखनीय विशेषता यह है कि पारंपरिक भारतीय परिधानों की खरीद के लिए दिल्ली के चांदनी चौक को चुना गया। रामायण के पात्रों की पोशाकें यहीं से ख़रीदकर रूस ले जाई गई हैं, जो इस प्रस्तुति को न केवल कथा-केंद्रित बल्कि सांस्कृतिक रूप से प्रामाणिक भी बनाती है। यह प्रयास इस बात का प्रमाण है कि भारतीय परंपरा की जड़ें विदेशी मंचों पर भी वास्तविक रूप में उतारी जा सकती हैं।
सांस्कृतिक जुड़ाव का इतिहास
रूसी कलाकारों और अयोध्या के बीच यह संबंध अचानक नहीं बना। नवंबर 2018 में अयोध्या में 'दिशा रामलीला' की पहली प्रस्तुति हुई, जो रूसी कलाकारों के भारतीय रंगमंच से जुड़ाव का पहला अहम पड़ाव बनी। इसके बाद जनवरी 2019 में प्रयागराज कुंभ मेले में भी 'दिशा रामलीला' का मंचन किया गया, जिसने इस सांस्कृतिक यात्रा को एक और बड़ा आयाम दिया।
गौरतलब है कि 'दिशा रामलीला' महान रंगकर्मी गेन्नादी मिखाइलोविच पेचनिकोव की विरासत को आगे बढ़ाती है, जिन्हें स्नेहपूर्वक 'रूसी राम' कहा जाता था। रूसी दर्शकों के बीच रामलीला को लोकप्रिय बनाने में उनका ऐतिहासिक योगदान रहा है, और यही विरासत आज मास्को में एक नए रूप में सामने आ रही है।
भारत-रूस संबंधों का सांस्कृतिक आयाम
डॉ. रामेश्वर सिंह के अनुसार, जब दूसरे देश के कलाकार रामायण के पात्रों को मंच पर उतारते हैं, तो यह केवल एक नाट्य प्रस्तुति नहीं रहती — यह भारतीय साहित्य, परंपरा और सौंदर्यशास्त्र से उनका जीवंत संवाद बन जाता है। यह आयोजन अयोध्या की सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक मंच पर एक नई पहचान दे रहा है।
मास्को में रामलीला का यह मंचन यह भी दर्शाता है कि भारतीय महाकाव्य की कथाएँ भौगोलिक सीमाओं से परे विभिन्न संस्कृतियों को एकसूत्र में पिरोने की अद्वितीय क्षमता रखती हैं। आने वाले समय में इस तरह के सांस्कृतिक आदान-प्रदान के और विस्तार की संभावनाएँ बनती दिख रही हैं।