क्या मुंबई का महापौर चुनाव प्रभावी नेतृत्व पर आधारित होना चाहिए?
सारांश
Key Takeaways
- मुंबई का महापौर चुनाव प्रभावी नेतृत्व पर आधारित होना चाहिए।
- जाति या समुदाय के आधार पर चुनाव नहीं होना चाहिए।
- मुंबई की स्थिति पर गंभीर चर्चा की आवश्यकता है।
- भाजपा पर मुख्य मुद्दों से ध्यान भटकाने का आरोप।
- जमीनी कार्यकर्ताओं की अनदेखी का असर चुनाव पर होगा।
मुंबई, 1 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। कांग्रेस के नेता असलम शेख ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और शिवसेना पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि मुंबई के प्रचार और वास्तविकता के बीच बड़ा अंतर है। असलम शेख ने यह भी कहा कि मुंबई का महापौर चुनाव खान, शेलार, शिंदे या शेख नहीं, बल्कि समस्याओं से निजात दिलाने वाले प्रभावी नेतृत्व वाला होना चाहिए।
कांग्रेस नेता ने मीडिया से बात करते हुए जनता से अपील की कि वे जाति या समुदाय के आधार पर गुमराह न हों। उन्होंने कहा कि मेयर का चुनाव—खान, शेलार, शिंदे या शेख—जाति के आधार पर नहीं, बल्कि इस बात पर होना चाहिए कि कौन मुंबई का प्रभावी नेतृत्व कर सकता है और शहर की भलाई के लिए काम कर सकता है।
असलम शेख ने कहा कि आज भी मुंबई देश के सबसे प्रदूषित शहरों में से एक है और शहर की बदहाली पर गंभीर चर्चा की आवश्यकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा विकास के बजाय जनता का ध्यान मुख्य मुद्दों से भटकाना चाहती है।
उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए मंदिर-मस्जिद, हिंदू-मुस्लिम और एक राज्य को दूसरे राज्य से जोड़ने जैसे विषय उठाती है।
स्टार प्रचारकों की सूची में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों के शामिल होने पर उन्होंने कहा कि भाजपा के नेता साल में 365 दिनों में से करीब 250 दिन चुनाव प्रचार में व्यस्त रहते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि देश और राज्यों के विकास व समस्याओं पर ध्यान बाद में दिया जाता है, जबकि प्राथमिकता सिर्फ यह रहती है कि चुनाव किसी भी तरह जीता जाए।
कांग्रेस नेता ने टिकट वितरण पर असंतोष जताते हुए कहा कि कुछ सीनियर नेताओं को यह गलतफहमी हो गई थी कि पार्टी की मजबूती के कारण किसी भी हालत में जीत सुनिश्चित है, इसलिए जमीनी कार्यकर्ताओं को टिकट देने की आवश्यकता नहीं समझी गई। उन्होंने दावा किया कि 16 तारीख को नतीजे यह स्पष्ट कर देंगे कि जब मेहनती कार्यकर्ताओं की अनदेखी कर सिफारिश के आधार पर टिकट दिए जाते हैं तो इसका क्या असर होता है।