मुरादाबाद: श्रीराम सोसायटी में 'पूर्णतः हिंदू सनातनी' पोस्टर, मुस्लिम समुदाय को मकान न बेचने की अपील

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मुरादाबाद: श्रीराम सोसायटी में 'पूर्णतः हिंदू सनातनी' पोस्टर, मुस्लिम समुदाय को मकान न बेचने की अपील

सारांश

मुरादाबाद की श्रीराम सोसायटी में 24 से अधिक घरों पर 'पूर्णतः हिंदू सनातनी' पोस्टर लगाए गए हैं। निवासियों ने मुस्लिम समुदाय को मकान न बेचने की अपील की और सरकार से हस्तक्षेप मांगा। सोसायटी में करीब 70 मकान हैं और मंदिर की सुरक्षा निवासियों की मुख्य चिंता है।

Key Takeaways

  • मुरादाबाद के लाजपतनगर स्थित श्रीराम सोसायटी में 24 से अधिक घरों पर 'पूर्णतः हिंदू सनातनी' पोस्टर लगाए गए।
  • सोसायटी के मुख्य द्वार पर 'हिंदू सोसायटी' का बड़ा बोर्ड भी लगाया गया है।
  • निवासी सुनील रस्तोगी के अनुसार सोसायटी में करीब 70 मकान हैं और हाल में कई लोगों को मकान दिखाने से सामूहिक रूप से मना किया गया।
  • निवासी नीरज अग्रवाल ने बताया कि पास के बाहरी इलाके में आधे से ज्यादा मकान मुस्लिम समुदाय द्वारा खरीदे जा चुके हैं।
  • निवासियों ने मुख्यमंत्री और प्रदेश सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है।
  • संविधान के अनुच्छेद 15 और अनुच्छेद 19 के तहत यह कदम कानूनी विवाद का विषय बन सकता है।

मुरादाबाद, 26 अप्रैल। उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले के कटघर थाना क्षेत्र स्थित लाजपतनगर की श्रीराम सोसायटी इन दिनों देशभर में चर्चा का केंद्र बन गई है। यहां के दो दर्जन से अधिक निवासियों ने अपने घरों के बाहर 'पूर्णतः हिंदू सनातनी' लिखे बड़े-बड़े पोस्टर लगाए हैं और मुस्लिम समुदाय सहित अन्य मजहब के लोगों को यहां मकान न खरीदने और न बसने की खुली अपील की है। सोसायटी के मुख्य द्वार पर भी 'हिंदू सोसायटी' का बड़ा बोर्ड लगाया गया है।

क्यों लगाए गए पोस्टर — निवासियों की चिंता

सोसायटी के निवासियों का कहना है कि उनके आवासीय परिसर के भीतर स्थित पार्क में भगवान श्रीराम का मंदिर है, जहां प्रतिदिन पूजा-पाठ और आरती होती है। निवासियों को डर है कि यदि दूसरे समुदाय के लोग यहां बस गए तो धार्मिक गतिविधियों में बाधा आ सकती है और इलाके की सामाजिक संरचना धीरे-धीरे बदल सकती है।

निवासियों ने प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री से इस मुद्दे में हस्तक्षेप की मांग भी की है। उनका तर्क है कि बहुसंख्यक समुदाय के इलाकों में उनकी सुरक्षा और शांति बनाए रखने के लिए सरकार को ठोस कानून बनाने चाहिए।

निवासियों के बयान — सोनी, रस्तोगी और अग्रवाल की आवाज़

सोसायटी की महिला निवासी सोनी ने बताया कि पोस्टर लगाने के पीछे उनकी मुख्य चिंता महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा है। उन्होंने सोशल मीडिया पर वायरल हो रही घटनाओं और बदलते सामाजिक माहौल का हवाला देते हुए कहा कि आज के दौर में जागरूक रहना जरूरी है। उन्होंने अन्य हिंदू परिवारों से भी अपील की कि वे अपने मकान दूसरे समुदाय के लोगों को न बेचें।

एक अन्य निवासी सुनील रस्तोगी ने आरोप लगाया कि दूसरे समुदाय के कुछ लोग ऊंची कीमत देकर सोसायटी में मकान खरीदने की कोशिश कर रहे हैं। उनके अनुसार सोसायटी में कुल करीब 70 मकान हैं और हाल के दिनों में कई लोग मकान देखने आए, लेकिन निवासियों ने सामूहिक रूप से उन्हें मना कर दिया।

स्थानीय निवासी नीरज अग्रवाल ने बताया कि सोसायटी के निकटवर्ती बाहरी इलाके में आधे से अधिक मकान मुस्लिम समुदाय द्वारा खरीदे जा चुके हैं। उनका कहना है कि जहां मंदिर स्थित है, वहां किसी भी प्रकार का धार्मिक परिवर्तन न हो, यह सुनिश्चित करना उनकी प्राथमिकता है।

कानूनी और सामाजिक पहलू — विशेषज्ञों की नज़र में

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 19 प्रत्येक नागरिक को देश में कहीं भी बसने और संपत्ति खरीदने का अधिकार देता है। कानूनी जानकारों के अनुसार, धर्म के आधार पर किसी को संपत्ति बेचने से रोकना संविधान के अनुच्छेद 15 का उल्लंघन हो सकता है, जो धर्म, जाति, लिंग आदि के आधार पर भेदभाव को प्रतिबंधित करता है। हालांकि, पोस्टर लगाना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के दायरे में आता है या नहीं, यह बहस का विषय है।

उल्लेखनीय है कि देश के कई हिस्सों में इस तरह की घटनाएं सामने आती रही हैं। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान में पहले भी कुछ इलाकों में इस प्रकार के बोर्ड और पोस्टर लगाए जाने की खबरें आई हैं, जिन पर प्रशासन ने कभी कार्रवाई की तो कभी मामला शांत हो गया।

व्यापक संदर्भ — देश में बढ़ती आवासीय ध्रुवीकरण की प्रवृत्ति

यह घटना उस व्यापक सामाजिक प्रवृत्ति की एक कड़ी है जिसे शहरी समाजशास्त्री 'रेजिडेंशियल सेग्रीगेशन' यानी आवासीय पृथक्करण कहते हैं। भारत के कई शहरों में धार्मिक आधार पर मोहल्लों का विभाजन पहले से मौजूद रहा है, लेकिन अब इसे औपचारिक रूप से पोस्टरों और बोर्डों के जरिये सार्वजनिक करने की प्रवृत्ति बढ़ रही है।

सामाजिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं सामाजिक ताने-बाने को कमजोर करती हैं और सांप्रदायिक सद्भाव के लिए चुनौती बनती हैं। वहीं, कुछ लोगों का तर्क है कि यह उनकी सांस्कृतिक पहचान और धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा का प्रयास है।

अब देखना यह होगा कि मुरादाबाद प्रशासन और उत्तर प्रदेश सरकार इस मामले में क्या रुख अपनाती है और क्या इस पर कोई कानूनी कार्रवाई होती है।

Point of View

बल्कि देश में तेजी से बढ़ रहे आवासीय ध्रुवीकरण की बड़ी प्रवृत्ति का प्रतिबिंब है। विडंबना यह है कि जो संविधान हर नागरिक को कहीं भी बसने का अधिकार देता है, उसी देश में धर्म के आधार पर 'नो-एंट्री' के बोर्ड लगाए जा रहे हैं। मुख्यधारा की मीडिया इसे केवल सांप्रदायिक चश्मे से देखती है, लेकिन असली सवाल यह है कि प्रशासन और सरकार इस पर चुप क्यों है — क्या यह कानूनी है और क्या ऐसे पोस्टर भविष्य में बड़े टकराव की जमीन तैयार कर रहे हैं?
NationPress
26/04/2026

Frequently Asked Questions

मुरादाबाद की श्रीराम सोसायटी में क्या हुआ?
मुरादाबाद के लाजपतनगर स्थित श्रीराम सोसायटी में 24 से अधिक निवासियों ने अपने घरों के बाहर 'पूर्णतः हिंदू सनातनी' पोस्टर लगाए और मुस्लिम समुदाय को मकान न बेचने की अपील की। सोसायटी के मुख्य द्वार पर भी 'हिंदू सोसायटी' का बोर्ड लगाया गया है।
सोसायटी के निवासियों ने पोस्टर क्यों लगाए?
निवासियों का कहना है कि सोसायटी में श्रीराम मंदिर है और उन्हें डर है कि दूसरे समुदाय के लोगों के आने से धार्मिक गतिविधियों में बाधा आएगी और इलाके की सामाजिक संरचना बदल जाएगी। महिला निवासी सोनी ने महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को प्रमुख कारण बताया।
क्या धर्म के आधार पर मकान बेचने से मना करना कानूनी है?
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 15 धर्म के आधार पर भेदभाव को प्रतिबंधित करता है और अनुच्छेद 19 हर नागरिक को कहीं भी बसने का अधिकार देता है। कानूनी जानकारों के अनुसार धर्म के आधार पर संपत्ति बेचने से रोकना संविधान का उल्लंघन हो सकता है।
सोसायटी में कितने मकान हैं और प्रशासन का क्या रुख है?
निवासी सुनील रस्तोगी के अनुसार सोसायटी में करीब 70 मकान हैं। अभी तक मुरादाबाद प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान या कार्रवाई सामने नहीं आई है।
क्या उत्तर प्रदेश में पहले भी ऐसी घटनाएं हुई हैं?
हां, उत्तर प्रदेश सहित मध्य प्रदेश और राजस्थान में भी पहले ऐसे पोस्टर और बोर्ड लगाए जाने की घटनाएं सामने आई हैं। कुछ मामलों में प्रशासन ने कार्रवाई की जबकि कुछ मामले बिना किसी कदम के शांत हो गए।
Nation Press