मुजफ्फरपुर हत्याकांड: बिहार पुलिस ने ६ कर्मियों को निलंबित किया
सारांश
मुख्य बातें
पटना, २६ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। मुजफ्फरपुर में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक कार्रवाई के तहत एसएसपी कांतेश कुमार मिश्रा ने विवादास्पद गायघाट पटना में शामिल पुलिस छापेमारी दल को निलंबित कर दिया है, जिसमें पूर्व एसएचओ राजा सिंह भी शामिल हैं।
यह कार्रवाई एसपी ग्रामीण राजेश कुमार द्वारा पेश की गई जांच रिपोर्ट के आधार पर की गई है, जिसमें १७-१८ मार्च २०२६ की रात गायघाट थाना क्षेत्र के चोरनिया गांव में की गई छापेमारी के संचालन में गंभीर कमियां पाई गईं।
जांच के परिणामों के अनुसार, छापेमारी के दौरान पुलिस दल को ग्रामीणों के हिंसक प्रतिरोध का सामना करना पड़ा, जिसमें पत्थरबाजी, लाठियों से हमला और यहां तक कि गोलीबारी भी शामिल थी।
इस अफरा-तफरी के दौरान, एसएचओ राजा सिंह ने कथित तौर पर बचने के लिए हवा में गोली चलाई, जिसके परिणामस्वरूप एक स्थानीय निवासी जगतवीर राय की जान चली गई।
जांच में कई गंभीर कमियां सामने आईं, जिनमें यह भी शामिल है कि छापेमारी पर्याप्त बल या उचित खुफिया जानकारी के बिना की गई थी।
जांच रिपोर्ट यह भी बताती है कि टीम संयम बनाए रखने में असफल रही, जिससे स्थिति और बिगड़ गई और खुफिया जानकारी जुटाने में विफलता हुई। चौकीदार प्रहलाद कुमार ने संभावित खतरों या आरोपियों के बारे में टीम को सचेत नहीं किया था।
इन निष्कर्षों के आधार पर, मुजफ्फरपुर के एसएसपी ने तत्कालीन एसएचओ (गायघाट पुलिस स्टेशन) राजा सिंह, सब-इंस्पेक्टर मनीष कुमार, पीटीसी रंजन कुमार, महिला कांस्टेबल चांदनी कुमारी, ड्राइवर कांस्टेबल ओम प्रकाश और चौकीदार प्रहलाद कुमार को निलंबित कर दिया।
इस ऑपरेशन में शामिल होम गार्ड कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए जिला मजिस्ट्रेट को सिफारिश भेजी गई है।
जिला पुलिस के इस निर्णायक कदम से विभाग में काफी हलचल मच गई है और इसे बिहार में पुलिसिंग के तरीकों और कानून-व्यवस्था को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच जवाबदेही सुनिश्चित करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।
मुजफ्फरपुर के एसएसपी की यह कार्रवाई बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव के बुधवार को प्रभावित गांव पहुंचकर मृतक परिवार को सांत्वना देने के एक दिन बाद हुई है।
तेजस्वी यादव ने यह भी आरोप लगाया कि एसएचओ ने किसान जगतवीर राय के घर में घुसकर कथित तौर पर उन्हें गोली मार दी।