16 अक्टूबर 2026
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योगी के माफिया-जमीन ऐलान पर विपक्ष का पलटवार: 'नाम बदलने से काम नहीं बदलता'

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योगी के माफिया-जमीन ऐलान पर विपक्ष का पलटवार: 'नाम बदलने से काम नहीं बदलता'

सारांश

माफियाओं की ज़मीन पर गरीब आवास का योगी का ऐलान विपक्ष को रास नहीं आया। कांग्रेस ने लखनऊ में छीने गए घरों का हवाला दिया, सपा ने मुख्यमंत्री की भाषा पर सवाल उठाए। 'नाम बदलने से काम बदल जाएं तो क्या ही बात है' — इस एक जुमले में विपक्ष की पूरी आपत्ति सिमट गई।

मुख्य बातें

सीएम योगी आदित्यनाथ के माफिया-ज़मीन पर गरीब आवास बनाने के बयान पर 16 अक्टूबर 2026 को विपक्ष ने तीखी प्रतिक्रिया दी।
कांग्रेस नेता सुरेंद्र राजपूत ने दावा किया कि लखनऊ में मुख्तार अंसारी की कथित ज़मीन पर बने आवास गरीबों को देने के बाद वापस ले लिए गए।
राजपूत ने कहा कि वह ज़मीन वास्तव में जल निगम की निकली, माफिया की नहीं।
सपा नेता आशुतोष वर्मा ने सीएम की 'बम', 'मिट्टी में मिलाने' जैसी भाषा को अशोभनीय और प्रदेश के लिए अनुचित बताया।
मंत्री दयाशंकर सिंह के अखिलेश यादव पर हमले के जवाब में सपा ने अगली सरकार बनाने का दावा दोहराया।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा माफियाओं की ज़मीनों पर गरीबों के लिए आवास बनाए जाने के बयान पर 16 अक्टूबर 2026 को विपक्षी नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (सपा) दोनों ने सरकार पर 'जुमलेबाजी' का आरोप लगाते हुए ज़मीनी हकीकत पर सवाल उठाए।

कांग्रेस का आरोप: गरीबों को दिए आवास फिर छीने गए

कांग्रेस नेता सुरेंद्र राजपूत ने कहा कि जिन गरीबों को आवास देने की बात की जाती है, उन्हीं के घर लखनऊ में छीने जा रहे हैं। उन्होंने विशेष रूप से लखनऊ में चिड़ियाघर के पीछे स्थित उस ज़मीन का उल्लेख किया जिसे कथित तौर पर माफिया मुख्तार अंसारी की बताकर वहाँ बने आवास गरीबों को दिए गए और बाद में वापस ले लिए गए। राजपूत के अनुसार, 'वह ज़मीन जल निगम की निकली।' उन्होंने कहा, 'ये जुमलेबाजी नहीं, कानूनी काम करना चाहिए।'

नाम बदलने के मुद्दे पर कटाक्ष

'कसारी मसारी' का नाम बदलने को लेकर सीएम योगी के बयान और अखिलेश यादव की प्रतिक्रिया के संदर्भ में सुरेंद्र राजपूत ने कहा, 'जाकी रही भावना जैसी, प्रभु मूरत देखी तिन तैसी। मुख्यमंत्री नाम बदलने के लिए ही जाने जाते हैं। नाम बदलने से काम बदल जाएं तो क्या ही बात है।' यह टिप्पणी योगी सरकार की उस नीति पर सीधा व्यंग्य है जिसके तहत उत्तर प्रदेश में कई स्थानों के नाम बदले गए हैं।

राहुल गांधी पर तंज और पलटवार

सीएम योगी की ओर से कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर कसे गए तंज पर सुरेंद्र राजपूत ने पलटवार करते हुए कहा कि जवाहरलाल नेहरू के साथ स्वतंत्रता संग्राम में कई लोग जेल गए थे, लेकिन उनमें 'एक भी संघी जेल नहीं गया था।' उन्होंने कहा, 'भाजपा (भारतीय जनता पार्टी) का एक भी नेता जेल नहीं गया था।' यह बयान ऐतिहासिक स्वतंत्रता संग्राम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की भूमिका पर कांग्रेस के पुराने रुख की पुनरावृत्ति है।

सपा का सीएम की भाषा पर एतराज़

समाजवादी पार्टी (सपा) के नेता आशुतोष वर्मा ने मुख्यमंत्री की भाषा-शैली पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा, 'मुख्यमंत्री की भाषा शालीनता वाली होनी चाहिए, ऐसी जिससे युवा प्रेरणा लें। लेकिन हमारे मुख्यमंत्री की ओर से 'बम' की बातें की जाती हैं। कहते हैं मिट्टी में मिला देंगे — ये किस मुख्यमंत्री की भाषा होती है? ये भारत और प्रदेश का भविष्य नहीं हो सकते।' वर्मा ने यह भी कहा कि जिनका इतिहास नहीं होता, उन्हें दूसरों के इतिहास पर बात नहीं करनी चाहिए।

मंत्री पर सपा का पलटवार

यूपी सरकार में मंत्री दयाशंकर सिंह द्वारा अखिलेश यादव पर निशाना साधे जाने पर आशुतोष वर्मा ने तंज कसते हुए कहा, 'उन्हें पहले खुद विधायक बनने की सोचनी चाहिए। सपा की सरकार आ रही है, हम देख लेंगे।' यह बयान आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर सपा के आत्मविश्वास का संकेत माना जा रहा है।

यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब उत्तर प्रदेश में माफिया-विरोधी अभियान और नामकरण की राजनीति दोनों चर्चा के केंद्र में हैं। आने वाले दिनों में सत्तारूढ़ और विपक्षी दलों के बीच यह वाकयुद्ध और तेज़ होने के आसार हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उसी गरीब तबके के साथ अन्याय है जिसके नाम पर अभियान चलाया जाता है। दूसरी ओर, विपक्ष का प्रतिरोध भी पूरी तरह नैतिक धरातल पर नहीं खड़ा है — सपा और कांग्रेस दोनों पर माफिया-संरक्षण के आरोप खुद उनके कार्यकाल में लगते रहे हैं। असली सवाल यह है कि छीने गए आवासों की जाँच कौन करेगा और कब।
RashtraPress
16 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीएम योगी का माफिया-जमीन पर आवास बनाने का ऐलान क्या है?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घोषणा की है कि माफियाओं से ज़ब्त की गई ज़मीनों पर गरीबों के लिए आवास बनाए जाएंगे। यह बयान उनके माफिया-विरोधी अभियान की कड़ी में आया है, जिसके तहत उत्तर प्रदेश में कई संपत्तियाँ कुर्क की गई हैं।
कांग्रेस ने लखनऊ आवास विवाद पर क्या आरोप लगाए?
कांग्रेस नेता सुरेंद्र राजपूत ने आरोप लगाया कि लखनऊ के चिड़ियाघर के पीछे मुख्तार अंसारी की कथित ज़मीन पर बने आवास गरीबों को देने के बाद वापस छीन लिए गए। साथ ही उन्होंने दावा किया कि वह ज़मीन वास्तव में जल निगम की थी, माफिया की नहीं।
'कसारी मसारी' नाम बदलने के विवाद पर विपक्ष की क्या राय है?
कांग्रेस नेता सुरेंद्र राजपूत ने कहा कि योगी सरकार नाम बदलने के लिए जानी जाती है और 'नाम बदलने से काम बदल जाएं तो क्या ही बात है' — यानी नामकरण से ज़मीनी बदलाव नहीं आता। यह उत्तर प्रदेश में अनेक स्थानों के नाम बदले जाने की नीति पर सीधा व्यंग्य है।
सपा ने सीएम योगी की भाषा पर क्या आपत्ति जताई?
सपा नेता आशुतोष वर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री को ऐसी भाषा बोलनी चाहिए जिससे युवा प्रेरणा लें। उन्होंने 'बम' और 'मिट्टी में मिला देंगे' जैसे शब्दों को मुख्यमंत्री के पद के लिए अनुचित बताया।
मंत्री दयाशंकर सिंह और सपा के बीच विवाद क्या है?
यूपी सरकार के मंत्री दयाशंकर सिंह ने अखिलेश यादव पर निशाना साधा, जिसके जवाब में सपा नेता आशुतोष वर्मा ने कहा कि उन्हें पहले विधायक बनने की सोचनी चाहिए और सपा की सरकार आने पर सब देख लिया जाएगा।
राष्ट्र प्रेस
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