15 अक्टूबर 2026
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योगी का अखिलेश पर तंज: 'परिवार को प्रदेश मानने वालों की दुर्गति तय', प्रयागराज में माफिया ज़मीन पर गरीबों के आवास का ऐलान

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योगी का अखिलेश पर तंज: 'परिवार को प्रदेश मानने वालों की दुर्गति तय', प्रयागराज में माफिया ज़मीन पर गरीबों के आवास का ऐलान

सारांश

वाराणसी में योगी आदित्यनाथ का दोहरा वार — परिवारवाद पर अखिलेश यादव को लपेटा और प्रयागराज में माफिया से छीनी ज़मीन पर गरीबों के लिए बहुमंजिला घरों का ऐलान किया। स्वच्छता कर्मियों को ₹16,000 न्यूनतम मानदेय की गारंटी — 2027 चुनावों से पहले समाज के दो वर्गों को साधने की कोशिश।

मुख्य बातें

सीएम योगी आदित्यनाथ ने 15 अक्टूबर 2026 को वाराणसी में परिवारवाद पर तंज कसते हुए अखिलेश यादव पर परोक्ष निशाना साधा।
प्रयागराज में माफिया से मुक्त कराई गई ज़मीन पर गरीबों, वंचितों और दलितों के लिए बहुमंजिला आवासीय परिसर बनाए जाएंगे।
उत्तर प्रदेश आउटसोर्स कॉरपोरेशन के ज़रिये स्वच्छता कर्मियों को न्यूनतम ₹16,000 मासिक मानदेय की व्यवस्था की गई है।
मानदेय में कटौती करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश; ईएसआई, पीएफ और सुरक्षा बीमा का लाभ भी मिलेगा।
मुख्यमंत्री ने प्रयागराज महाकुंभ में 66 करोड़ श्रद्धालुओं के बावजूद स्वच्छता की सफलता का श्रेय स्वच्छता कर्मियों को दिया।
नीलकंठ तिवारी के 76 दिवसीय वार्ड प्रवास अभियान को अन्य जनप्रतिनिधियों के लिए प्रेरणादायक बताया।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 15 अक्टूबर 2026 को वाराणसी में एक कार्यक्रम के दौरान समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव पर परोक्ष निशाना साधते हुए कहा कि जो नेता अपने परिवार को ही समाज और प्रदेश मान बैठते हैं, उनकी राजनीतिक दुर्गति तय है। साथ ही उन्होंने घोषणा की कि प्रयागराज में माफिया से मुक्त कराई गई ज़मीन पर गरीबों, वंचितों और दलितों के लिए बहुमंजिला आवासीय परिसरों का निर्माण शुरू किया जाएगा।

परिवारवाद पर तीखा प्रहार

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जब जनप्रतिनिधि दोपहर 12 बजे सोकर उठे, नेतृत्व भी 12 बजे सोकर उठे, अपने परिवार में मस्त रहे और परिवार को ही समाज व प्रदेश मान ले — तो दुर्गति होनी ही है। उनका यह तंज सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की तरफ स्पष्ट संकेत था। उन्होंने यह भी कहा कि जो समाज, प्रदेश और देश को अपना परिवार मानते हैं, वही वास्तविक परिवर्तन ला सकते हैं।

योगी ने उन जनप्रतिनिधियों पर भी निशाना साधा जो एक बार चुने जाने के बाद लखनऊ में ही पड़े रहते हैं और अपने क्षेत्र में दोबारा नहीं जाते। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधि की असली ज़िम्मेदारी जनता के बीच रहकर उसकी समस्याओं का समाधान करना है।

माफिया ज़मीन पर गरीबों के आवास

मुख्यमंत्री ने एलान किया कि माफिया की जगह अब सिर्फ मिट्टी में है। प्रयागराज में माफिया के कब्ज़े से मुक्त कराई गई ज़मीन पर गरीबों, वंचितों और दलितों के लिए बहुमंजिला आवासीय इमारतों के निर्माण का शुभारंभ किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जिन ज़मीनों पर कभी माफिया का राज था, वहाँ अब गरीबों की हवेलियाँ बनेंगी। यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब उत्तर प्रदेश सरकार अपने बुलडोज़र अभियान को नीतिगत उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत करती रही है।

स्वच्छता कर्मियों के मानदेय पर सख्ती

योगी ने स्वच्छता कर्मियों के अधिकारों को लेकर भी कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि पहले इन कर्मियों से काम लेने के बाद मानदेय में कटौती कर दी जाती थी और कई बार पूरा पैसा भी नहीं मिलता था। अब ऐसी मनमानी नहीं चलेगी — मानदेय में कटौती करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।

उत्तर प्रदेश आउटसोर्स कॉरपोरेशन के माध्यम से स्वच्छता कर्मियों को न्यूनतम ₹16,000 मासिक मानदेय देने की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा उन्हें ईएसआई के तहत अस्पतालों में उपचार, सुरक्षा बीमा और पीएफ का लाभ भी मिलेगा। दुर्घटना में मृत्यु होने पर परिवार को आर्थिक सहायता दी जाएगी और पीएफ की व्यवस्था से सेवानिवृत्ति के बाद कर्मियों के पास अपनी पूंजी होगी।

स्वच्छता मित्र सम्मान समारोह में उपस्थिति

मुख्यमंत्री वाराणसी दक्षिणी विधानसभा क्षेत्र के विधायक डॉ. नीलकंठ तिवारी के 76 दिवसीय वार्ड प्रवास अभियान के समापन एवं स्वच्छता मित्र सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने इस अभियान के चौथे संस्करण की सराहना करते हुए इसे अन्य जनप्रतिनिधियों के लिए प्रेरणादायक बताया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने दस स्वच्छता कर्मियों को अंगवस्त्र पहनाकर और बैग भेंटकर सम्मानित किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वच्छता कर्मी तब सड़कों और मोहल्लों की सफाई करते हैं जब अधिकांश लोग सो रहे होते हैं — सर्दी, गर्मी, बरसात और त्योहारों में भी। प्रयागराज महाकुंभ में 66 करोड़ श्रद्धालुओं के आगमन के बावजूद स्वच्छता की सराहना हुई, जिसका श्रेय उन्होंने इन्हीं कर्मियों को दिया।

काशी के विकास का बखान

योगी ने कहा कि 2014 से पहले काशी की गलियों में गंदगी, सड़कों पर जाम और बिजली का संकट आम था। भू-माफिया गरीबों और व्यापारियों की ज़मीनों पर कब्ज़ा कर भय का माहौल बनाते थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में काशी का कायाकल्प हुआ है और यह अपनी आध्यात्मिक-सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करते हुए नई आभा के साथ आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि विकास कार्य सरकार कराती है, लेकिन उनके संरक्षण की ज़िम्मेदारी जागरूक समाज की है। आने वाले दिनों में विपक्ष इस नए हमले का जवाब देगा या नहीं, यह देखना होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 मानदेय की व्यवस्था ज़रूरी कदम है, लेकिन यह देखना होगा कि ज़मीनी स्तर पर कटौती रोकने का तंत्र वाकई काम करता है या सिर्फ घोषणाओं तक सीमित रहता है।
RashtraPress
15 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीएम योगी ने अखिलेश यादव पर क्या तंज कसा?
सीएम योगी ने कहा कि जो नेता अपने परिवार को ही समाज और प्रदेश मान लेते हैं तथा दोपहर 12 बजे सोकर उठते हैं, उनकी दुर्गति तय है। यह टिप्पणी सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पर परोक्ष हमले के रूप में देखी जा रही है।
प्रयागराज में माफिया ज़मीन पर क्या होगा?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घोषणा की कि प्रयागराज में माफिया के कब्ज़े से मुक्त कराई गई ज़मीन पर गरीबों, वंचितों और दलितों के लिए बहुमंजिला आवासीय इमारतों का निर्माण शुरू किया जाएगा। इसे सरकार की एंटी-माफिया नीति की अगली कड़ी बताया जा रहा है।
उत्तर प्रदेश में स्वच्छता कर्मियों को कितना मानदेय मिलेगा?
उत्तर प्रदेश आउटसोर्स कॉरपोरेशन के माध्यम से स्वच्छता कर्मियों को न्यूनतम ₹16,000 मासिक मानदेय देने की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा उन्हें ईएसआई, पीएफ, सुरक्षा बीमा और दुर्घटना में मृत्यु पर परिवार को आर्थिक सहायता का लाभ भी मिलेगा।
योगी आदित्यनाथ वाराणसी में किस कार्यक्रम में शामिल हुए?
सीएम योगी वाराणसी दक्षिणी विधानसभा क्षेत्र के विधायक डॉ. नीलकंठ तिवारी के 76 दिवसीय वार्ड प्रवास अभियान के समापन एवं स्वच्छता मित्र सम्मान समारोह में शामिल हुए। उन्होंने इस अभियान के चौथे संस्करण की सराहना की और दस स्वच्छता कर्मियों को सम्मानित किया।
प्रयागराज महाकुंभ में स्वच्छता को लेकर योगी ने क्या कहा?
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रयागराज महाकुंभ में 66 करोड़ श्रद्धालुओं के आगमन के बावजूद स्वच्छता की व्यापक प्रशंसा हुई। इसका श्रेय उन्होंने स्वच्छता कर्मियों की अथक मेहनत को दिया और उनकी तुलना 'नींव के उस पत्थर' से की जो दिखाई नहीं देता लेकिन पूरी इमारत उसी पर टिकी होती है।
राष्ट्र प्रेस
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