26 अक्टूबर 2026
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अखिलेश यादव का योगी पर तीखा पलटवार: 'साधु नहीं, CM की कुर्सी चाहिए', SP में भाजपा-बसपा के कई नेता शामिल

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अखिलेश यादव का योगी पर तीखा पलटवार: 'साधु नहीं, CM की कुर्सी चाहिए', SP में भाजपा-बसपा के कई नेता शामिल

सारांश

योगी के साधु-सत्ता बयान का अखिलेश ने सीधा जवाब दिया — 'CM की कुर्सी चाहिए।' 2027 चुनाव से पहले भाजपा के दो पूर्व विधायक, पूर्व IAS और बसपा नेता सहित कई दलों के नेताओं ने सपा का दामन थामा। पीडीए राजनीति को धार देने की कोशिश साफ दिखती है।

मुख्य बातें

अखिलेश यादव ने 26 अक्टूबर 2026 को लखनऊ पार्टी कार्यालय में सदस्यता कार्यक्रम में योगी आदित्यनाथ के साधु-सत्ता बयान पर तीखा पलटवार किया।
भाजपा के पूर्व विधायक सिनोद शाक्य (दातागंज) और कुशाग्र सागर (बिसौली), पूर्व IAS राम बहादुर पासी , भाजपा नेता चंद्र कुमार मिश्र और बसपा नेता दारा सिंह प्रजापति ने सपा की सदस्यता ली।
अखिलेश ने मतदाता सूची में 'सुनीता पत्नी राजेश' नाम से 2,000 से अधिक कथित फर्जी प्रविष्टियों का आरोप लगाया और वोटर ID को आधार से जोड़ने की माँग की।
सपा सरकार बनने पर आउटसोर्सिंग समाप्त, संविदा सफाई कर्मचारियों के लिए योजनाएँ और वाल्मीकि जयंती पर अवकाश का ऐलान किया।
2027 विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए बूथ स्तर पर संगठन मजबूत करने और गठबंधन राजनीति पर जोर दिया।

समाजवादी पार्टी (SP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 को लखनऊ स्थित पार्टी कार्यालय में विभिन्न दलों से आए नेताओं को सदस्यता दिलाई और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साधु-सत्ता वाले बयान पर सीधा पलटवार किया। अखिलेश ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'मैं कोई साधु-संत थोड़ी हूं, जो जंगलों या मठों में जाऊंगा। हमें तो सत्ता और मुख्यमंत्री की कुर्सी चाहिए, ताकि हम प्रदेश का विकास कर सकें।' इस दौरान भाजपा के दो पूर्व विधायकों, एक पूर्व आईएएस अधिकारी, एक भाजपा नेता और बहुजन समाज पार्टी (BSP) से जुड़े नेता सहित कई दलों के नेताओं ने सपा की सदस्यता ग्रहण की।

योगी के बयान पर अखिलेश का सीधा जवाब

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में कहा था कि साधु-संतों का लक्ष्य सत्ता या कुर्सी नहीं, बल्कि लोक कल्याण और सेवा होता है। उन्होंने सत्ता की लालसा को परिवारवाद और सत्ता के मोह से जोड़ते हुए विपक्ष पर निशाना साधा था। अखिलेश ने इसी बयान का सीधा जवाब देते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी का उद्देश्य सरकार बनाकर जनता की सेवा और प्रदेश का विकास करना है — न कि वैराग्य।

यह बयान ऐसे समय में आया है जब 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ दोनों दलों में जोर पकड़ रही हैं और राजनीतिक खेमेबाजी तेज हो गई है।

पार्टी में कौन-कौन शामिल हुए

बदायूं की दातागंज सीट से भाजपा के पूर्व विधायक सिनोद शाक्य और बिसौली के पूर्व विधायक कुशाग्र सागर ने सपा की सदस्यता ली। भाजपा नेता चंद्र कुमार मिश्र उर्फ बापू भी पार्टी में शामिल हुए। पूर्व आईएएस अधिकारी राम बहादुर पासी — जो 2015 में सेवानिवृत्त हुए थे, जब अखिलेश यादव मुख्यमंत्री थे — ने भी सपा का दामन थामा। पासी पहले बहुजन समाज पार्टी से जुड़े रहे, फिर नागरिक एकता पार्टी बनाई और 2022 में भाजपा में शामिल हुए थे।

बसपा से सपा में आए दारा सिंह प्रजापति ने कहा कि वह किसी टिकट या पद के लिए नहीं, बल्कि अखिलेश यादव को मुख्यमंत्री बनाने के लक्ष्य से पार्टी में आए हैं। अमेरिका से भारत लौटीं सबीना परवीन ने भी सपा की सदस्यता ली और कुंदरकी विधानसभा क्षेत्र से बूथ स्तर पर काम करने और पार्टी की दावेदारी पेश करने की मंशा जाहिर की।

पीडीए राजनीति और संगठन विस्तार

अखिलेश यादव ने नए नेताओं के जुड़ने को अपनी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक (PDA) राजनीति को मजबूती मिलने से जोड़ा। उन्होंने कहा कि इन जॉइनिंग से प्रदेश के पूरब से पश्चिम तक संदेश गया है। दारा सिंह प्रजापति का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, 'जिनके साथ दारा होंगे, अखाड़ा वही जीतेंगे।' राम बहादुर पासी की सराहना करते हुए कहा, 'जिनके नाम में राम जुड़ा हो, उनके बन जाएंगे सब काम।'

सपा के वरिष्ठ नेता शिवपाल सिंह यादव ने कहा कि दूसरे दलों से नेताओं के आने का सिलसिला जारी रहेगा। पूर्व सांसद सलीम शेरवानी ने बदायूं की सभी सीटों पर सपा की जीत का दावा किया।

मतदाता सूची और कानून-व्यवस्था पर सवाल

अखिलेश यादव ने मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर भाजपा और चुनाव आयोग (ECI) पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि 'सुनीता पत्नी राजेश' नाम से प्रदेश में 2,000 से अधिक प्रविष्टियाँ मिली हैं। उन्होंने मतदाता पहचान पत्र को आधार से जोड़ने और बूथ स्तर पर बायोमेट्रिक व्यवस्था लागू करने की माँग की।

कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए उन्होंने लखनऊ में हत्या और गोरखपुर जेल में हुई संदिग्ध मौतों का उल्लेख किया और राज्य सरकार से जवाबदेही माँगी। टीजीटी भर्ती में आरक्षण से जुड़ी कथित अनियमितताओं का मुद्दा भी उठाया।

सरकार बनी तो क्या होगा: अखिलेश के वादे

सपा अध्यक्ष ने घोषणा की कि पार्टी की सरकार बनने पर आउटसोर्सिंग व्यवस्था समाप्त की जाएगी, संविदा सफाई कर्मचारियों के हित में विशेष योजनाएँ लाई जाएंगी, और वाल्मीकि समाज के बेघर लोगों को आवास उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने महर्षि वाल्मीकि जयंती पर अवकाश देने का ऐलान किया और बड़े पैमाने पर साइकिलें वितरित करने तथा वकीलों के लिए चैंबर बनवाने की बात कही। उन्होंने अरुणाचल प्रदेश में चीन की कथित घुसपैठ के मुद्दे पर भी केंद्र सरकार को घेरा और आरोप लगाया कि सीमा सुरक्षा के मुद्दों को राजनीतिक ज़रूरतों के अनुसार उठाया जाता है।

2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सपा की यह सदस्यता अभियान और अखिलेश का आक्रामक तेवर स्पष्ट संकेत देता है कि पार्टी गठबंधन राजनीति और जनाधार विस्तार को रणनीतिक प्राथमिकता दे रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

CM चाहिए' वाला बयान सुनने में आक्रामक लगता है, लेकिन असल रणनीति सदस्यता अभियान में छुपी है — भाजपा के दो पूर्व विधायकों और एक पूर्व IAS को जोड़ना दिखाता है कि सपा 2027 से पहले सत्ता-विरोधी लहर को संस्थागत रूप देने की कोशिश कर रही है। पीडीए फ्रेमवर्क के तहत दलित (पासी), पिछड़ा (प्रजापति) और अल्पसंख्यक (परवीन) — तीनों को एक ही मंच पर लाना महज संयोग नहीं, यह सोची-समझी सामाजिक इंजीनियरिंग है। लेकिन असली सवाल यह है कि दूसरे दलों से आए नेताओं को लेकर पार्टी के पुराने कार्यकर्ताओं में असंतोष का इतिहास रहा है — शिवपाल यादव का 'निराश नहीं होने देंगे' वाला आश्वासन इसी असंतोष की आहट है। मतदाता सूची पर उठाए सवाल चुनावी कथा-निर्माण का हिस्सा हैं, लेकिन जब तक सपा इन आरोपों को ठोस साक्ष्य के साथ चुनाव आयोग के सामने नहीं रखती, ये केवल राजनीतिक बयानबाजी बनकर रह जाएँगे।
RashtraPress
26 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अखिलेश यादव ने योगी आदित्यनाथ के किस बयान पर पलटवार किया?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि साधु-संतों का लक्ष्य सत्ता या कुर्सी नहीं, बल्कि लोक कल्याण होता है और उन्होंने सत्ता की लालसा को परिवारवाद से जोड़ते हुए विपक्ष पर निशाना साधा था। इसी के जवाब में अखिलेश ने 26 अक्टूबर को लखनऊ में कहा कि वह मुख्यमंत्री की कुर्सी चाहते हैं ताकि प्रदेश का विकास कर सकें।
26 अक्टूबर को सपा में कौन-कौन से नेता शामिल हुए?
भाजपा के पूर्व विधायक सिनोद शाक्य (दातागंज) और कुशाग्र सागर (बिसौली), पूर्व IAS अधिकारी राम बहादुर पासी, भाजपा नेता चंद्र कुमार मिश्र उर्फ बापू, बसपा नेता दारा सिंह प्रजापति और अमेरिका से लौटीं सबीना परवीन सहित कई नेताओं ने सपा की सदस्यता ली।
अखिलेश यादव ने मतदाता सूची पर क्या आरोप लगाए?
अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि 'सुनीता पत्नी राजेश' नाम से उत्तर प्रदेश में 2,000 से अधिक प्रविष्टियाँ मिली हैं और भाजपा चुनावी लाभ के लिए मतदाता सूची में गड़बड़ियाँ कर रही है। उन्होंने वोटर ID को आधार से जोड़ने और बूथ स्तर पर बायोमेट्रिक व्यवस्था लागू करने की माँग की।
सपा सरकार बनने पर अखिलेश यादव ने कौन-से वादे किए?
अखिलेश यादव ने वादा किया कि सपा सरकार बनने पर आउटसोर्सिंग व्यवस्था समाप्त होगी, संविदा सफाई कर्मचारियों के लिए विशेष योजनाएँ लाई जाएंगी, वाल्मीकि समाज के बेघर लोगों को आवास मिलेगा, महर्षि वाल्मीकि जयंती पर अवकाश रहेगा और बड़े पैमाने पर साइकिलें वितरित की जाएंगी।
2027 उत्तर प्रदेश चुनाव के लिए सपा की रणनीति क्या है?
सपा पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक (PDA) के गठजोड़ पर केंद्रित है और विभिन्न दलों के नेताओं को जोड़कर जनाधार विस्तार कर रही है। अखिलेश यादव ने विपक्षी सहयोगियों के साथ मिलकर काम करने और बूथ स्तर पर संगठन मजबूत करने पर जोर दिया है।
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