नेताजी पर विवादित बयान: BJP सांसद नागेंद्र रे ने माफी माँगी, 'बंग विभूषण' सम्मान भी छिना
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राज्यसभा सांसद नागेंद्र रे ने 14 अगस्त 2026 को स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस के बारे में दिए गए विवादित बयानों पर सार्वजनिक माफी माँगी है। रे ने सोशल मीडिया पर जारी बयान में कहा कि यदि नेताजी जैसे राष्ट्रीय नायक के बारे में उनके 'बिना सोचे-समझे कहे गए' शब्दों से किसी की भावना को ठेस पहुँची है, तो उन्हें खेद है।
विवाद की जड़ क्या है
रे ने हाल ही में दावा किया था कि भारत की स्वतंत्रता संग्राम में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की कोई भूमिका नहीं थी। इसके साथ ही उन्होंने आजाद हिंद फौज के कथित गलत इस्तेमाल का आरोप भी बोस पर लगाया था। आलोचकों का कहना है कि ये बयान संदिग्ध और असत्यापित दस्तावेजों पर आधारित थे, जिससे देशभर में तीखी प्रतिक्रिया हुई।
पश्चिम बंगाल सरकार की कार्रवाई
पश्चिम बंगाल सरकार ने इस विवाद के बीच नागेंद्र रे को इस वर्ष फरवरी में पिछली तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार द्वारा प्रदान किया गया 'बंग विभूषण' सम्मान वापस लेकर रद्द कर दिया। गौरतलब है कि 'बंग विभूषण' राज्य का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है, जिसे 2011 में तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पद संभालने के तुरंत बाद पश्चिम बंगाल के लिए उत्कृष्ट योगदान को मान्यता देने के उद्देश्य से शुरू किया था।
एफआईआर और पुलिस जाँच
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, कूचबिहार जिला पुलिस ने 'फॉरवर्ड ब्लॉक' के एक समर्थक की शिकायत पर 68 वर्षीय BJP सांसद के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर मामले की जाँच शुरू कर दी है। यह ऐसे समय में आया है जब रे पहले से ही अपने कई विवादित बयानों के कारण सार्वजनिक आलोचना का सामना कर रहे हैं।
विवादों का पुराना इतिहास
नेताजी वाले बयान से पहले भी, रे ने संसद के हाल ही में संपन्न शीतकालीन सत्र के दौरान एक पत्रकार से कहा था कि उनके 'महाराज' दर्जे की वजह से उन्हें राज्यसभा में सीट मिली है। पत्रकार ने उन्हें याद दिलाया था कि लोकतंत्र के मंदिर में शाही दर्जे का दावा करना उचित नहीं लगता। संसदीय लोकतंत्र के 75 वर्ष से अधिक बीत जाने के बाद भी उनका मानना है कि संसद का उच्च सदन 'राजाओं और सामंतों' के लिए है।
राजनीतिक पृष्ठभूमि और प्रभाव क्षेत्र
'ग्रेटर कूचबिहार पीपल्स एसोसिएशन' (GCPA) के एक गुट के नेता होने के नाते, रे का उत्तरी बंगाल में राजबोंगशी समुदाय के एक हिस्से में काफी प्रभाव है। उनका संगठन 'ग्रेटर कूचबिहार' नाम से एक अलग राज्य की माँग करने वाले संगठनों में शामिल है। इस प्रस्तावित राज्य में उत्तरी बंगाल के कूचबिहार, जलपाईगुड़ी, दार्जिलिंग, मालदा और मुर्शिदाबाद जिलों के साथ-साथ असम के कोकराझार, बोंगाईगाँव और धुबरी जिले भी शामिल हैं। अब जब माफी और कानूनी कार्रवाई दोनों सामने हैं, तो यह देखना बाकी है कि रे का राजनीतिक भविष्य किस दिशा में जाता है।