क्या नई दिल्ली में 14 से 16 जनवरी तक काउंटर टेररिज्म पर विशेषज्ञ कार्य समूह की बैठक होने जा रही है?
सारांश
Key Takeaways
नई दिल्ली, 13 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। 16वीं आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक-प्लस (एडीएमएम-प्लस) के तहत काउंटर टेररिज्म पर विशेषज्ञ कार्य समूह (ईडब्लूजी) की बैठक आयोजित की जाएगी। यह बैठक और टेबल टॉप एक्सरसाइज के लिए अंतिम योजना सम्मेलन 14 से 16 जनवरी तक नई दिल्ली में होने वाला है। इस बैठक की सह-अध्यक्षता भारत और मलेशिया द्वारा की जाएगी।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस महत्वपूर्ण बैठक में आसियान के 11 सदस्य देशों की भागीदारी होगी। इसमें ब्रुनेई, कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओ पीडीआर, मलेशिया, म्यांमार, फिलीपींस, वियतनाम, सिंगापुर, थाईलैंड और तिमोर लेस्ते के प्रतिनिधिमंडल शामिल होंगे। इसके अतिरिक्त, 7 संवाद साझेदार देश भी इसमें भाग लेंगे।
इनमें ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, कोरिया गणराज्य, जापान, चीन, अमेरिका और रूस के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे। यह वर्ष 2024 से 2027 तक चलने वाले चक्र के अंतर्गत तीसरी बैठक होगी। असल में, एडीएमएम-प्लस भागीदार देशों के रक्षा प्रतिष्ठानों के बीच व्यावहारिक सहयोग के लिए एक महत्वपूर्ण मंच है।
वर्तमान में यह मंच सात प्रमुख क्षेत्रों पर केंद्रित है। इनमें समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद-रोधी कार्रवाई, मानवता सहायता एवं आपदा राहत, शांति स्थापना अभियान, सैन्य चिकित्सा, मानवता खदान कार्रवाई और साइबर सुरक्षा शामिल हैं। इन क्षेत्रों में सहयोग को सुगम बनाने के लिए विशेषज्ञ कार्य समूह का गठन किया गया है। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य पिछली बैठक के बाद हुई प्रगति की समीक्षा करना और तीन-वर्षीय कार्य योजना के अंतर्गत जारी और प्रस्तावित गतिविधियों पर चर्चा करना है।
यह कदम इस उद्देश्य से उठाया जा रहा है कि एडीएमएम-प्लस ढांचे के तहत आतंकवाद-रोधी क्षेत्र में भारत की बहुपक्षीय सहयोग क्षमता को और मजबूत किया जाए।
रक्षा मंत्रालय ने बताया कि 14 जनवरी को टेबल टॉप एक्सरसाइज के लिए अंतिम योजना सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा। आगामी विशेषज्ञ कार्य समूह की बैठक के दौरान 2026 में मलेशिया टेबल टॉप एक्सरसाइज का आयोजन करेगा, जबकि 2027 में भारत फील्ड ट्रेनिंग एक्सरसाइज का आयोजन करेगा।
सह-अध्यक्षों की भूमिका में तीन-वर्षीय चक्र के आरंभ में विशेषज्ञ कार्य समूह के लिए उद्देश्यों, नीतिगत दिशा-निर्देश और मार्गदर्शन तय करना शामिल है। साथ ही, प्रति वर्ष न्यूनतम दो विशेषज्ञ कार्य समूह बैठकों का आयोजन और तीसरे वर्ष में अभ्यास आयोजित कर व्यावहारिक सहयोग में हुई प्रगति का परीक्षण करना भी इनकी भूमिका में शामिल है।