सर्बिया के प्रधानमंत्री जिन्जिच की हत्या: लोकतांत्रिक सुधारों का एक बड़ा झटका
सारांश
Key Takeaways
- जिन्जिच की हत्या ने सर्बिया में आपातकाल जैसी स्थिति उत्पन्न की।
- उन्हें लोकतांत्रिक सुधारों का प्रमुख चेहरा माना जाता था।
- हत्या के पीछे संगठित अपराध गिरोहों का हाथ था।
- सरकार ने "ऑपरेशन साबर" चलाकर कार्रवाई की।
- इस घटना ने यूरोप में लोकतंत्र को एक बड़ा झटका दिया।
नई दिल्ली, ११ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। "यदि कोई यह सोचता है कि मुझे हटाकर कानून और सुधारों को रोका जा सकता है, तो यह एक बड़ा भ्रम है..." यह बयान उस प्रधानमंत्री का था जिसे लोकतांत्रिक सुधारों का अग्रदूत माना जाता था। हत्या के पहले प्रयास के बाद इस लोकप्रिय पीएम ने साहस के साथ यह बात कही थी।
१२ मार्च २००३ का वह दिन था जब यूरोप की राजनीति को हिलाकर रख देने वाली एक गंभीर घटना घटी। जोरान जिन्जिच, जो उस समय सर्बिया के प्रधानमंत्री थे, की राजधानी बेलग्रेड में गोली मारकर हत्या कर दी गई।
जिन्जिच को बेलग्रेड में एक सरकारी भवन के बाहर एक स्नाइपर ने गोली मारी, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। इस हमले ने पूरे सर्बिया को झकझोर दिया, और देश में तुरंत आपातकाल जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई।
इससे पहले वे एक कथित हत्या के प्रयास से बाल-बाल बचे थे, जब एक लॉरी उनके काफिले के सामने आ गई थी। उन्होंने २१ फरवरी की घटना को एक "व्यर्थ प्रयास" बताया था, जिससे लोकतांत्रिक सुधारों को रोकने में सफलता नहीं मिली।
पीएम जिन्जिच सर्बिया में लोकतांत्रिक सुधारों के प्रमुख चेहरों में से थे। उन्होंने २००० में हुए जनआंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसके परिणामस्वरूप पूर्व राष्ट्रपति स्लोबोडान मिलोस्विक की सत्ता समाप्त हुई।
प्रधानमंत्री बनने के बाद जिन्जिच ने देश में राजनीतिक और आर्थिक सुधारों की शुरुआत की और पश्चिमी देशों के साथ संबंध सुधारने का प्रयास किया। उन्होंने मिलोशेविच को अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में भेजने का निर्णय भी लिया, जिसके चलते कई राष्ट्रवादी और आपराधिक गिरोह उनके विरोध में आ गए।
जिन्जिच की हत्या के पीछे संगठित अपराध गिरोहों का हाथ होने का संदेह था। जांच में पता चला कि इस साजिश में कुख्यात जेमुन अपराध गिरोह और पूर्व विशेष पुलिस इकाई के कुछ सदस्य शामिल थे।
हत्या के बाद सरकार ने “ऑपरेशन साबर” नाम से बड़े पैमाने पर अभियान चलाया, जिसमें हजारों लोगों को गिरफ्तार किया गया और संगठित अपराध के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई।
जिन्जिच की हत्या की विश्वभर में निंदा की गई। यूरोपीय देशों ने इसे सर्बिया के लोकतंत्र के लिए एक बड़ा झटका बताया।
हालांकि, इस घटना के बाद भी सर्बिया ने लोकतांत्रिक सुधारों की प्रक्रिया जारी रखी और धीरे-धीरे यूरोपीय संस्थाओं के साथ अपने संबंध मजबूत किए।