नम्मा मेट्रो के 15 साल: 6.7 किमी से 96.1 किमी तक का सफर, सीएम शिवकुमार ने जताया गर्व
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने 20 अक्टूबर 2026 को नम्मा मेट्रो की 15वीं वर्षगांठ पर कहा कि यह रेल नेटवर्क बेंगलुरु के करोड़ों नागरिकों की दैनिक जीवनरेखा बन चुका है। मात्र 6.7 किलोमीटर से शुरू हुई यह परियोजना आज 83 स्टेशनों के साथ 96.1 किलोमीटर में फैल चुकी है — एक ऐसी विस्तार-यात्रा जो भारत के किसी भी क्षेत्रीय शहरी मेट्रो की तुलना में उल्लेखनीय मानी जाती है।
15 वर्षों का सफर: मुख्य घटनाक्रम
20 अक्टूबर 2011 को नम्मा मेट्रो का पहला खंड बयप्पनहल्ली से एमजी रोड तक शुरू हुआ था। उस समय 6.7 किलोमीटर की यह छोटी-सी शुरुआत एक बड़े सपने की नींव थी। डेढ़ दशक के भीतर नेटवर्क ने 83 स्टेशनों को समेटते हुए 96.1 किलोमीटर का विस्तार हासिल किया — यानी मूल लंबाई से लगभग 14 गुना की वृद्धि।
गौरतलब है कि इस अवधि में शहर की आबादी और यातायात का दबाव भी तेज़ी से बढ़ा, जिससे मेट्रो का विस्तार न केवल सुविधाजनक बल्कि अनिवार्य भी हो गया।
सीएम शिवकुमार की प्रतिक्रिया
वर्षगांठ के अवसर पर जारी बयान में मुख्यमंत्री शिवकुमार ने कहा, 'जो एक नए सफर के रूप में शुरू हुआ था, वह आज बेंगलुरु की रोज़मर्रा की ज़िंदगी का अटूट हिस्सा बन गया है।' उन्होंने 15वीं वर्षगांठ पर उन लाखों यात्रियों को शुभकामनाएँ दीं जिनकी दैनिक यात्राओं से शहर की अर्थव्यवस्था चलती है।
शिवकुमार ने सरकार की प्राथमिकताएँ भी स्पष्ट कीं — सार्वजनिक परिवहन को और अधिक सुलभ बनाना, दैनिक आवागमन को सरल करना और पूरे शहर में कनेक्टिविटी को बेहतर करना। उन्होंने जोर देकर कहा कि आने वाली पीढ़ियों के लिए बेंगलुरु को बेहतर तरीके से जुड़ा रखना सरकार की जिम्मेदारी है।
येलो लाइन और फेज 2 की स्थिति
नेटवर्क विस्तार की कड़ी में येलो लाइन — आरवी रोड से बोम्मासंद्रा वाया इलेक्ट्रॉनिक सिटी — अगस्त 2025 में पूरी तरह चालू हो चुकी है। यह लाइन शहर के प्रमुख आईटी रोज़गार केंद्र को मेट्रो नेटवर्क से सीधे जोड़ती है, जिससे हज़ारों तकनीकी पेशेवरों का आवागमन आसान हुआ है।
सरकार का फ़िलहाल फोकस फेज 2 के शेष हिस्सों को पूरा करने पर है, जो शहर के बड़े रोज़गार केंद्रों को आपस में जोड़ेगा।
आम जनता पर असर
हर दिन लाखों बेंगलुरुवासी नम्मा मेट्रो से कार्यालय, शिक्षण संस्थान और व्यावसायिक केंद्रों तक पहुँचते हैं। बढ़ते ट्रैफिक जाम और पेट्रोल की बढ़ती कीमतों के दौर में मेट्रो ने न केवल समय की बचत की है, बल्कि वायु प्रदूषण कम करने में भी योगदान दिया है।
यह ऐसे समय में अहम है जब बेंगलुरु को लगातार देश के सर्वाधिक ट्रैफिक-जाम वाले शहरों में गिना जाता है। मेट्रो का विस्तार इस समस्या के दीर्घकालिक समाधान की दिशा में एक ठोस कदम माना जा रहा है।
भविष्य की योजनाएँ
बेंगलुरु मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के अनुमानों के अनुसार, मौजूदा 96.1 किलोमीटर का नेटवर्क 2026 के अंत तक 137.11 किलोमीटर और 2027 के अंत तक 175.55 किलोमीटर तक पहुँचने की उम्मीद है। फेज 2, फेज 3 और नए प्रस्तावित विस्तारों पर काम समानांतर रूप से जारी है।
यदि ये लक्ष्य समय पर पूरे होते हैं, तो बेंगलुरु मेट्रो अगले दो वर्षों में दिल्ली और मुंबई के बाद देश के सबसे बड़े मेट्रो नेटवर्कों में शामिल हो सकती है।