नाना पाटेकर के निधन पर खड़गे, राहुल और प्रियंका गांधी ने एक्स पर जताया गहरा दुख
सारांश
मुख्य बातें
हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के 75 वर्ष की आयु में निधन से बॉलीवुड और राजनीतिक जगत दोनों में शोक की लहर दौड़ गई। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा समेत अनेक नेताओं ने 8 अक्टूबर को एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी संवेदनाएँ व्यक्त कीं।
खड़गे, राहुल और प्रियंका ने क्या कहा
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने एक्स पर लिखा कि अभिनेता नाना पाटेकर के निधन से बहुत दुख हुआ। उन्होंने लिखा, 'भारतीय सिनेमा में उनके शानदार अभिनय, उनके विशाल और बहुमुखी योगदान तथा किसानों और वंचितों के प्रति उनकी संवेदना को हमेशा याद किया जाएगा। उनके परिवार, दोस्तों और प्रशंसकों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं।'
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने एक्स पर लिखा, 'प्रसिद्ध अभिनेता नाना पाटेकर के निधन का समाचार अत्यंत दुखद है। अपने अभिनय और किरदारों से उन्होंने भारतीय सिनेमा पर और दर्शकों के दिलों में एक अमिट छाप छोड़ी है। इस पीड़ा के समय में मेरी गहरी संवेदनाएं उनके शोकाकुल परिजनों, मित्रों और समर्थकों के साथ हैं।'
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी एक्स पर लिखा, 'भारतीय सिनेमा के लोकप्रिय अभिनेता नाना पाटेकर के आकस्मिक निधन का समाचार अत्यंत दुखद है। ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें। शोक-संतप्त परिजनों एवं प्रशंसकों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं।'
लगभग पाँच दशकों का स्वर्णिम करियर
नाना पाटेकर ने अपने करीब पाँच दशक लंबे करियर में भारतीय सिनेमा को कई यादगार और दमदार किरदार दिए। उनकी बहुमुखी प्रतिभा और संवाद-अदायगी की शैली ने उन्हें हिंदी फिल्म उद्योग में एक विशिष्ट पहचान दिलाई।
1990 में आई फिल्म 'राजू बन गया जेंटलमैन' में उन्होंने 'जय' नामक दार्शनिक और मार्गदर्शक की भूमिका निभाई, जिसके लिए उन्हें फिल्मफेयर पुरस्कार में सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता के लिए नामांकित किया गया था।
राष्ट्रीय पुरस्कार से लेकर फिल्मफेयर तक
1992 में प्रदर्शित फिल्म 'अंगार' में उन्होंने 'माजिद खान' नाम के खतरनाक और क्रूर किरदार को जीवंत किया, जिसके लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ खलनायक का फिल्मफेयर पुरस्कार प्राप्त हुआ। यह भूमिका उनके करियर की मील का पत्थर मानी जाती है।
1994 में आई फिल्म 'क्रांतिवीर' के लिए नाना पाटेकर को प्रतिष्ठित राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया — जो भारतीय सिनेमा में उनकी श्रेष्ठता की आधिकारिक मान्यता थी। गौरतलब है कि फिल्मफेयर खलनायक पुरस्कार और राष्ट्रीय सम्मान, दोनों हासिल करना उनकी अभिनय क्षमता की गहराई को दर्शाता है।
सिनेमा से परे सामाजिक योगदान
नाना पाटेकर सिर्फ परदे के नायक नहीं थे — उन्होंने किसानों और वंचित वर्गों के लिए सामाजिक कार्यों में भी उल्लेखनीय भूमिका निभाई, जिसका उल्लेख कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे ने विशेष रूप से किया। यह ऐसे समय में आया है जब सिनेमा जगत और समाज दोनों उनकी विरासत को नमन कर रहे हैं।
उनके निधन के साथ भारतीय सिनेमा ने एक ऐसा कलाकार खोया जिसने परदे पर हर किरदार को अपनी आत्मा से जिया — उनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनी रहेगी।