नाना पाटेकर के निधन पर राष्ट्रपति मुर्मु और उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने जताया शोक, बोले — भारतीय सिनेमा की अपूरणीय क्षति
सारांश
मुख्य बातें
दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के 8 अक्टूबर 2026 को 75 वर्ष की आयु में निधन पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने गहरा दुख व्यक्त किया है। दोनों संवैधानिक पदाधिकारियों ने उनके अभिनय की अतुलनीय विरासत और समाज सेवा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी।
राष्ट्रपति कार्यालय की भावभीनी श्रद्धांजलि
राष्ट्रपति कार्यालय ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी संवेदना साझा करते हुए लिखा, 'दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के निधन से गहरा दुख हुआ है। अपनी दमदार और दिल को छू लेने वाली अदाकारी से उन्होंने इंसानी अनुभवों की एक विस्तृत श्रृंखला को जीवंत किया। उन्होंने ऐसे किरदार निभाए जिन्होंने लोगों के दिलों और दिमाग पर गहरी छाप छोड़ी।'
राष्ट्रपति मुर्मु ने आगे कहा कि समाज सेवा के प्रति उनका समर्पण वंचितों के प्रति उनकी चिंता को दर्शाता था। उन्होंने इसे भारतीय सिनेमा के लिए एक बड़ी क्षति बताते हुए उनके परिवार और प्रशंसकों के प्रति गहरी संवेदनाएँ प्रकट कीं।
उपराष्ट्रपति ने बताया 'बहुमुखी और बेहद प्रतिभाशाली कलाकार'
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने एक्स पर अपनी पोस्ट में लिखा, 'एक बहुमुखी और बेहद प्रतिभाशाली कलाकार के तौर पर, उन्होंने अपने निभाए हर किरदार में अद्भुत गहराई, संवेदनशीलता और सच्चाई का समावेश किया। भारतीय सिनेमा में उनके अमूल्य योगदान को हमेशा याद किया जाएगा।'
राधाकृष्णन ने कहा कि नाना पाटेकर आने वाली पीढ़ियों के सिनेमा प्रेमियों को प्रेरित करते रहेंगे और हमेशा उनके दिलों में बसे रहेंगे। उन्होंने शोक की इस घड़ी में उनके परिवार, मित्रों और अनगिनत प्रशंसकों के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएँ व्यक्त कीं।
निधन की परिस्थितियाँ
जानकारी के अनुसार, गुरुवार की सुबह गोवा के डोना पाउला स्थित उनके निवास पर उन्हें बेहोशी की अवस्था में पाया गया। उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
गोवा के मणिपाल अस्पताल के ऑन्कोलॉजी प्रमुख डॉ. शेखर सालकर ने बताया, 'अभिनेता नाना पाटेकर को गुरुवार सुबह करीब 4:20 से 4:35 बजे के बीच मृत अवस्था में हमारे अस्पताल लाया गया था। हमारी टीम 4:18 बजे उनके घर पहुँच गई थी और वहीं से सीपीआर शुरू कर दिया था क्योंकि वे कोई प्रतिक्रिया नहीं दे रहे थे। सीपीआर देते हुए ही उन्हें अस्पताल लाया गया, लेकिन तब तक उनका निधन हो गया था।'
नाना पाटेकर का सिनेमाई सफर
नाना पाटेकर केवल अभिनेता नहीं, बल्कि एक कुशल लेखक, फिल्म निर्माता और निर्देशक भी थे। उन्होंने वर्ष 1978 में ड्रामा फिल्म 'गमन' से हिंदी सिनेमा में अपना सफर शुरू किया था। इसके बाद उन्होंने मराठी फिल्मों में भी अपनी अमिट छाप छोड़ी।
1989 में 'परिंदा' से उन्होंने हिंदी सिनेमा में एक यादगार वापसी की, जिसमें निभाए गए गैंगस्टर के किरदार ने उन्हें राष्ट्रीय पहचान दिलाई। वर्ष 1994 में 'प्रहार: द फाइनल अटैक' से उन्होंने निर्देशन की दुनिया में भी कदम रखा। उनके जाने से भारतीय सिनेमा एक ऐसे कलाकार को खो चुका है जिसकी रिक्तता भरना आसान नहीं होगा।