8 अक्टूबर 2026
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नाना पाटेकर के निधन पर राष्ट्रपति मुर्मु और उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने जताया शोक, बोले — भारतीय सिनेमा की अपूरणीय क्षति

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नाना पाटेकर के निधन पर राष्ट्रपति मुर्मु और उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने जताया शोक, बोले — भारतीय सिनेमा की अपूरणीय क्षति

सारांश

भारतीय सिनेमा के दिग्गज नाना पाटेकर का 75 वर्ष की आयु में गोवा में निधन हो गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने उनकी अद्वितीय अदाकारी और समाज सेवा को याद करते हुए इसे भारतीय सिनेमा की अपूरणीय क्षति बताया।

मुख्य बातें

दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का 8 अक्टूबर 2026 को 75 वर्ष की आयु में गोवा के डोना पाउला स्थित निवास पर निधन हुआ।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने एक्स पर पोस्ट के ज़रिए गहरी संवेदनाएँ व्यक्त कीं।
मणिपाल अस्पताल, गोवा की मेडिकल टीम सुबह 4:18 बजे उनके घर पहुँची; 4:20–4:35 बजे के बीच उन्हें मृत अवस्था में अस्पताल लाया गया।
नाना पाटेकर ने 1978 में 'गमन' से हिंदी सिनेमा में शुरुआत की; 1989 में 'परिंदा' से बड़ी पहचान मिली।
1994 में 'प्रहार: द फाइनल अटैक' से निर्देशन की दुनिया में कदम रखा।

दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के 8 अक्टूबर 2026 को 75 वर्ष की आयु में निधन पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने गहरा दुख व्यक्त किया है। दोनों संवैधानिक पदाधिकारियों ने उनके अभिनय की अतुलनीय विरासत और समाज सेवा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी।

राष्ट्रपति कार्यालय की भावभीनी श्रद्धांजलि

राष्ट्रपति कार्यालय ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी संवेदना साझा करते हुए लिखा, 'दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के निधन से गहरा दुख हुआ है। अपनी दमदार और दिल को छू लेने वाली अदाकारी से उन्होंने इंसानी अनुभवों की एक विस्तृत श्रृंखला को जीवंत किया। उन्होंने ऐसे किरदार निभाए जिन्होंने लोगों के दिलों और दिमाग पर गहरी छाप छोड़ी।'

राष्ट्रपति मुर्मु ने आगे कहा कि समाज सेवा के प्रति उनका समर्पण वंचितों के प्रति उनकी चिंता को दर्शाता था। उन्होंने इसे भारतीय सिनेमा के लिए एक बड़ी क्षति बताते हुए उनके परिवार और प्रशंसकों के प्रति गहरी संवेदनाएँ प्रकट कीं।

उपराष्ट्रपति ने बताया 'बहुमुखी और बेहद प्रतिभाशाली कलाकार'

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने एक्स पर अपनी पोस्ट में लिखा, 'एक बहुमुखी और बेहद प्रतिभाशाली कलाकार के तौर पर, उन्होंने अपने निभाए हर किरदार में अद्भुत गहराई, संवेदनशीलता और सच्चाई का समावेश किया। भारतीय सिनेमा में उनके अमूल्य योगदान को हमेशा याद किया जाएगा।'

राधाकृष्णन ने कहा कि नाना पाटेकर आने वाली पीढ़ियों के सिनेमा प्रेमियों को प्रेरित करते रहेंगे और हमेशा उनके दिलों में बसे रहेंगे। उन्होंने शोक की इस घड़ी में उनके परिवार, मित्रों और अनगिनत प्रशंसकों के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएँ व्यक्त कीं।

निधन की परिस्थितियाँ

जानकारी के अनुसार, गुरुवार की सुबह गोवा के डोना पाउला स्थित उनके निवास पर उन्हें बेहोशी की अवस्था में पाया गया। उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

गोवा के मणिपाल अस्पताल के ऑन्कोलॉजी प्रमुख डॉ. शेखर सालकर ने बताया, 'अभिनेता नाना पाटेकर को गुरुवार सुबह करीब 4:20 से 4:35 बजे के बीच मृत अवस्था में हमारे अस्पताल लाया गया था। हमारी टीम 4:18 बजे उनके घर पहुँच गई थी और वहीं से सीपीआर शुरू कर दिया था क्योंकि वे कोई प्रतिक्रिया नहीं दे रहे थे। सीपीआर देते हुए ही उन्हें अस्पताल लाया गया, लेकिन तब तक उनका निधन हो गया था।'

नाना पाटेकर का सिनेमाई सफर

नाना पाटेकर केवल अभिनेता नहीं, बल्कि एक कुशल लेखक, फिल्म निर्माता और निर्देशक भी थे। उन्होंने वर्ष 1978 में ड्रामा फिल्म 'गमन' से हिंदी सिनेमा में अपना सफर शुरू किया था। इसके बाद उन्होंने मराठी फिल्मों में भी अपनी अमिट छाप छोड़ी।

1989 में 'परिंदा' से उन्होंने हिंदी सिनेमा में एक यादगार वापसी की, जिसमें निभाए गए गैंगस्टर के किरदार ने उन्हें राष्ट्रीय पहचान दिलाई। वर्ष 1994 में 'प्रहार: द फाइनल अटैक' से उन्होंने निर्देशन की दुनिया में भी कदम रखा। उनके जाने से भारतीय सिनेमा एक ऐसे कलाकार को खो चुका है जिसकी रिक्तता भरना आसान नहीं होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

किरदार की ईमानदारी पर टिका था। यह ऐसे समय में आया है जब मराठी और हिंदी सिनेमा की पहचान के बीच की खाई को पाटने वाले कलाकार दुर्लभ होते जा रहे हैं। राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति दोनों का तत्काल शोक-प्रकटीकरण इस बात का प्रमाण है कि पाटेकर की विरासत सिर्फ सिनेमाघरों तक सीमित नहीं थी — वह किसानों की मदद से लेकर मंच तक फैली एक जीवंत प्रतिबद्धता थी। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर उनकी फिल्मोग्राफी पर केंद्रित होती है, लेकिन उनकी असली विरासत उस नैतिक साहस में है जिसने हर किरदार को सच्चाई से भरा बनाया।
RashtraPress
8 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नाना पाटेकर का निधन कब और कहाँ हुआ?
नाना पाटेकर का निधन 8 अक्टूबर 2026 की सुबह गोवा के डोना पाउला स्थित उनके निवास पर हुआ। उन्हें बेहोशी की अवस्था में पाया गया और मणिपाल अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उन्हें मृत घोषित किया गया। वे 75 वर्ष के थे।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने नाना पाटेकर के निधन पर क्या कहा?
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि नाना पाटेकर ने ऐसे किरदार निभाए जिन्होंने लोगों के दिलों और दिमाग पर गहरी छाप छोड़ी और उनका निधन भारतीय सिनेमा के लिए एक बड़ी क्षति है। उन्होंने समाज सेवा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को भी रेखांकित किया।
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने नाना पाटेकर को किन शब्दों में याद किया?
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने नाना पाटेकर को 'बहुमुखी और बेहद प्रतिभाशाली कलाकार' बताया। उन्होंने कहा कि नाना पाटेकर अपने हर किरदार में अद्भुत गहराई, संवेदनशीलता और सच्चाई लाते थे और आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करते रहेंगे।
नाना पाटेकर का फिल्मी करियर कैसा रहा?
नाना पाटेकर ने 1978 में 'गमन' से हिंदी सिनेमा में शुरुआत की और 1989 में 'परिंदा' में गैंगस्टर के किरदार से राष्ट्रीय पहचान पाई। वे अभिनेता के अलावा लेखक, फिल्म निर्माता और निर्देशक भी थे — उन्होंने 1994 में 'प्रहार: द फाइनल अटैक' से निर्देशन में कदम रखा।
नाना पाटेकर को अस्पताल में क्या स्थिति में लाया गया था?
मणिपाल अस्पताल के डॉ. शेखर सालकर के अनुसार, नाना पाटेकर को गुरुवार सुबह 4:20 से 4:35 बजे के बीच मृत अवस्था में अस्पताल लाया गया। मेडिकल टीम 4:18 बजे उनके घर पहुँची थी और वहीं से सीपीआर शुरू किया गया था, लेकिन वे प्रतिक्रिया नहीं दे रहे थे।
राष्ट्र प्रेस
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