नाना पाटेकर को श्रद्धांजलि: छगन भुजबल बोले — 'आवाज, किरदार और इंसानियत हमेशा जिंदा रहेगी'
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र सरकार के मंत्री छगन भुजबल ने 8 अक्टूबर 2026 को दिवंगत अभिनेता नाना पाटेकर के निधन पर गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि कुछ कलाकार कभी नहीं मरते — वे अपनी कला के माध्यम से पीढ़ी-दर-पीढ़ी जीवित रहते हैं। भुजबल ने एक वीडियो संदेश के ज़रिए नाना पाटेकर को 'नटसम्राट' कहकर भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी।
भुजबल का भावुक संदेश
मंत्री छगन भुजबल ने अपने वीडियो पोस्ट में कहा, 'नाना, आपके गुजर जाने की खबर सुनकर मेरा दिल सुन्न हो गया। कुछ लोग भले ही हमारी जिंदगी में शारीरिक रूप से मौजूद न हों, लेकिन अपने काम, अपनी आवाज और अपने विचारों के जरिए वे हमारे लिए एक रास्ता बन जाते हैं। आप हमारे लिए बिल्कुल वैसे ही थे।'
उन्होंने कहा कि मराठी रंगमंच से लेकर हिंदी और मराठी सिनेमा तक, नाना पाटेकर ने अभिनय का एक अनूठा मुकाम हासिल किया। भुजबल के अनुसार, 'आपकी आवाज, आपकी नजर, आपके डायलॉग्स की धार और किरदारों को निभाते समय दिखने वाली वह बेचैन कर देने वाली शिद्दत — इन सबको भुलाना नामुमकिन है।'
यादगार फिल्में और पुरस्कार
भुजबल ने 'नट सम्राट', 'क्रांतिवीर', 'परिंदा', 'अग्निपंख', 'खामोशी' सहित अनेक फिल्मों का उल्लेख करते हुए कहा कि नाना पाटेकर ने इन किरदारों में महज अभिनय नहीं किया, बल्कि उनमें जान डाल दी।
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स, फिल्मफेयर अवॉर्ड्स और पद्म श्री जैसे प्रतिष्ठित सम्मान नाना की असली दौलत नहीं थे। 'उनकी असली दौलत वे लोग थे जो दिल से उनका सम्मान करते थे और वह प्यार जो उन्हें अपने काम के जरिए मिला' — भुजबल ने कहा।
सामाजिक सरोकार और 'नाम फाउंडेशन'
मंत्री भुजबल ने नाना पाटेकर के सामाजिक कार्यों को भी विशेष रूप से याद किया। उन्होंने कहा कि स्क्रीन पर चाहे कितने भी सख्त नज़र आते हों, नाना पाटेकर का दिल हमेशा इंसानी तकलीफों के प्रति संवेदनशील रहा। किसानों, जरूरतमंदों और संकट में फंसे लोगों के साथ वे हमेशा खड़े रहे।
'नाम फाउंडेशन' के माध्यम से किया गया उनका काम, जो विशेष रूप से महाराष्ट्र के पीड़ित किसानों की सहायता के लिए जाना जाता है, उनकी संवेदनशील आत्मा की स्थायी गवाही के रूप में याद किया जाएगा।
गोवा के मंत्री ने भी जताया शोक
गोवा सरकार के मंत्री रमेश तावड़कर ने भी नाना पाटेकर के निधन को हिंदी फिल्म जगत के लिए बड़ी क्षति बताया। उन्होंने कहा, 'मुझे कई बार उनसे मिलने का मौका मिला। मैं अपनी ओर से उनके परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करता हूं।'
विरासत जो समय से परे है
भुजबल ने अपने संदेश के अंत में कहा कि नाना भले ही चले गए हों, लेकिन उनकी आवाज, उनके किरदार, उनकी इंसानियत और उनके प्रति दिलों में बसा सम्मान हमेशा बना रहेगा। भारतीय सिनेमा और मराठी रंगमंच के इस 'नटसम्राट' की विरासत आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।