नारायणन तिरुपति का बयान, 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम देश की महिलाओं के लिए एक सकारात्मक कदम'
सारांश
Key Takeaways
- नारी शक्ति वंदन अधिनियम का उद्देश्य महिलाओं के लिए राजनीतिक अवसर बढ़ाना है।
- विरोधी दलों का इस विधेयक का विरोध करना महिला सशक्तिकरण में बाधा डालने के रूप में देखा जा रहा है।
- महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अत्याचारों पर सरकार को सख्त कदम उठाने की आवश्यकता है।
चेन्नई, 16 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। तमिलनाडु भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष नारायणन तिरुपति ने बताया कि सदन में गुरुवार को नारी शक्ति वंदन अधिनियम को पेश किया गया।
नारायणन तिरुपति ने बुधवार को समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से बात करते हुए कहा कि यह सभी महिलाओं के लिए शुभ संकेत है, जिसका हमें स्वागत करना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस, डीएमके और इंडिया गठबंधन के अन्य दल इस विधेयक का विरोध कर रहे हैं। उनका यह विरोध महिला सशक्तिकरण में बाधा डालने का प्रयास है, जिसे किसी भी कीमत पर सहन नहीं किया जा सकता।
उन्होंने कहा कि सभी विपक्षी दल इस बिल के खिलाफ सवाल उठा रहे हैं। उनका तर्क है कि इस बिल को वर्तमान में लाने की आवश्यकता क्यों है। मेरा यही कहना है कि इसे लाने में 10 साल का इंतजार क्यों किया जाए। यदि इसे अभी लाया जा रहा है, तो आपत्ति क्यों?
निश्चित रूप से, यदि हम इस विधेयक को सफलतापूर्वक लागू करने में सक्षम होते हैं, तो इससे महिलाओं के लिए राजनीतिक क्षेत्र में 33 प्रतिशत आरक्षण प्राप्त होगा।
उन्होंने तमिलनाडु में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अत्याचारों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि त्रिची में एक 25 वर्षीय महिला ने आत्महत्या कर ली, क्योंकि वहां के डीएमके के सदस्यों ने कुछ वस्तुओं का मुफ्त वितरण किया, जिससे विवाद उत्पन्न हुआ। इस घटना के बाद उस महिला पर अपमानजनक टिप्पणियाँ की गईं और कुछ गुंडों ने उस पर हमला भी किया। इस सबके कारण वह अत्यंत दुखी होकर आत्महत्या करने पर मजबूर हो गई।
इसके अलावा, उन्होंने कोयंबटूर में महिलाओं के खिलाफ किए जा रहे अत्याचारों का उदाहरण दिया, जहां एक महिला के साथ यौन उत्पीड़न की घटना हुई। हम देख रहे हैं कि ऐसे मामले प्रतिदिन बढ़ते जा रहे हैं। खासकर पॉक्सो केस में भी वृद्धि हो रही है। अब समय आ गया है कि सरकार को इन मामलों पर सख्त कदम उठाने चाहिए, लेकिन दुःख की बात है कि इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।