स्पेस टॉयलेट की दिक्कत पर नासा ने जारी किया विस्तृत वीडियो: आर्टेमिस II मिशन की कहानी
सारांश
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नई दिल्ली, 10 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक वीडियो साझा किया है, जो आर्टेमिस II चंद्रमा मिशन के ओरियन स्पेसक्राफ्ट में लगे स्पेस टॉयलेट में आई समस्या पर आधारित है। इस वीडियो में एस्ट्रोनॉट्स ने खुद जानकारी दी है कि स्पेसक्राफ्ट में एक आवश्यक उपकरण, स्पेस टॉयलेट, अचानक कार्य करना बंद कर गया। उन्होंने इस स्थिति से निपटने के उपायों के बारे में भी बताया।
ओरियन स्पेसक्राफ्ट में स्थापित टॉयलेट को ‘यूनिवर्सल वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम’ के नाम से जाना जाता है। इसमें यूरिन को एक टैंक में संचित किया जाता है और फिर दैनिक रूप से क्रू मेंबर्स उसे बाहर निकालते हैं। आर्टेमिस-2 मिशन में उपयोग किया जा रहा यह सिस्टम स्पेस टॉयलेट हवा के तेज प्रवाह पर निर्भर करता है, क्योंकि अंतरिक्ष में गुरुत्वाकर्षण की अनुपस्थिति होती है।
हाल ही में इस सिस्टम में कुछ समस्याएं उत्पन्न हुईं। एस्ट्रोनॉट्स ने वीडियो में कहा, “उस समय हमें कोई प्रवाह नहीं दिख रहा था। इसलिए उस स्थिति में टॉयलेट का उपयोग नहीं कर सकते।”
इस समस्या के कारण क्रू मेंबर्स को रात भर ‘सीसीयूएस’, अर्थात कॉन्टिगेंसी कलेक्शन यूनिट्स, का उपयोग करने की सलाह दी गई। नासा ने इस समस्या को गंभीरता से लिया है और वीडियो के माध्यम से लोगों को पूरी प्रक्रिया समझाने का प्रयास किया है। स्पेस मिशनों में छोटी-छोटी तकनीकी समस्याएं भी बड़ी चुनौती बन सकती हैं, इसलिए इन्हें समय पर हल करना अत्यंत आवश्यक है।
नासा के अनुसार, यह समस्या यूरिन को वैक्यूम में डिस्पोज करने के दौरान उत्पन्न हुई। जबकि शुद्ध पानी को वैक्यूम में डालना अपेक्षाकृत सरल होता है, यूरिन जैसे गंदे तरल पदार्थ के साथ कई चुनौतियाँ आती हैं। इसमें बर्फ बनने (फ्रीजिंग) जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं, जिसे एस्ट्रोनॉट्स ने “बर्फ का तूफान” के रूप में वर्णित किया।
वीडियो में एस्ट्रोनॉट्स ने बताया, “यह एक चुनौतीपूर्ण इंजीनियरिंग समस्या है। जब आप तरल को वैक्यूम में डालते हैं, तो काफी उथल-पुथल होती है। गंदे पानी के मामले में कई ऐसी चीजें होती हैं जिन्हें हम पूरी तरह समझ नहीं पाए हैं।”
नासा ने कहा है कि यह समस्या मिशन के दौरान सामने आई है, जो आर्टेमिस III मिशन से पहले इसे सुधारने का एक अच्छा अवसर है। आर्टेमिस III के द्वारा नासा दोबारा चंद्रमा पर मानव को भेजने की योजना बना रहा है।
एक एस्ट्रोनॉट ने मजाक करते हुए कहा, “मैं अक्सर कहता हूं कि स्पेसक्राफ्ट में स्पेस टॉयलेट शायद सबसे महत्वपूर्ण चीज है।”
गौरतलब है कि आर्टेमिस II मिशन के दौरान स्पेसक्राफ्ट के टॉयलेट में खराबी आई थी, जिसे महिला एस्ट्रोनॉट क्रिस्टीना हैमक कोच ने स्वयं ठीक किया था। क्रिस्टीना ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो में मजाकिया अंदाज में खुद को “स्पेस प्लंबर” भी बताया था।
उन्होंने यह भी बताया कि शुरुआत में ऐसा लगा कि मोटर में कुछ फंस गया है, लेकिन बाद में पता चला कि यह ‘प्राइमिंग’ की एक छोटी तकनीकी समस्या थी, जिसे ठीक कर दिया गया और मिशन को आगे बढ़ाने के लिए तैयार किया गया।