अंतरिक्ष में तारे बने नेविगेशन गाइड: NASA आर्टेमिस-2 एस्ट्रोनॉट जेरेमी हैनसेन ने बताया ओरियन का रास्ता
सारांश
मुख्य बातें
अंतरिक्ष में रास्ता तय करना पृथ्वी पर नेविगेशन से बिल्कुल अलग है — यहाँ न कोई सड़क है, न कोई लैंडमार्क। नासा (NASA) के आर्टेमिस-2 मिशन के क्रू मेंबर और कनाडियन स्पेस एजेंसी (CSA) के एस्ट्रोनॉट जेरेमी हैनसेन ने हाल ही में खुलासा किया कि ओरियन स्पेसक्राफ्ट अंतरिक्ष में अपनी दिशा तय करने के लिए तारों को नेविगेशन संदर्भ-बिंदु के रूप में इस्तेमाल करता है। यह तकनीक सदियों पुरानी समुद्री नौवहन परंपरा और आधुनिक अंतरिक्ष इंजीनियरिंग का अनूठा संगम है।
अंतरिक्ष नेविगेशन की चुनौती
लाखों किलोमीटर की दूरी तय करते हुए सही गंतव्य पर पहुँचना अंतरिक्ष अभियानों की सबसे बड़ी तकनीकी चुनौतियों में से एक है। हैनसेन के अनुसार, मामूली-सी दिशात्मक त्रुटि भी स्पेसक्राफ्ट को किसी ग्रह या खगोलीय पिंड से टकराने, अथवा अनंत अंतरिक्ष में भटकने पर मजबूर कर सकती है। इसीलिए नेविगेशन प्रणाली को अत्यंत सटीक और बहु-स्तरीय बनाया जाता है।
दो मुख्य नेविगेशन विधियाँ
एस्ट्रोनॉट्स अपनी स्थिति, गति और दिशा निर्धारित करने के लिए दो पूरक तरीकों पर निर्भर रहते हैं।
पहला तरीका — पृथ्वी से निर्देशन: पृथ्वी पर स्थित मिशन कंट्रोल सेंटर अपने ट्रैकिंग सिस्टम की सहायता से स्पेसक्राफ्ट की सटीक स्थिति, वेग और दिशा की गणना करता है और एस्ट्रोनॉट्स को निरंतर अपडेट भेजता रहता है। यह संपर्क मिशन की रीढ़ है।
दूसरा तरीका — तारा-आधारित नेविगेशन: ओरियन स्पेसक्राफ्ट में विशेष स्टार-ट्रैकर सिस्टम लगे हैं, जो तारों की स्थिति की तस्वीरें लेकर उनका विश्लेषण करते हैं। ये सिस्टम चंद्रमा की स्थिति और उसकी परछाई का अध्ययन भी करते हैं। तिथि, समय और खगोलीय डेटा के संयोजन से स्पेसक्राफ्ट की सटीक अवस्थिति और गति की गणना की जाती है।
तारे क्यों हैं अपरिहार्य
हैनसेन ने समझाया कि अंतरिक्ष में कोई स्थलचिह्न नहीं होता — तारे ही एकमात्र स्थिर और विश्वसनीय संदर्भ-बिंदु हैं। यह सिद्धांत नया नहीं है; सदियों से समुद्री नाविक ध्रुव तारे और अन्य नक्षत्रों की सहायता से महासागरों को पार करते रहे हैं। आधुनिक एस्ट्रोनॉट्स उसी खगोलीय ज्ञान को परिष्कृत डिजिटल उपकरणों के साथ अंतरिक्ष में लागू कर रहे हैं।
ऑटोमेशन और मैन्युअल नियंत्रण
हैनसेन के अनुसार, ओरियन स्पेसक्राफ्ट अधिकांश समय ऑटोमेशन मोड में उड़ान भरता है, जहाँ सिस्टम स्वयं दिशा-निर्धारण करता है। किंतु आपात या विशेष परिस्थितियों में एस्ट्रोनॉट्स स्पेसक्राफ्ट को मैन्युअल मोड में भी नियंत्रित कर सकते हैं। इस दौरान मिशन कंट्रोल के निर्देशों के साथ-साथ तारों का उपयोग करके वे स्वयं अपनी दिशा निर्धारित करने में सक्षम होते हैं।
आर्टेमिस-2 और भविष्य के मिशन
आर्टेमिस-2 नासा का वह मिशन है, जो चंद्रमा की कक्षा में मानव को भेजने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस मिशन में विकसित नेविगेशन तकनीक भविष्य में मंगल और उससे परे के अभियानों की नींव रखेगी, जहाँ पृथ्वी से संचार में घंटों की देरी हो सकती है और स्वायत्त नेविगेशन की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाएगी।