12 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

अंतरिक्ष में आपात स्थिति से कैसे निपटते हैं एस्ट्रोनॉट्स? शुभांशु शुक्ला ने समझाया 'ऑफ-नॉमिनल सिनेरियो'

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
अंतरिक्ष में आपात स्थिति से कैसे निपटते हैं एस्ट्रोनॉट्स? शुभांशु शुक्ला ने समझाया 'ऑफ-नॉमिनल सिनेरियो'

सारांश

अंतरिक्ष में 80% प्रशिक्षण सामान्य मिशन के लिए नहीं, बल्कि उन क्षणों के लिए होता है जब सब कुछ गलत हो जाए। एस्ट्रोनॉट शुभांशु शुक्ला ने 'ऑफ-नॉमिनल सिनेरियो' की अवधारणा समझाई — जो बताती है कि ISS पर आग या जहरीली गैस जैसी आपात स्थिति में शांत रहना और पहले खुद को सुरक्षित करना ही पूरे दल को बचा सकता है।

मुख्य बातें

शुभांशु शुक्ला ने एक वीडियो में बताया कि एस्ट्रोनॉट्स अपने प्रशिक्षण का लगभग 80 प्रतिशत समय आपात परिस्थितियों की तैयारी में लगाते हैं।
एयरोस्पेस में इसे 'ऑफ-नॉमिनल सिनेरियो' कहते हैं — जब मिशन योजना के अनुसार न चले।
अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर आग और जहरीली गैस रिसाव सबसे गंभीर आपात स्थितियाँ मानी जाती हैं।
शुक्ला ने इमरजेंसी ऑक्सीजन मास्क का प्रदर्शन किया, जो तनाव में भी आसानी से पहना जा सकता है।
मूल सिद्धांत: पहले खुद को सुरक्षित करें — पृथ्वी से 400 किलोमीटर ऊपर भी यही नियम लागू होता है।

अंतरिक्ष अभियानों के दौरान किसी भी क्षण आपातकाल आ सकता है — और इसी संभावना को ध्यान में रखते हुए एस्ट्रोनॉट्स की तैयारी होती है। भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन एवं एस्ट्रोनॉट शुभांशु शुक्ला के एक वीडियो में उन्होंने विस्तार से बताया कि अंतरिक्ष में संकट से निपटने के लिए एस्ट्रोनॉट्स को किस प्रकार प्रशिक्षित किया जाता है। यह वीडियो हाल ही में व्यापक रूप से साझा किया गया है।

क्या है 'ऑफ-नॉमिनल सिनेरियो'

शुक्ला के अनुसार, एस्ट्रोनॉट्स अपने प्रशिक्षण का लगभग 80 प्रतिशत समय सामान्य मिशन की रिहर्सल में नहीं, बल्कि उन परिस्थितियों की तैयारी में लगाते हैं जब कुछ भी योजना के अनुसार न हो। एयरोस्पेस की तकनीकी भाषा में इसे 'ऑफ-नॉमिनल सिनेरियो' कहा जाता है — यानी वह स्थिति जब सब कुछ अपेक्षा के विपरीत हो जाए और दल को तत्काल निर्णय लेने पड़ें।

यह प्रशिक्षण पद्धति इस मान्यता पर टिकी है कि अंतरिक्ष मिशन में छोटी-सी चूक भी जानलेवा हो सकती है। इसलिए बार-बार अभ्यास के ज़रिए यह सुनिश्चित किया जाता है कि असली संकट में एस्ट्रोनॉट घबराने की बजाय शांत रहकर सटीक निर्णय ले सकें।

आईएसएस पर सबसे गंभीर खतरे

अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर सबसे गंभीर आपात स्थितियाँ दो प्रकार की मानी जाती हैं — आग लगना और जहरीली गैस का रिसाव। इन दोनों स्थितियों से निपटने के लिए एस्ट्रोनॉट्स को सुव्यवस्थित और बहु-स्तरीय प्रशिक्षण दिया जाता है।

शुक्ला ने वीडियो में इमरजेंसी ऑक्सीजन मास्क पहनकर उसका प्रदर्शन किया। उन्होंने बताया कि जहरीली गैस रिसाव की स्थिति में यह मास्क एस्ट्रोनॉट की जान बचाने वाला पहला उपकरण है। देखने में यह किसी विज्ञान-कथा फिल्म की याद दिलाता है, लेकिन इसकी डिज़ाइन पूरी तरह व्यावहारिक है — तनाव की स्थिति में यह आसानी से फूल जाता है और पहनने में सरल है।

पहले खुद को सुरक्षित करें

शुक्ला ने एक महत्वपूर्ण सिद्धांत रेखांकित किया — पहले खुद को सुरक्षित करें। उन्होंने हवाई जहाज की सुरक्षा घोषणा का उदाहरण देते हुए कहा कि 'पहले खुद का ऑक्सीजन मास्क लगाएं, फिर दूसरों की मदद करें' — यह सलाह केवल विमान यात्रा के लिए नहीं है।

यही सिद्धांत पृथ्वी से 400 किलोमीटर ऊपर अंतरिक्ष में भी उतनी ही दृढ़ता से लागू होता है। एक असुरक्षित एस्ट्रोनॉट पूरे दल के लिए बोझ बन सकता है, जबकि एक सक्षम और सुरक्षित एस्ट्रोनॉट पूरे क्रू को संकट से उबारने में निर्णायक भूमिका निभा सकता है।

बार-बार अभ्यास क्यों ज़रूरी है

शुक्ला के अनुसार, इन परिस्थितियों की तैयारी एकबारगी नहीं होती — इन्हें बार-बार दोहराया जाता है ताकि संकट के क्षण में सही प्रतिक्रिया स्वाभाविक और स्वचालित हो जाए। यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपने पहले मानव अंतरिक्ष मिशन गगनयान की तैयारियों में जुटा है और भारतीय एस्ट्रोनॉट्स की प्रशिक्षण प्रक्रिया पर देश की निगाहें टिकी हैं।

गौरतलब है कि शुभांशु शुक्ला उन चुनिंदा भारतीय एस्ट्रोनॉट्स में शामिल हैं जो अंतरिक्ष मिशन के लिए चयनित हो चुके हैं। उनका यह वीडियो न केवल तकनीकी जानकारी देता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि अंतरिक्ष अभियान में मानसिक और शारीरिक तैयारी कितनी गहन होती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तब यह समझना ज़रूरी है कि तकनीकी उत्कृष्टता के साथ-साथ मानवीय निर्णय क्षमता और संकट प्रबंधन उतना ही निर्णायक है। '80% समय आपात तैयारी' वाला तथ्य यह भी उजागर करता है कि अंतरिक्ष एजेंसियाँ सफलता की नहीं, विफलता की संभावना को केंद्र में रखकर प्रशिक्षण देती हैं — एक दृष्टिकोण जो ज़मीनी आपदा प्रबंधन और नीति-निर्माण के लिए भी अनुकरणीय है।
RashtraPress
12 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'ऑफ-नॉमिनल सिनेरियो' क्या होता है?
'ऑफ-नॉमिनल सिनेरियो' एयरोस्पेस की वह तकनीकी अवधारणा है जिसमें मिशन के दौरान सब कुछ योजना के विपरीत हो जाता है। शुभांशु शुक्ला के अनुसार, एस्ट्रोनॉट्स इन्हीं परिस्थितियों की तैयारी में अपने प्रशिक्षण का लगभग 80 प्रतिशत समय लगाते हैं।
ISS पर सबसे गंभीर आपात स्थितियाँ कौन-सी हैं?
अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर आग लगना और जहरीली गैस का रिसाव सबसे गंभीर आपात स्थितियाँ मानी जाती हैं। इनसे निपटने के लिए एस्ट्रोनॉट्स को विस्तृत और बार-बार दोहराया जाने वाला प्रशिक्षण दिया जाता है।
अंतरिक्ष में इमरजेंसी ऑक्सीजन मास्क किस काम आता है?
जहरीली गैस रिसाव की स्थिति में यह मास्क एस्ट्रोनॉट को सुरक्षित रखता है। शुक्ला ने बताया कि इसकी डिज़ाइन व्यावहारिक है और तनाव की स्थिति में भी यह आसानी से फूल जाता है और पहना जा सकता है।
अंतरिक्ष में 'पहले खुद को सुरक्षित करें' का सिद्धांत क्यों महत्वपूर्ण है?
शुक्ला के अनुसार, एक असुरक्षित एस्ट्रोनॉट दूसरों की मदद करने में असमर्थ होता है, जबकि एक सक्षम एस्ट्रोनॉट पूरे क्रू को बचा सकता है। यह सिद्धांत पृथ्वी से 400 किलोमीटर ऊपर अंतरिक्ष में भी उतना ही लागू होता है जितना हवाई जहाज में।
शुभांशु शुक्ला कौन हैं और अंतरिक्ष प्रशिक्षण में उनकी भूमिका क्या है?
शुभांशु शुक्ला भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन और भारत के चयनित एस्ट्रोनॉट्स में से एक हैं। वे गगनयान मिशन के लिए तैयारी कर रहे हैं और उनके प्रशिक्षण अनुभव से भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम को महत्वपूर्ण दिशा मिल रही है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 4 सप्ताह पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 3 महीने पहले
  6. 3 महीने पहले
  7. 4 महीने पहले
  8. 1 साल पहले