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शुभांशु शुक्ला ने सुनाया ट्रेनिंग का मज़ेदार किस्सा: स्ट्रेंथ टेस्ट में दोनों पैरों से लगाया ज़ोर, उड़ गई मशीन

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शुभांशु शुक्ला ने सुनाया ट्रेनिंग का मज़ेदार किस्सा: स्ट्रेंथ टेस्ट में दोनों पैरों से लगाया ज़ोर, उड़ गई मशीन

सारांश

शुभांशु शुक्ला ने इंस्टाग्राम पर सुनाया वो किस्सा जब क्वारंटीन के स्ट्रेंथ टेस्ट में दोनों पैरों से ज़ोर लगाकर मशीन हिला दी और पूरा डेटा बर्बाद हो गया — फिर फ्लाइट सर्जन को खुद मशीन पर बैठना पड़ा।

मुख्य बातें

शुभांशु शुक्ला ने इंस्टाग्राम पर अपनी प्री-मिशन ट्रेनिंग का मज़ेदार अनुभव साझा किया।
2025 के क्वारंटीन के दौरान स्ट्रेंथ टेस्ट में दोनों पैरों से ज़ोर लगाने पर मशीन हिल गई और डेटा बेकार हो गया।
अगली कोशिश में फ्लाइट सर्जन स्वयं मशीन पर बैठे ताकि वह स्थिर रहे।
ISS पर अंतरिक्ष यात्री माइक्रोग्रेविटी में मांसपेशियों की क्षति रोकने के लिए प्रतिदिन दो घंटे व्यायाम करते हैं।
बेसलाइन स्ट्रेंथ डेटा मिशन के बाद शरीर में आए बदलावों को मापने के लिए ज़रूरी होता है।

भारतीय वायुसेना के अधिकारी और अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ने अपने अंतरिक्ष मिशन की तैयारियों से जुड़ा एक दिलचस्प और हास्यपूर्ण अनुभव साझा किया है। उन्होंने बताया कि 2025 में लॉन्च से पहले क्वारंटीन के दौरान हुए एक स्ट्रेंथ टेस्ट में उनके उत्साह ने पूरा डेटा चौपट कर दिया — और फिर जो हुआ, वह और भी रोचक था।

अंतरिक्ष में मांसपेशियों की चुनौती

शुक्ला ने अपने इंस्टाग्राम पोस्ट में समझाया कि पृथ्वी पर गुरुत्वाकर्षण हमारे शरीर को हर पल सक्रिय रखता है — चलने, उठने-बैठने जैसी सामान्य गतिविधियों में भी मांसपेशियाँ लगातार काम करती हैं। लेकिन अंतरिक्ष में सूक्ष्म-गुरुत्वाकर्षण (माइक्रोग्रेविटी) के कारण यह प्राकृतिक कसरत बंद हो जाती है, जिससे मांसपेशियाँ धीरे-धीरे कमज़ोर पड़ने लगती हैं।

यही कारण है कि अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर तैनात अंतरिक्ष यात्री प्रतिदिन लगभग दो घंटे व्यायाम करते हैं। यह उनकी दिनचर्या का अनिवार्य हिस्सा है, न कि वैकल्पिक।

क्वारंटीन का मज़ेदार किस्सा

शुक्ला ने बताया कि लॉन्च से पहले 2025 में क्वारंटीन के दौरान उनके कई स्ट्रेंथ टेस्ट किए गए। इन परीक्षणों का उद्देश्य शरीर की आधारभूत स्थिति दर्ज करना था, ताकि मिशन के बाद चिकित्सक यह आकलन कर सकें कि अंतरिक्ष में रहने से शरीर पर क्या प्रभाव पड़ा।

एक परीक्षण में उनके पैरों और मशीन के बीच एक स्ट्रेंथ गेज लगाया गया था। निर्देश स्पष्ट था — केवल एक पैर से दबाव डालना है। लेकिन जोश में आकर शुक्ला ने दोनों पैरों से पूरा ज़ोर लगा दिया। नतीजा? मशीन अपनी जगह से हिल गई और सारा डेटा बेकार हो गया।

फ्लाइट सर्जन का अनोखा समाधान

इस 'तकनीकी विफलता' के बाद टीम ने दूसरी कोशिश में एक अलग रणनीति अपनाई। शुक्ला ने बताया कि अगली बार उनके फ्लाइट सर्जन स्वयं मशीन के ऊपर बैठ गए — ताकि मशीन स्थिर रहे और सही आँकड़े दर्ज हो सकें। यह किस्सा सुनाते हुए शुक्ला ने माना कि यह अनुभव उनकी ट्रेनिंग की यादगार झलकियों में से एक है।

मिशन की तैयारी और वैज्ञानिक महत्व

गौरतलब है कि ये स्ट्रेंथ टेस्ट महज औपचारिकता नहीं थे। अंतरिक्ष चिकित्सा में बेसलाइन डेटा का संग्रह अत्यंत महत्वपूर्ण होता है — यह वही आधार रेखा है जिसके सहारे वैज्ञानिक मिशन के बाद शरीर में आए बदलावों को मापते हैं। माइक्रोग्रेविटी में हड्डियों का घनत्व और मांसपेशियों की शक्ति दोनों प्रभावित होती हैं, इसलिए प्री-मिशन और पोस्ट-मिशन डेटा की तुलना भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों के लिए भी उपयोगी होती है।

शुक्ला का यह अनुभव न केवल उनकी तैयारी की झलक देता है, बल्कि यह भी बताता है कि अंतरिक्ष अभियानों की तैयारी में मानवीय पहलू और हास्य भी शामिल होते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह अंतरिक्ष चिकित्सा की एक गंभीर ज़रूरत को उजागर करता है — बेसलाइन डेटा की सटीकता, जो भविष्य के मिशनों के लिए वैज्ञानिक आधार बनती है। भारत के गगनयान कार्यक्रम के संदर्भ में यह और भी प्रासंगिक है, जहाँ अंतरिक्ष चिकित्सा प्रोटोकॉल अभी निर्माण के चरण में हैं। शुक्ला का ISS अनुभव भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए प्रत्यक्ष ज्ञान का स्रोत है — और इस तरह के किस्से आम जनता को अंतरिक्ष विज्ञान से जोड़ने का सबसे प्रभावी माध्यम भी।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शुभांशु शुक्ला के स्ट्रेंथ टेस्ट में क्या हुआ था?
2025 में लॉन्च से पहले क्वारंटीन के दौरान एक स्ट्रेंथ टेस्ट में शुक्ला को केवल एक पैर से दबाव डालने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन उन्होंने उत्साह में दोनों पैरों से ज़ोर लगा दिया। इससे मशीन हिल गई और पूरा डेटा बेकार हो गया।
अंतरिक्ष यात्री ISS पर इतना व्यायाम क्यों करते हैं?
अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर माइक्रोग्रेविटी के कारण मांसपेशियों को सामान्य रूप से काम नहीं करना पड़ता, जिससे वे कमज़ोर पड़ने लगती हैं। इसीलिए अंतरिक्ष यात्री प्रतिदिन लगभग दो घंटे व्यायाम करते हैं।
स्ट्रेंथ टेस्ट का अंतरिक्ष मिशन से क्या संबंध है?
ये परीक्षण मिशन से पहले शरीर की आधारभूत स्थिति दर्ज करने के लिए किए जाते हैं। मिशन के बाद इसी बेसलाइन डेटा से तुलना कर चिकित्सक समझते हैं कि अंतरिक्ष में रहने से शरीर पर क्या प्रभाव पड़ा।
फ्लाइट सर्जन ने मशीन पर बैठने का अनोखा तरीका क्यों अपनाया?
पहली कोशिश में मशीन हिल जाने के बाद सटीक डेटा दर्ज करने के लिए फ्लाइट सर्जन ने अगली बार खुद मशीन के ऊपर बैठकर उसे स्थिर रखा। यह व्यावहारिक समाधान था ताकि परीक्षण दोबारा विफल न हो।
शुभांशु शुक्ला ने यह किस्सा कहाँ साझा किया?
शुभांशु शुक्ला ने यह अनुभव अपने इंस्टाग्राम पोस्ट के ज़रिए साझा किया, जिसमें उन्होंने अंतरिक्ष में मांसपेशियों की देखभाल और ट्रेनिंग की ज़रूरत भी समझाई।
राष्ट्र प्रेस
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