स्पेस से वापसी पर रिहैबिलिटेशन क्यों ज़रूरी? एस्ट्रोनॉट शुभांशु शुक्ला ने बताई शरीर की चुनौतियाँ
सारांश
मुख्य बातें
अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ने इंस्टाग्राम पर साझा एक पोस्ट में बताया है कि माइक्रोग्रैविटी में हफ्तों या महीनों बिताने के बाद एस्ट्रोनॉट्स के लिए सबसे बड़ी चुनौती शरीर को पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण के अनुरूप ढालने की होती है, और इसी कारण पोस्ट-फ्लाइट रिहैबिलिटेशन कार्यक्रम बेहद आवश्यक हो जाता है। उन्होंने बताया कि लंबे मिशन के बाद मांसपेशियाँ कमज़ोर पड़ती हैं, हड्डियों का घनत्व घटता है, संतुलन बिगड़ता है और रक्त संचार भी प्रभावित होता है।
शरीर पर माइक्रोग्रैविटी का असर
शुक्ला के अनुसार, अंतरिक्ष में लंबे प्रवास के दौरान शरीर ऐसे वातावरण का आदी हो जाता है जहाँ ऊपर-नीचे का अंतर मायने नहीं रखता। गुरुत्वाकर्षण की अनुपस्थिति में मांसपेशियों का उपयोग कम हो जाता है और हड्डियाँ कैल्शियम खोने लगती हैं।
पृथ्वी पर लौटते ही शरीर को अचानक भारीपन महसूस होता है। चलना, खड़े होना और रोज़मर्रा के सामान्य काम भी शुरुआती दिनों में मुश्किल बन जाते हैं।
रिहैबिलिटेशन कार्यक्रम कैसे काम करता है
शुक्ला ने बताया कि पोस्ट-फ्लाइट रिहैबिलिटेशन एक वैज्ञानिक रूप से तैयार कार्यक्रम है, जिसे हर एस्ट्रोनॉट की उम्र, मिशन की अवधि और शारीरिक स्थिति के अनुसार अलग-अलग बनाया जाता है। शुरुआत हल्के स्ट्रेचिंग और बैलेंसिंग एक्सरसाइज़ से होती है।
इसके बाद धीरे-धीरे वेट ट्रेनिंग, कार्डियो और कोऑर्डिनेशन सुधारने वाले अभ्यास जोड़े जाते हैं। विशेषज्ञ प्रशिक्षक पूरी प्रक्रिया की निगरानी करते हैं और तीव्रता क्रमशः बढ़ाते रहते हैं।
प्रशिक्षक एमिल का ज़िक्र
शुक्ला ने अपने प्रशिक्षक एमिल का उल्लेख करते हुए कहा कि कई बार उन्हें ऐसा लगता था कि प्रशिक्षक उन्हें गिराने के नए-नए तरीके ढूँढ रहे हैं। ‘लेकिन यही सीखने का तरीका है — गिरकर, लड़खड़ाकर और फिर संभलकर शरीर को दोबारा मज़बूत बनाया जाता है,’ उन्होंने लिखा।
फिजियोथेरेपी से मानसिक स्वास्थ्य तक
रिहैबिलिटेशन में केवल कसरत ही नहीं, बल्कि फिजियोथेरेपी, न्यूट्रिशन डाइट, मांसपेशियों की मॉनिटरिंग और मानसिक स्वास्थ्य का भी ध्यान रखा जाता है। कई एस्ट्रोनॉट्स को शुरुआती हफ्तों में चक्कर आना, थकान और जोड़ों में दर्द की शिकायत होती है।
इन लक्षणों को क्रमिक व्यायाम और चिकित्सकीय निगरानी के ज़रिए धीरे-धीरे ठीक किया जाता है। यह आमतौर पर हफ्तों तक चलने वाली प्रक्रिया है।
आगे की राह
रिहैबिलिटेशन का अंतिम लक्ष्य एस्ट्रोनॉट को सामान्य जीवन में वापस लाना है, ताकि वे न केवल बिना परेशानी के दैनिक काम कर सकें, बल्कि भविष्य के मिशनों के लिए भी तैयार रहें। जैसे-जैसे दीर्घकालिक अंतरिक्ष मिशनों की संख्या बढ़ रही है, यह क्षेत्र अंतरिक्ष चिकित्सा का अहम स्तंभ बनता जा रहा है।