स्पेस में एस्ट्रोनॉट्स की हाइट में वृद्धि: ग्रैविटी का रहस्य जानिए

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स्पेस में एस्ट्रोनॉट्स की हाइट में वृद्धि: ग्रैविटी का रहस्य जानिए

सारांश

क्या आपने कभी सोचा है कि क्यों एस्ट्रोनॉट्स की हाइट स्पेस में बढ़ जाती है? यह लेख आपको बताएगा कि ग्रैविटी कैसे हमारी लंबाई को प्रभावित करती है। जानें विज्ञान के इस रोचक पहलू के बारे में।

मुख्य बातें

ग्रैविटी के कारण हमारी हाइट दिनभर बदलती है।
स्पेस में माइक्रोग्रैविटी में एस्ट्रोनॉट्स की हाइट औसतन ३% बढ़ जाती है।
रात भर लेटने से रीढ़ की हड्डी फैल जाती है।
नासा ने 'व्हाट योर स्पेस हाइट ?' गतिविधि शुरू की है।
एस्ट्रोनॉट्स को स्पेस में अपने शरीर को संभालने के लिए विशेष सावधानी बरतनी होती है।

नई दिल्ली, 26 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। क्या आप जानते हैं कि हमारी हाइट पूरे दिन में बदलती रहती है? अधिकांश लोग यह मानते हैं कि उनकी लंबाई स्थिर रहती है, लेकिन विज्ञान बताता है कि ग्रैविटी के कारण हम दिन के दौरान १-२ सेंटीमीटर छोटे हो जाते हैं। आइए समझते हैं कि स्पेस में एस्ट्रोनॉट्स की हाइट कैसे बढ़ जाती है।

अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा के अनुसार, सुबह के समय हम सबसे लंबे होते हैं, क्योंकि रात भर लेटने से रीढ़ की हड्डी फैल जाती है। लेकिन स्पेस में यह परिवर्तन और भी अधिक होता है।

नासा के अनुसार, माइक्रोग्रैविटी (वजन का अभाव) में एस्ट्रोनॉट्स की हाइट औसतन ३ प्रतिशत तक बढ़ जाती है, विशेषकर पहले ३-४ दिनों में। यह वृद्धि मुख्य रूप से स्पाइनल कॉलम में होती है।

वास्तव में, धरती पर ग्रैविटी रीढ़ की डिस्क्स पर दबाव डालती है, जबकि स्पेस में ऐसा कोई दबाव नहीं होता, जिससे डिस्क्स फैल जाती हैं। इससे हाइट, बैठने की स्थिति और कंधों की स्थिति प्रभावित होती है।

नासा ने जानकारी दी है कि एस्ट्रोनॉट केट रूबिन्स, जो मिशन एक्स का हिस्सा थीं, उनकी 'अर्थ हाइट' १७१ सेंटीमीटर थी, जो स्पेस में बढ़कर १७४.४ सेंटीमीटर हो गई। यानी लगभग ३.४ सेंटीमीटर की वृद्धि। जब वह धरती पर लौटीं, तो ग्रैविटी के कारण उनकी हाइट फिर से पूर्ववत हो गई।

नासा के मानव अनुसंधान कार्यक्रम में एस्ट्रोनॉट माइक बैरेट और प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर सुधाकर राजुलु ने एक वीडियो में बताया है कि स्पेस में शरीर कैसे परिवर्तित होता है। इस बदलाव को समझने के लिए नासा ने 'व्हाट योर स्पेस हाइट?' नामक एक मजेदार गतिविधि शुरू की थी। यह गतिविधि स्कूल के बच्चों और छात्रों के लिए थी। इस गतिविधि में छात्र सुबह जल्दी उठकर, जब ग्रैविटी का प्रभाव कम होता है, अपनी हाइट मापते हैं। पैर की लंबाई और हाथ के फैलाव (आर्म स्पैन) भी नोट करते हैं।

यह गतिविधि एंथ्रोपोमेट्री या शरीर मापन विज्ञान से संबंधित है। नासा में एंथ्रोपोमेट्रिस्ट्स की टीम होती है, जो एस्ट्रोनॉट्स के माप लेकर स्पेसक्राफ्ट, स्पेस सूट, सीट आकार, हैच ओपनिंग और आईएसएस के डिजाइन तय करती है। स्पेस में हाइट बढ़ने से कंधे ऊंचे हो जाते हैं, जिससे हाथों की पहुँच अधिक होती है। लेकिन, डिजाइन पहले से सही होना आवश्यक है, क्योंकि स्पेस में परिवर्तनों को संभालना चुनौतीपूर्ण होता है।

एस्ट्रोनॉट्स स्पेस में कार्य करते समय पैरों को फर्श के स्टैंड में फंसाकर खुद को संभालते हैं। स्पेसक्राफ्ट में कई फीचर्स समायोज्य होते हैं, क्योंकि लॉन्च और वापसी के समय हाइट अलग-अलग होती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो हमें बताते हैं कि ग्रैविटी का हमारे शरीर पर प्रभाव कितना महत्वपूर्ण है। एस्ट्रोनॉट्स की हाइट में वृद्धि एक अद्भुत उपलब्धि है जो स्पेस में मानव शरीर की अनुकूलन क्षमता को दर्शाती है।
RashtraPress
14 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या स्पेस में हाइट बढ़ने का कोई दुष्प्रभाव है?
स्पेस में हाइट बढ़ने से कोई गंभीर दुष्प्रभाव नहीं होता, लेकिन एस्ट्रोनॉट्स को अपनी शारीरिक स्थिति का ध्यान रखना पड़ता है।
क्या धरती पर वापस आने पर हाइट सामान्य हो जाती है?
हाँ, धरती पर लौटने के बाद ग्रैविटी के प्रभाव से एस्ट्रोनॉट्स की हाइट सामान्य हो जाती है।
माइक्रोग्रैविटी क्या होती है?
माइक्रोग्रैविटी उस स्थिति को कहते हैं जब किसी वस्तु पर लगने वाला ग्रैविटी का प्रभाव बहुत कम हो जाता है।
क्या सभी एस्ट्रोनॉट्स की हाइट बढ़ती है?
हाँ, अधिकांश एस्ट्रोनॉट्स की हाइट स्पेस में जाती समय बढ़ती है, लेकिन यह वृद्धि हर व्यक्ति के लिए अलग हो सकती है।
एस्ट्रोनॉट्स अपनी हाइट कैसे मापते हैं?
एस्ट्रोनॉट्स अपनी हाइट को स्पेस में पहुंचने के बाद और वहां कुछ दिनों के बाद मापते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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