स्पेस में मानव शरीर पर पड़ने वाले प्रभाव और 'रीज' के खतरों की जानकारी
सारांश
Key Takeaways
- स्पेस में मानव शरीर पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है।
- नासा का मानव अनुसंधान कार्यक्रम लंबे समय से चल रहा है।
- 'रीज' में पांच प्रमुख खतरे शामिल हैं।
- स्पेस रेडिएशन से स्वास्थ्य संबंधी गंभीर खतरे हो सकते हैं।
- भविष्य के मिशनों के लिए नासा तैयारी कर रहा है।
नई दिल्ली, 4 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। पिछले 50 वर्षों से अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा का मानव अनुसंधान कार्यक्रम यह जानने की कोशिश कर रहा है कि स्पेस में इंसान के शरीर पर क्या प्रभाव पड़ता है। एक अध्ययन में प्राप्त परिणामों का उपयोग एस्ट्रोनॉट्स की सुरक्षा, स्पेसक्राफ्ट और स्पेससूट को सुधारने, फिटनेस कार्यक्रम, पोषण और मानसिक स्वास्थ्य प्रशिक्षण तैयार करने में किया जाता है। जैसे-जैसे मिशन लो-अर्थ ऑर्बिट से चांद और मंगल तक बढ़ रहे हैं, स्पेस में लंबे समय तक रहने के प्रभाव को समझना और भी महत्वपूर्ण हो गया है।
नासा के आर्टेमिस प्रोग्राम के तहत चांद पर एस्ट्रोनॉट्स को भेजने की तैयारी चल रही है। इसके लिए एस्ट्रोनॉट्स को स्वस्थ रखते हुए अधिक डेटा एकत्रित करना मुख्य उद्देश्य है। विशेषकर, लंबे मिशनों के दौरान शरीर किस प्रकार प्रतिक्रिया करता है, इस पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। स्कॉट केली और क्रिस्टीना कोच जैसे एस्ट्रोनॉट्स ने अंतरिक्ष स्टेशन पर लगभग एक वर्ष बिताया, जो कि पहले के औसत समय से दोगुना है।
एक अध्ययन से स्पेस में शारीरिक और मनोवैज्ञानिक परिवर्तन के मूल्यवान डेटा प्राप्त हुए हैं, जो अगले कई दशकों तक उपयोगी रहेंगे। स्पेस में शरीर पर पड़ने वाले मुख्य खतरों को नासा ने 'रीज' (आरआईडीजीई) नाम दिया है। यह पांच प्रमुख खतरों का संक्षिप्त रूप है: स्पेस रेडिएशन, आइसोलेशन और कॉन्फिनमेंट, पृथ्वी से दूरी, ग्रैविटी क्षेत्र और होस्टली या क्लोज्ड एनवायरनमेंट।
इनमें सबसे बड़ा और चिंताजनक खतरा स्पेस रेडिएशन है। नासा ने बताया है कि पृथ्वी पर मैग्नेटिक फील्ड और वायुमंडल अधिकांश हानिकारक कणों से सुरक्षा प्रदान करता है, लेकिन स्पेस में एस्ट्रोनॉट्स को तीन मुख्य स्रोतों से रेडिएशन का सामना करना पड़ता है: पृथ्वी के मैग्नेटिक फील्ड में फंसे कण, सूरज से आने वाले सौर ऊर्जा कण और गैलेक्टिक कॉस्मिक रेज। विशेष रूप से गैलेक्टिक कॉस्मिक रेज से बचना बहुत कठिन होता है।
रेडिएशन के लंबे समय तक संपर्क से कैंसर, हृदय रोग, मोतियाबिंद जैसी विकृति बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। जानवरों और कोशिका अध्ययन से यह स्पष्ट हुआ है कि स्पेस का रेडिएशन पृथ्वी के रेडिएशन से अधिक खतरनाक होता है। छह महीने के अंतरिक्ष स्टेशन मिशन की तुलना में चांद और मंगल मिशन बहुत लंबे होते हैं, जिससे कुल रेडिएशन डोज बढ़ेगा और स्वास्थ्य संबंधी जोखिम भी बढ़ेंगे।
इसलिए, नासा रेडिएशन मॉनिटरिंग के लिए नए डिटेक्टर विकसित कर रहा है, ताकि रेडिएशन की मात्रा और प्रकार को बेहतर तरीके से समझा जा सके। इसके अलावा, शील्डिंग, वास्तविक समय में निगरानी और विशेष संचालन प्रक्रियाओं से जोखिम को कम करने के प्रयास जारी हैं। स्पेस में छह महीने और वर्षों तक रहने वाले मिशनों में जोखिम समान नहीं होते। नासा इसी अंतर को समझकर भविष्य के गहरे स्पेस मिशनों के लिए बेहतर तैयारी कर रहा है।