31 जुलाई 2026
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आरडीआई योजना में चयन प्रक्रिया पर केंद्र का स्पष्टीकरण, मीडिया रिपोर्ट्स को बताया भ्रामक और संदर्भहीन

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आरडीआई योजना में चयन प्रक्रिया पर केंद्र का स्पष्टीकरण, मीडिया रिपोर्ट्स को बताया भ्रामक और संदर्भहीन

सारांश

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने आरडीआई योजना में हितों के टकराव की मीडिया रिपोर्टों को भ्रामक बताया। TDB की 22 में से 15 परियोजनाएँ शिक्षा मंत्रालय की स्वतंत्र समितियों ने चुनीं और ये फ्रांस के नीस में भारत इनोवेट इवेंट में भी प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं।

मुख्य बातें

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने 31 जुलाई 2026 को आरडीआई योजना में हितों के टकराव की मीडिया रिपोर्टों को भ्रामक, गलत और संदर्भहीन बताया।
TDB के पहले चरण में स्वीकृत 22 परियोजनाओं में से 15 का चयन शिक्षा मंत्रालय की स्वतंत्र विशेषज्ञ समितियों ने किया।
चयनित परियोजनाओं ने फ्रांस के नीस में भारत इनोवेट इवेंट में भारत का प्रतिनिधित्व किया।
हितों के टकराव वाले सदस्यों को प्रस्ताव पर चर्चा और निर्णय प्रक्रिया से अनिवार्य रूप से अलग रहना होता है।
मंत्रालय के अनुसार, अब तक किसी भी पक्ष से कोई शिकायत, आपत्ति या अनियमितता सामने नहीं आई ।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने 31 जुलाई 2026 को स्पष्ट किया कि प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (TDB) द्वारा अनुसंधान, विकास और नवाचार (आरडीआई) योजना के अंतर्गत कंपनियों को वित्तपोषण देने में कथित हितों के टकराव से संबंधित मीडिया रिपोर्टें भ्रामक, गलत और संदर्भहीन हैं। मंत्रालय ने कहा कि TDB में मूल्यांकन की कठोर प्रक्रिया, हितों के टकराव पर स्पष्ट दिशा-निर्देश और पूर्णतः योग्यता-आधारित चयन तंत्र लागू है।

मुख्य घटनाक्रम

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने कहा कि TDB में हितों के टकराव को लेकर एक व्यापक नीति दीर्घकाल से लागू है और इसका व्यवस्थित रूप से पालन किया जाता रहा है। मंत्रालय ने अपने आधिकारिक बयान में कहा, 'इस नीति का लंबे समय से व्यवस्थित रूप से पालन किया जा रहा है और अब तक किसी भी पक्ष से इसकी कोई शिकायत, आपत्ति या अनियमितता सामने नहीं आई है।'

यह स्पष्टीकरण ऐसे समय में आया है जब कुछ मीडिया रिपोर्टों में TDB की आरडीआई फंड वितरण प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए थे। मंत्रालय ने इन्हें सिरे से खारिज करते हुए कहा कि चयन प्रक्रिया की पुष्टि स्वतंत्र बाहरी आकलनों से भी होती है।

चयन प्रक्रिया का विवरण

TDB द्वारा पहले चरण में स्वीकृत 22 परियोजनाओं में से 15 परियोजनाओं का चयन शिक्षा मंत्रालय द्वारा गठित अलग-अलग स्वतंत्र विशेषज्ञ समितियों ने किया था। इन परियोजनाओं ने इसके बाद फ्रांस के नीस शहर में आयोजित प्रतिष्ठित भारत इनोवेट इवेंट में भारत का प्रतिनिधित्व किया।

मंत्रालय ने कहा, 'यह स्वतंत्र सत्यापन स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि चयनित कंपनियाँ अत्याधुनिक डीप-टेक इनोवेटर्स हैं, जिनका चयन पूरी तरह तकनीकी क्षमता, नवाचार की संभावनाओं और राष्ट्रीय महत्व के आधार पर किया गया है।'

हितों के टकराव पर दिशा-निर्देश

मंत्रालय ने बताया कि पहली निवेश समिति (IC) की बैठक से पहले ही TDB ने विस्तृत प्री-इन्वेस्टमेंट गाइडलाइंस और स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) तैयार कर लिए थे। इन दिशा-निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि यदि किसी सदस्य का किसी प्रस्ताव से संभावित हितों का टकराव हो, तो उसे इसकी पूरी जानकारी सार्वजनिक करनी होगी और संबंधित प्रस्ताव पर होने वाली सभी चर्चाओं तथा निर्णय प्रक्रिया से स्वयं को अलग करना अनिवार्य होगा।

गौरतलब है कि TDB ने इन दिशा-निर्देशों का पूरी निष्ठा के साथ पालन किया है और आरडीआई फंड के कार्यान्वयन दिशा-निर्देशों के अनुरूप सभी वित्तपोषण संबंधी निर्णय पूर्णतः योग्यता के आधार पर लिए गए।

आगे क्या

मंत्रालय के इस स्पष्टीकरण के बाद अब यह देखना होगा कि आरडीआई योजना के अगले चरण में चयन और वित्तपोषण की प्रक्रिया किस प्रकार आगे बढ़ती है। TDB की पारदर्शिता और जवाबदेही पर यह बहस भारत में सरकारी अनुसंधान वित्तपोषण के व्यापक ढाँचे को भी प्रभावित कर सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन मूल प्रश्न यह है कि क्या मौजूदा SOP और हितों के टकराव की नीति केवल कागज़ पर है या व्यवहार में भी उतनी ही प्रभावी है। यह ऐसे समय में आया है जब सरकारी अनुसंधान वित्तपोषण की जवाबदेही को लेकर देशभर में बहस तेज़ हो रही है। स्वतंत्र बाहरी आकलन का उल्लेख सकारात्मक है, परंतु इन आकलनों के विस्तृत परिणाम सार्वजनिक किए बिना पारदर्शिता के दावे अधूरे रहेंगे। आरडीआई जैसी योजनाओं की विश्वसनीयता के लिए ज़रूरी है कि चयन प्रक्रिया के दस्तावेज़ नागरिकों के लिए सुलभ हों।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आरडीआई योजना क्या है और इसे कौन लागू करता है?
अनुसंधान, विकास और नवाचार (आरडीआई) योजना केंद्र सरकार की एक वित्तपोषण पहल है, जिसे प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (TDB) लागू करता है। इसका उद्देश्य तकनीकी नवाचार और डीप-टेक स्टार्टअप्स को वित्तीय सहायता प्रदान करना है।
मीडिया रिपोर्टों में आरडीआई योजना पर क्या आरोप लगाए गए थे?
कुछ मीडिया रिपोर्टों में TDB द्वारा आरडीआई योजना के तहत कंपनियों को धनराशि वितरित करने में कथित हितों के टकराव का आरोप लगाया गया था। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने इन रिपोर्टों को भ्रामक, गलत और संदर्भहीन बताया है।
TDB में हितों के टकराव से बचने के लिए क्या व्यवस्था है?
TDB में प्री-इन्वेस्टमेंट गाइडलाइंस और SOP के तहत यदि किसी सदस्य का किसी प्रस्ताव से हितों का टकराव हो, तो उसे इसकी जानकारी सार्वजनिक करनी होती है और संबंधित प्रस्ताव की चर्चा व निर्णय प्रक्रिया से अलग रहना अनिवार्य होता है।
पहले चरण में कितनी परियोजनाएँ चुनी गईं और कैसे?
पहले चरण में TDB ने 22 परियोजनाओं को स्वीकृति दी, जिनमें से 15 का चयन शिक्षा मंत्रालय द्वारा गठित स्वतंत्र विशेषज्ञ समितियों ने किया। इन परियोजनाओं ने फ्रांस के नीस में भारत इनोवेट इवेंट में भारत का प्रतिनिधित्व किया।
क्या TDB की चयन प्रक्रिया की कोई बाहरी जाँच होती है?
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अनुसार, TDB की चयन प्रक्रिया की पुष्टि स्वतंत्र बाहरी आकलनों से होती है। मंत्रालय ने कहा कि अब तक किसी भी पक्ष से कोई शिकायत या अनियमितता सामने नहीं आई है।
राष्ट्र प्रेस
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