23 जुलाई 2026
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आरडीआई फंड के तहत ₹4,744 करोड़ की 22 परियोजनाओं को मंजूरी, ₹2,192 करोड़ की सहायता स्वीकृत

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आरडीआई फंड के तहत ₹4,744 करोड़ की 22 परियोजनाओं को मंजूरी, ₹2,192 करोड़ की सहायता स्वीकृत

सारांश

केंद्र सरकार ने RDI फंड के तहत ₹4,744 करोड़ की 22 परियोजनाओं को हरी झंडी दी और ₹2,192 करोड़ की सहायता स्वीकृत की। साथ ही निजी अंतरिक्ष क्षेत्र में 2014 से अब तक स्टार्टअप्स की संख्या एक से बढ़कर 400 पार हो गई है — यह भारत के विज्ञान-नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र में बड़े बदलाव का संकेत है।

मुख्य बातें

TDB ने RDI फंड के तहत ₹4,744 करोड़ की 22 परियोजनाओं को मंजूरी दी; ₹2,192 करोड़ की RDIF सहायता स्वीकृत।
BIRAC ने RDIF के तहत ₹390.35 करोड़ की 8 परियोजनाओं को शॉर्टलिस्ट किया।
TDB और BIRAC दोनों को ₹1,000-1,000 करोड़ की SLFM स्वीकृति मिल चुकी है; AIF और FRO से ₹8,000 करोड़ की प्रस्तावित प्रतिबद्धता।
₹1 लाख करोड़ के RDI फंड को जुलाई 2025 में मंजूरी मिली थी, औपचारिक शुभारंभ नवंबर 2025 में हुआ।
निजी अंतरिक्ष निवेश 2021-22 के 10.05 करोड़ डॉलर से बढ़कर 31 मार्च 2026 तक 61.85 करोड़ डॉलर हो गया — लगभग छह गुना वृद्धि।
भारत में स्पेस स्टार्टअप्स की संख्या 2014 के 1 से बढ़कर अब 400 से अधिक ; 30+ सैटेलाइट्स कक्षा में स्थापित।

केंद्र सरकार के टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट बोर्ड (TDB) ने रिसर्च, डेवलपमेंट एंड इनोवेशन (RDI) फंड के अंतर्गत ₹4,744 करोड़ की कुल लागत वाली 22 परियोजनाओं को औपचारिक मंजूरी प्रदान की है, जिनके लिए ₹2,192 करोड़ की RDIF सहायता स्वीकृत की गई है। यह जानकारी 23 जुलाई 2026 को संसद में साझा की गई।

संसद में क्या बताया गया

केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने राज्यसभा में बताया कि बायोटेक्नोलॉजी इंडस्ट्री रिसर्च असिस्टेंस काउंसिल (BIRAC) ने भी RDIF के तहत वित्तीय सहायता के लिए ₹390.35 करोड़ की 8 अतिरिक्त परियोजनाओं को शॉर्टलिस्ट किया है।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अनुसार, TDB और BIRAC को RDI फंड के अंतर्गत फोकस्ड रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (FRO) श्रेणी में सेकेंड लेवल फंड मैनेजर (SLFM) के रूप में मान्यता दी गई है। अब तक दोनों SLFM को ₹1,000-1,000 करोड़ की स्वीकृति दी जा चुकी है, जो पात्र प्रौद्योगिकी संस्थाओं और कंपनियों में निवेश के लिए उपलब्ध है।

RDI फंड की पृष्ठभूमि

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जुलाई 2025 में ₹1 लाख करोड़ के RDI फंड को मंजूरी दी थी, और इसका औपचारिक शुभारंभ नवंबर 2025 में किया गया था। SLFM चयन के लिए आमंत्रित आवेदनों में अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड (AIF) से 162 आवेदन और FRO से 38 आवेदन प्राप्त हुए। इनकी प्रक्रिया अभी जारी है और सक्षम प्राधिकारी के समक्ष विचाराधीन है। विभिन्न AIF और FRO को मिलाकर लगभग ₹8,000 करोड़ की प्रस्तावित प्रतिबद्धता है।

RDI फंड का उद्देश्य ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन से निपटने, डीप टेक्नोलॉजी, क्वांटम कंप्यूटिंग, रोबोटिक्स, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तथा कृषि, स्वास्थ्य और शिक्षा में उसके अनुप्रयोग को बढ़ावा देना है।

निजी अंतरिक्ष क्षेत्र में निवेश की उड़ान

डॉ. जितेंद्र सिंह ने राज्यसभा को यह भी बताया कि 2026 में अब तक अंतरिक्ष क्षेत्र में 18.7 करोड़ डॉलर का निजी निवेश दर्ज किया गया है, जबकि 14 जुलाई तक गैर-सरकारी संस्थाओं (NGE) को 105 प्राधिकरण जारी किए जा चुके हैं।

पिछले कुछ वर्षों में निजी निवेश में लगभग छह गुना वृद्धि दर्ज की गई है — 2021-22 में यह 10.05 करोड़ डॉलर था, जो 2023-24 में 34.85 करोड़ डॉलर और 31 मार्च 2026 तक 61.85 करोड़ डॉलर तक पहुँच गया।

IN-SPACe की भूमिका और नियामकीय ढाँचा

डॉ. सिंह ने बताया कि निजी अंतरिक्ष गतिविधियों के प्रत्येक आवेदन का IN-SPACe के निर्धारित मानकों के अनुसार मूल्यांकन किया जाता है और किसी भी परियोजना को मंजूरी देने से पहले रणनीतिक, सुरक्षा एवं राष्ट्रीय हितों का पूरा ध्यान रखा जाता है।

निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी को देखते हुए IN-SPACe सभी हितधारकों के साथ मिलकर अंतरिक्ष गतिविधियों के लिए अलग से सुरक्षा एवं सेफ्टी गाइडलाइंस भी तैयार कर रहा है। अब तक IN-SPACe ने 17 स्पेस स्टार्टअप्स को अंतरिक्ष गतिविधियों के लिए अधिकृत किया है।

स्टार्टअप इकोसिस्टम की तस्वीर

डॉ. सिंह के अनुसार, पिछले 6 वर्षों के सुधारों ने भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र को नया आकार दिया है। 2014 में जहाँ देश में केवल एक स्पेस स्टार्टअप था, वहीं आज यह संख्या 400 से अधिक हो चुकी है।

भारतीय निजी कंपनियाँ सफलतापूर्वक रॉकेट लॉन्च और ऑर्बिटल क्षमताओं का प्रदर्शन कर चुकी हैं, 30 से अधिक सैटेलाइट्स को कक्षा में स्थापित कर चुकी हैं और PSLV ऑर्बिटल एक्सपेरिमेंटल मॉड्यूल (POEM) जैसे प्लेटफॉर्म के माध्यम से करीब 45 पेलोड्स का सफल संचालन कर चुकी हैं। इससे भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र की तकनीकी क्षमता और व्यावसायिक परिपक्वता दोनों मजबूत हुई हैं।

यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में प्रतिस्पर्धा तेज हो रही है और भारत इस क्षेत्र में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की दिशा में ठोस कदम उठा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह होगी कि स्वीकृत परियोजनाएं जमीन पर कितनी तेजी से परिणाम देती हैं — भारत में सरकारी अनुसंधान निधियों का इतिहास धीमे वितरण और जवाबदेही के अभाव से भरा रहा है। निजी अंतरिक्ष क्षेत्र में स्टार्टअप्स की संख्या 1 से 400 पहुँचना उत्साहजनक है, परंतु IN-SPACe द्वारा केवल 17 को ही अधिकृत करना यह बताता है कि नियामकीय प्रक्रिया अभी भी गति के साथ तालमेल नहीं बिठा पाई है। गौरतलब है कि AIF और FRO से प्राप्त 200 आवेदन अभी भी 'विचाराधीन' हैं — इस अनिश्चितता को दूर किए बिना निवेशकों का भरोसा टिकाए रखना चुनौतीपूर्ण होगा।
RashtraPress
23 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

RDI फंड के तहत किन 22 परियोजनाओं को मंजूरी मिली है?
TDB ने RDI फंड के अंतर्गत ₹4,744 करोड़ की कुल लागत वाली 22 परियोजनाओं को मंजूरी दी है, जिनके लिए ₹2,192 करोड़ की RDIF सहायता स्वीकृत की गई है। इन परियोजनाओं का विवरण संसद में 23 जुलाई 2026 को साझा किया गया।
RDI फंड क्या है और इसे कब शुरू किया गया?
RDI (रिसर्च, डेवलपमेंट एंड इनोवेशन) फंड एक ₹1 लाख करोड़ का केंद्रीय कोष है, जिसे जुलाई 2025 में मंत्रिमंडल ने मंजूरी दी और नवंबर 2025 में औपचारिक रूप से लॉन्च किया गया। इसका उद्देश्य AI, क्वांटम कंप्यूटिंग, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, ऊर्जा सुरक्षा और डीप टेक जैसे क्षेत्रों में नवाचार को बढ़ावा देना है।
BIRAC की शॉर्टलिस्ट की गई 8 परियोजनाएं किस क्षेत्र से हैं?
BIRAC ने RDIF के तहत सहायता के लिए ₹390.35 करोड़ की 8 परियोजनाओं को शॉर्टलिस्ट किया है। BIRAC बायोटेक्नोलॉजी क्षेत्र में अनुसंधान को समर्थन देने वाली संस्था है और इसे FRO श्रेणी में SLFM का दर्जा दिया गया है।
भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र में निवेश कितना बढ़ा है?
निजी अंतरिक्ष निवेश 2021-22 के 10.05 करोड़ डॉलर से बढ़कर 31 मार्च 2026 तक 61.85 करोड़ डॉलर हो गया है — यानी लगभग छह गुना वृद्धि। 2026 में अब तक 18.7 करोड़ डॉलर का निवेश दर्ज किया जा चुका है।
IN-SPACe का निजी अंतरिक्ष गतिविधियों में क्या रोल है?
IN-SPACe निजी अंतरिक्ष गतिविधियों के प्रत्येक आवेदन का निर्धारित मानकों के अनुसार मूल्यांकन करता है और रणनीतिक, सुरक्षा एवं राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर मंजूरी देता है। अब तक IN-SPACe ने 17 स्पेस स्टार्टअप्स को अधिकृत किया है और सभी हितधारकों के साथ मिलकर नई सुरक्षा एवं सेफ्टी गाइडलाइंस भी तैयार कर रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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