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इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट फंड ने 128 स्टार्टअप में जुटाया ₹1,335.77 करोड़, कर्नाटक सबसे आगे

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इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट फंड ने 128 स्टार्टअप में जुटाया ₹1,335.77 करोड़, कर्नाटक सबसे आगे

सारांश

केंद्र सरकार के EDF ने महज ₹257.77 करोड़ के सरकारी निवेश से 128 स्टार्टअप में ₹1,335.77 करोड़ और कुल ₹22,553.82 करोड़ का निवेश आकर्षित किया। 373 IP के साथ यह 'फंड ऑफ फंड्स' मॉडल भारत के ESDM और IT पारिस्थितिकी तंत्र के लिए एक नई मिसाल बन रहा है।

मुख्य बातें

इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट फंड (EDF) ने 128 स्टार्टअप और कंपनियों में ₹1,335.77 करोड़ का निवेश जुटाया।
MeitY द्वारा स्थापित EDF ने SEBI -पंजीकृत 8 डॉटर फंड्स में ₹257.77 करोड़ लगाए, जिन्होंने बाज़ार से पाँच गुना अधिक पूंजी जुटाई।
77 कंपनियाँ ESDM और 51 कंपनियाँ IT क्षेत्र में; कर्नाटक में सर्वाधिक 90 कंपनियाँ लाभान्वित।
समर्थित स्टार्टअप्स ने सामूहिक रूप से ₹22,553.82 करोड़ का निवेश आकर्षित किया और 373 बौद्धिक संपदाएँ विकसित कीं।
EDF ने फरवरी 2024 में निवेश चरण पूरा किया; अब डाइवेस्टमेंट चरण में है।

केंद्र सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट फंड (EDF) ने इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिजाइन एंड मैन्युफैक्चरिंग (ESDM) और सूचना प्रौद्योगिकी (IT) क्षेत्र की 128 स्टार्टअप और कंपनियों में ₹1,335.77 करोड़ का निवेश जुटाने में निर्णायक भूमिका निभाई है। 29 जुलाई को जारी एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी सामने आई। यह उपलब्धि भारत के स्वदेशी तकनीकी पारिस्थितिकी तंत्र को मज़बूत करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण पड़ाव मानी जा रही है।

फंड की संरचना और निवेश मॉडल

इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने EDF को 'फंड ऑफ फंड्स' के रूप में स्थापित किया है। 30 जून तक की स्थिति के अनुसार, EDF ने सेबी (SEBI) में पंजीकृत 8 वेंचर कैपिटल फंड्स — जिन्हें 'डॉटर फंड्स' कहा जाता है — में ₹257.77 करोड़ का निवेश किया है। इन डॉटर फंड्स ने आगे चलकर 128 कंपनियों में ₹1,335.77 करोड़ लगाए हैं।

फंड का प्रबंधन कैनबैंक वेंचर कैपिटल फंड्स लिमिटेड (CVFL) कर रही है, जबकि MeitY एंकर निवेशक की भूमिका में है। आधिकारिक बयान के अनुसार, डॉटर फंड्स ने EDF के निवेश का लाभ उठाकर बाज़ार से लगभग पाँच गुना अधिक पूंजी जुटाई है।

स्टार्टअप चयन के मानक

सरकार के अनुसार, निवेश के लिए स्टार्टअप्स का चयन कई मानकों के आधार पर किया गया — नवाचार क्षमता, स्वदेशी तकनीक विकसित करने की योग्यता, बौद्धिक संपदा (IP) सृजन की संभावना, संस्थापक टीम की तकनीकी विशेषज्ञता और बिजनेस मॉडल की विस्तार क्षमता। इन स्टार्टअप्स ने अब तक 373 बौद्धिक संपदाएँ विकसित या हासिल की हैं, जो योजना के नवाचार-केंद्रित स्वरूप को रेखांकित करता है।

क्षेत्रवार और राज्यवार वितरण

समर्थित 128 कंपनियों में से 77 कंपनियाँ ESDM क्षेत्र में और 51 कंपनियाँ IT क्षेत्र में कार्यरत हैं। राज्यवार आँकड़ों के अनुसार, कर्नाटक सबसे आगे है, जहाँ 90 कंपनियों को निवेश मिला है — इनमें से 89 कंपनियाँ बेंगलुरु में स्थित हैं। इसके बाद तेलंगाना, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और दिल्ली का स्थान रहा।

यह ऐसे समय में आया है जब भारत सरकार इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण में आत्मनिर्भरता की ओर तेज़ी से बढ़ रही है। बेंगलुरु में इतनी बड़ी संख्या में कंपनियों का केंद्रित होना यह भी दर्शाता है कि देश का तकनीकी स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र अभी भी भौगोलिक रूप से असमान है।

व्यापक आर्थिक प्रभाव

आधिकारिक बयान के अनुसार, EDF के तहत समर्थित स्टार्टअप्स ने सामूहिक रूप से ₹22,553.82 करोड़ का निवेश आकर्षित किया है — जो इस योजना के गुणात्मक प्रभाव का स्पष्ट संकेत है। गौरतलब है कि EDF ने फरवरी 2024 में अपना निवेश चरण पूरा कर लिया था और अब यह डाइवेस्टमेंट चरण में है।

फंड मैनेजर नियमित रूप से डॉटर फंड्स के प्रदर्शन की निगरानी करता है, जबकि डॉटर फंड्स अपनी निवेशित कंपनियों की परिचालन क्षमता, बाज़ार वृद्धि और तकनीकी विकास का सतत मूल्यांकन करते हैं। आने वाले समय में डाइवेस्टमेंट से प्राप्त रिटर्न यह तय करेगा कि सरकारी 'फंड ऑफ फंड्स' मॉडल भारत के तकनीकी पारिस्थितिकी तंत्र के लिए कितना टिकाऊ साबित होता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

335.77 करोड़ जुटाए गए — कागज़ पर प्रभावशाली दिखता है, लेकिन असली सवाल यह है कि डाइवेस्टमेंट चरण में रिटर्न कितना ठोस होगा। 90 में से 89 कंपनियों का बेंगलुरु में केंद्रित होना यह भी दर्शाता है कि सरकारी तकनीकी निवेश अभी भी टियर-2 और टियर-3 शहरों तक नहीं पहुँच पाया है। 373 IP एक उत्साहजनक संख्या है, परंतु इनका व्यावसायिक उपयोग और राजस्व सृजन अभी सत्यापित नहीं है। जब तक डाइवेस्टमेंट के आँकड़े सार्वजनिक नहीं होते, इस योजना की सफलता का पूरा मूल्यांकन संभव नहीं।
RashtraPress
29 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट फंड (EDF) क्या है?
EDF केंद्र सरकार के MeitY द्वारा स्थापित एक 'फंड ऑफ फंड्स' है, जो SEBI-पंजीकृत वेंचर कैपिटल फंड्स (डॉटर फंड्स) के ज़रिए ESDM और IT क्षेत्र के स्टार्टअप में निवेश करता है। इसका प्रबंधन कैनबैंक वेंचर कैपिटल फंड्स लिमिटेड करती है।
EDF ने अब तक कितना निवेश जुटाया है?
EDF ने 8 डॉटर फंड्स में ₹257.77 करोड़ लगाए, जिन्होंने 128 स्टार्टअप में ₹1,335.77 करोड़ निवेश किए। इन स्टार्टअप्स ने सामूहिक रूप से ₹22,553.82 करोड़ का कुल निवेश आकर्षित किया है।
किन राज्यों को EDF से सबसे अधिक लाभ मिला?
कर्नाटक सबसे आगे है, जहाँ 90 कंपनियों को निवेश मिला — इनमें से 89 बेंगलुरु में हैं। इसके बाद तेलंगाना, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और दिल्ली का स्थान है।
EDF के तहत स्टार्टअप्स का चयन कैसे होता है?
स्टार्टअप्स का चयन नवाचार क्षमता, स्वदेशी तकनीक विकास, बौद्धिक संपदा सृजन की संभावना, संस्थापक टीम की विशेषज्ञता और बिजनेस मॉडल की विस्तार क्षमता के आधार पर किया जाता है।
EDF अभी किस चरण में है?
EDF ने फरवरी 2024 में अपना निवेश चरण पूरा कर लिया था और अब यह डाइवेस्टमेंट चरण में है। फंड मैनेजर नियमित रूप से डॉटर फंड्स और उनकी निवेशित कंपनियों के प्रदर्शन की निगरानी करता रहता है।
राष्ट्र प्रेस
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