इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट फंड ने 128 स्टार्टअप में जुटाया ₹1,335.77 करोड़, कर्नाटक सबसे आगे
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट फंड (EDF) ने इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिजाइन एंड मैन्युफैक्चरिंग (ESDM) और सूचना प्रौद्योगिकी (IT) क्षेत्र की 128 स्टार्टअप और कंपनियों में ₹1,335.77 करोड़ का निवेश जुटाने में निर्णायक भूमिका निभाई है। 29 जुलाई को जारी एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी सामने आई। यह उपलब्धि भारत के स्वदेशी तकनीकी पारिस्थितिकी तंत्र को मज़बूत करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण पड़ाव मानी जा रही है।
फंड की संरचना और निवेश मॉडल
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने EDF को 'फंड ऑफ फंड्स' के रूप में स्थापित किया है। 30 जून तक की स्थिति के अनुसार, EDF ने सेबी (SEBI) में पंजीकृत 8 वेंचर कैपिटल फंड्स — जिन्हें 'डॉटर फंड्स' कहा जाता है — में ₹257.77 करोड़ का निवेश किया है। इन डॉटर फंड्स ने आगे चलकर 128 कंपनियों में ₹1,335.77 करोड़ लगाए हैं।
फंड का प्रबंधन कैनबैंक वेंचर कैपिटल फंड्स लिमिटेड (CVFL) कर रही है, जबकि MeitY एंकर निवेशक की भूमिका में है। आधिकारिक बयान के अनुसार, डॉटर फंड्स ने EDF के निवेश का लाभ उठाकर बाज़ार से लगभग पाँच गुना अधिक पूंजी जुटाई है।
स्टार्टअप चयन के मानक
सरकार के अनुसार, निवेश के लिए स्टार्टअप्स का चयन कई मानकों के आधार पर किया गया — नवाचार क्षमता, स्वदेशी तकनीक विकसित करने की योग्यता, बौद्धिक संपदा (IP) सृजन की संभावना, संस्थापक टीम की तकनीकी विशेषज्ञता और बिजनेस मॉडल की विस्तार क्षमता। इन स्टार्टअप्स ने अब तक 373 बौद्धिक संपदाएँ विकसित या हासिल की हैं, जो योजना के नवाचार-केंद्रित स्वरूप को रेखांकित करता है।
क्षेत्रवार और राज्यवार वितरण
समर्थित 128 कंपनियों में से 77 कंपनियाँ ESDM क्षेत्र में और 51 कंपनियाँ IT क्षेत्र में कार्यरत हैं। राज्यवार आँकड़ों के अनुसार, कर्नाटक सबसे आगे है, जहाँ 90 कंपनियों को निवेश मिला है — इनमें से 89 कंपनियाँ बेंगलुरु में स्थित हैं। इसके बाद तेलंगाना, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और दिल्ली का स्थान रहा।
यह ऐसे समय में आया है जब भारत सरकार इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण में आत्मनिर्भरता की ओर तेज़ी से बढ़ रही है। बेंगलुरु में इतनी बड़ी संख्या में कंपनियों का केंद्रित होना यह भी दर्शाता है कि देश का तकनीकी स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र अभी भी भौगोलिक रूप से असमान है।
व्यापक आर्थिक प्रभाव
आधिकारिक बयान के अनुसार, EDF के तहत समर्थित स्टार्टअप्स ने सामूहिक रूप से ₹22,553.82 करोड़ का निवेश आकर्षित किया है — जो इस योजना के गुणात्मक प्रभाव का स्पष्ट संकेत है। गौरतलब है कि EDF ने फरवरी 2024 में अपना निवेश चरण पूरा कर लिया था और अब यह डाइवेस्टमेंट चरण में है।
फंड मैनेजर नियमित रूप से डॉटर फंड्स के प्रदर्शन की निगरानी करता है, जबकि डॉटर फंड्स अपनी निवेशित कंपनियों की परिचालन क्षमता, बाज़ार वृद्धि और तकनीकी विकास का सतत मूल्यांकन करते हैं। आने वाले समय में डाइवेस्टमेंट से प्राप्त रिटर्न यह तय करेगा कि सरकारी 'फंड ऑफ फंड्स' मॉडल भारत के तकनीकी पारिस्थितिकी तंत्र के लिए कितना टिकाऊ साबित होता है।